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जयशंकर का ओमान दौरा: कुवैत में रक्षा-व्यापार-ऊर्जा पर बैठकों के बाद मस्कट पहुंचे विदेश मंत्री

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जयशंकर का ओमान दौरा: कुवैत में रक्षा-व्यापार-ऊर्जा पर बैठकों के बाद मस्कट पहुंचे विदेश मंत्री

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर की खाड़ी यात्रा महज शिष्टाचार भेंट नहीं — कुवैत में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापार पर ठोस वार्ता के बाद ओमान पहुँचे जयशंकर का अगला पड़ाव न्यूयॉर्क है, जहाँ UNSC सदस्यता अभियान की शुरुआत होगी। यह दौरा भारत की एक साथ कई मोर्चों पर सक्रिय कूटनीति का स्पष्ट संकेत है।

मुख्य बातें

जयशंकर 9 जुलाई को कुवैत दौरे के बाद ओमान की राजधानी मस्कट पहुँचे।
कुवैत में प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री — तीनों शीर्ष नेताओं से अलग-अलग बैठकें हुईं।
रक्षा उद्योग सहयोग, समुद्री सुरक्षा , ऊर्जा, व्यापार, निवेश, तकनीक, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य पर चर्चा हुई।
कुवैत में भारतीय समुदाय से सीधी बातचीत; उनके योगदान और अनुभवों की सराहना की गई।
जयशंकर 13 जुलाई को न्यूयॉर्क में UNSC 2028-29 अभियान की शुरुआत करेंगे।
14-15 जुलाई को ब्रसेल्स में भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की तीसरी बैठक में भाग लेंगे।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कुवैत में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा पर उच्चस्तरीय बैठकों की श्रृंखला पूरी करने के बाद गुरुवार, 9 जुलाई को ओमान की राजधानी मस्कट में प्रवेश किया। यह दौरा भारत की बहुआयामी खाड़ी कूटनीति का हिस्सा है, जिसमें रणनीतिक साझेदारियों को नई गहराई देने की कोशिश की जा रही है।

ओमान में गर्मजोशी से स्वागत

मस्कट पहुँचने पर ओमान के विदेश मंत्रालय के महानिदेशक शेख अहमद अल मस्करी ने जयशंकर का स्वागत किया। जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, "गुरुवार को ओमान पहुंचकर खुशी हुई। ओमान के विदेश मंत्रालय के महानिदेशक शेख अहमद अल मस्करी ने जिस गर्मजोशी से स्वागत किया, उसके लिए उनका धन्यवाद।"

कुवैत में मुख्य बैठकें और चर्चा के बिंदु

इससे पहले बुधवार को जयशंकर ने कुवैत के प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कुवैत में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए कुवैत सरकार के सहयोग की प्रशंसा की और द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के साझा विज़न पर सहमति जताई।

जयशंकर ने कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह से भी विस्तृत वार्ता की। बैठक के बाद उन्होंने कहा, "हमने खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष का इलाके और दुनिया पर पड़ने वाले असर पर चर्चा की। ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के सहयोग की भी समीक्षा की। मुझे भरोसा है कि आने वाले समय में हमारी रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी।"

कुवैत के रक्षा मंत्री अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सलेम अल-सबाह से हुई बैठक में रक्षा उद्योग में सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर विशेष रूप से चर्चा की गई — यह भारत की हिंद महासागर रणनीति के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है।

भारतीय समुदाय से संवाद

जयशंकर ने कुवैत में रहने वाले भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी सीधी बातचीत की। कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि विदेश मंत्री ने भारत के तेज़ी से हो रहे विकास और वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका के बारे में समुदाय को अवगत कराया। जयशंकर ने कहा, "भारत और कुवैत की दोस्ती को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका बहुत अहम है। उनके अनुभव और सुझाव हमारे लिए बेहद मूल्यवान हैं।"

आगे का कार्यक्रम: न्यूयॉर्क और ब्रसेल्स

ओमान दौरे के बाद जयशंकर 13 जुलाई को न्यूयॉर्क रवाना होंगे, जहाँ वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 2028-29 की अवधि के लिए भारत की सदस्यता के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद 14-15 जुलाई को ब्रसेल्स में भारत-यूरोपीय संघ (EU) ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की तीसरी बैठक में भाग लेंगे और यूरोपीय संघ तथा बेल्जियम के अपने समकक्षों से मुलाकात करेंगे। यह दौरा भारत की बहुआयामी विदेश नीति की उस व्यापक रणनीति को रेखांकित करता है, जो खाड़ी से लेकर यूरोप और संयुक्त राष्ट्र तक एक साथ सक्रिय है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पश्चिम और बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय रहती है — लेकिन असली परीक्षा इन बैठकों के ठोस नतीजों में है। कुवैत के साथ रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा तब हो रही है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव बना हुआ है, और भारत का UNSC अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब वैश्विक शक्ति संतुलन तेज़ी से बदल रहा है। यह देखना होगा कि ये उच्चस्तरीय मुलाकातें केवल कूटनीतिक दिनचर्या बनकर रह जाती हैं या द्विपक्षीय समझौतों और UNSC समर्थन के रूप में परिणत होती हैं।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश मंत्री जयशंकर ओमान क्यों गए?
जयशंकर कुवैत में रक्षा, व्यापार और ऊर्जा पर उच्चस्तरीय बैठकें पूरी करने के बाद 9 जुलाई को ओमान पहुँचे। यह उनके छह देशों के दौरे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य खाड़ी देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है।
कुवैत में जयशंकर ने किन नेताओं से मुलाकात की?
जयशंकर ने कुवैत में तीन शीर्ष नेताओं से अलग-अलग बैठकें कीं — प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह, विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह, और रक्षा मंत्री अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सलेम अल-सबाह। इन बैठकों में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और समुद्री सुरक्षा प्रमुख विषय रहे।
जयशंकर का न्यूयॉर्क दौरा किसलिए है?
जयशंकर 13 जुलाई को न्यूयॉर्क जाएँगे, जहाँ वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 2028-29 की अवधि के लिए भारत की सदस्यता के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। यह भारत की बहुपक्षीय कूटनीति का एक अहम कदम है।
भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की बैठक कब और कहाँ होगी?
यह बैठक 14-15 जुलाई को ब्रसेल्स में होगी और यह इस परिषद की तीसरी बैठक होगी। इसमें जयशंकर यूरोपीय संघ और बेल्जियम के अपने समकक्षों से भी मुलाकात करेंगे।
कुवैत में भारतीय समुदाय के मुद्दे पर क्या हुआ?
जयशंकर ने कुवैत में रहने वाले भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से सीधी बातचीत की और उनकी सुरक्षा व कल्याण सुनिश्चित करने के लिए कुवैत सरकार के सहयोग की सराहना की। उन्होंने भारत-कुवैत संबंधों को मजबूत बनाने में प्रवासी भारतीयों की भूमिका को भी रेखांकित किया।
राष्ट्र प्रेस
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