जयशंकर की कुवैत यात्रा: ऊर्जा, रक्षा और व्यापार में सहयोग बढ़ाने पर सहमति, क्राउन प्रिंस से भी मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 8 जुलाई 2026 को कुवैत सिटी में कई उच्चस्तरीय बैठकें कीं, जिनमें ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत-कुवैत सहयोग को और गहरा करने पर सहमति बनी। यह यात्रा जयशंकर की छह देशों की कूटनीतिक दौरे का तीसरा पड़ाव है।
प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस से मुलाकात
जयशंकर ने कुवैत के प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह से भेंट कर कुवैत में रहने वाले भारतीय समुदाय की भलाई और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुवैत सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री की भारत-कुवैत संबंधों को और मज़बूत बनाने की प्रतिबद्धता का स्वागत किया।
इससे पहले जयशंकर ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-सबाह से भी मुलाकात की, जिसमें दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और खाड़ी क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विचार साझा किए। जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'आज सुबह कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-सबाह से मुलाकात करना सम्मान की बात रही। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं। भारत-कुवैत सहयोग को आगे बढ़ाने के उनके प्रयासों की मैं सराहना करता हूं।'
विदेश मंत्री स्तर की वार्ता
जयशंकर ने कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'हमने खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के असर और उसके व्यापक प्रभावों पर चर्चा की। हमने ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में हमारी रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी।'
रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर जोर
कुवैत के रक्षा मंत्री अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सलेम अल-सबाह के साथ हुई बैठक में रक्षा उद्योग में द्विपक्षीय सहयोग और समुद्री सुरक्षा के मुद्दे केंद्र में रहे। यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा है और भारत अपनी समुद्री उपस्थिति को सुदृढ़ करने में जुटा है।
भारतीय समुदाय से संवाद
उच्चस्तरीय बैठकों के बीच जयशंकर ने कुवैत में बसे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा, 'भारत-कुवैत दोस्ती को मजबूत करने में उनकी भूमिका को अच्छी तरह पहचाना जाता है। मैंने उनके अनुभवों और सुझावों को महत्व दिया।' गौरतलब है कि कुवैत में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी कार्यरत हैं, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक और सामाजिक कड़ी का काम करते हैं।
छह देशों की यात्रा का संदर्भ
जयशंकर मंगलवार, 7 जुलाई को कुवैत पहुंचे थे। इससे पहले उन्होंने बहरीन में उप प्रधानमंत्री खालिद बिन अब्दुल्ला अल खलीफा से मुलाकात कर कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की थी। यह दौरा भारत की खाड़ी देशों के साथ कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।