8 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जयशंकर की कुवैत यात्रा: ऊर्जा, रक्षा और व्यापार में सहयोग बढ़ाने पर सहमति, क्राउन प्रिंस से भी मुलाकात

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जयशंकर की कुवैत यात्रा: ऊर्जा, रक्षा और व्यापार में सहयोग बढ़ाने पर सहमति, क्राउन प्रिंस से भी मुलाकात

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर की कुवैत यात्रा महज शिष्टाचार भेंट नहीं थी — ऊर्जा से लेकर रक्षा और समुद्री सुरक्षा तक, हर मोर्चे पर ठोस सहमति बनी। छह देशों के दौरे के तीसरे पड़ाव पर खाड़ी क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक सक्रियता का स्पष्ट संकेत मिला।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 8 जुलाई 2026 को कुवैत सिटी में कई उच्चस्तरीय बैठकें कीं।
कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-सबाह , प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह और विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह से अलग-अलग वार्ता हुई।
ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा और विस्तार पर सहमति बनी।
रक्षा मंत्री अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सलेम अल-सबाह के साथ बैठक में रक्षा उद्योग सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा हुई।
जयशंकर ने कुवैत में बसे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर उनके योगदान की सराहना की।
यह यात्रा जयशंकर के छह देशों के खाड़ी दौरे का तीसरा पड़ाव है; इससे पहले बहरीन में भी बैठकें हुईं।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 8 जुलाई 2026 को कुवैत सिटी में कई उच्चस्तरीय बैठकें कीं, जिनमें ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत-कुवैत सहयोग को और गहरा करने पर सहमति बनी। यह यात्रा जयशंकर की छह देशों की कूटनीतिक दौरे का तीसरा पड़ाव है।

प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस से मुलाकात

जयशंकर ने कुवैत के प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह से भेंट कर कुवैत में रहने वाले भारतीय समुदाय की भलाई और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुवैत सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री की भारत-कुवैत संबंधों को और मज़बूत बनाने की प्रतिबद्धता का स्वागत किया।

इससे पहले जयशंकर ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-सबाह से भी मुलाकात की, जिसमें दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और खाड़ी क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विचार साझा किए। जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'आज सुबह कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-सबाह से मुलाकात करना सम्मान की बात रही। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं। भारत-कुवैत सहयोग को आगे बढ़ाने के उनके प्रयासों की मैं सराहना करता हूं।'

विदेश मंत्री स्तर की वार्ता

जयशंकर ने कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'हमने खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के असर और उसके व्यापक प्रभावों पर चर्चा की। हमने ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में हमारी रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी।'

रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर जोर

कुवैत के रक्षा मंत्री अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सलेम अल-सबाह के साथ हुई बैठक में रक्षा उद्योग में द्विपक्षीय सहयोग और समुद्री सुरक्षा के मुद्दे केंद्र में रहे। यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा है और भारत अपनी समुद्री उपस्थिति को सुदृढ़ करने में जुटा है।

भारतीय समुदाय से संवाद

उच्चस्तरीय बैठकों के बीच जयशंकर ने कुवैत में बसे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा, 'भारत-कुवैत दोस्ती को मजबूत करने में उनकी भूमिका को अच्छी तरह पहचाना जाता है। मैंने उनके अनुभवों और सुझावों को महत्व दिया।' गौरतलब है कि कुवैत में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी कार्यरत हैं, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक और सामाजिक कड़ी का काम करते हैं।

छह देशों की यात्रा का संदर्भ

जयशंकर मंगलवार, 7 जुलाई को कुवैत पहुंचे थे। इससे पहले उन्होंने बहरीन में उप प्रधानमंत्री खालिद बिन अब्दुल्ला अल खलीफा से मुलाकात कर कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की थी। यह दौरा भारत की खाड़ी देशों के साथ कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि ऊर्जा और रक्षा में 'सहमति' कितनी जल्दी ठोस समझौतों में तब्दील होती है। खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच समुद्री सुरक्षा पर जोर देना रणनीतिक दृष्टि से सही है, पर भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और उनके हितों की रक्षा के लिए संस्थागत तंत्र की मांग लंबे समय से अनसुनी है। यह दौरा संकेत देता है कि भारत खाड़ी देशों को केवल ऊर्जा आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है — यह बदलाव सकारात्मक है, बशर्ते कि घोषणाएं कार्रवाई में बदलें।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर की कुवैत यात्रा में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
जयशंकर की कुवैत यात्रा में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा और विस्तार पर सहमति बनी। रक्षा उद्योग सहयोग और समुद्री सुरक्षा भी एजेंडे में शामिल रहे।
जयशंकर ने कुवैत में किन नेताओं से मुलाकात की?
जयशंकर ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-सबाह, प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह, विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह और रक्षा मंत्री अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सलेम अल-सबाह से अलग-अलग मुलाकात की। उन्होंने कुवैत में रहने वाले भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी भेंट की।
जयशंकर की कुवैत यात्रा किस बड़े दौरे का हिस्सा है?
यह यात्रा जयशंकर के छह देशों के खाड़ी दौरे का तीसरा पड़ाव है, जिसका उद्देश्य भारत के विभिन्न देशों के साथ कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को मज़बूत करना है। इससे पहले वे बहरीन में भी बैठकें कर चुके थे।
कुवैत में भारतीय समुदाय के लिए जयशंकर ने क्या कहा?
जयशंकर ने कुवैत में बसे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर भारत-कुवैत संबंधों को मज़बूत करने में उनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने उनके अनुभव और सुझावों को महत्व दिया और उनके योगदान के लिए आभार जताया।
भारत-कुवैत रक्षा सहयोग पर क्या हुआ?
कुवैत के रक्षा मंत्री के साथ बैठक में रक्षा उद्योग में द्विपक्षीय सहयोग और समुद्री सुरक्षा के मुद्दे केंद्र में रहे। यह खाड़ी क्षेत्र में बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत की समुद्री सक्रियता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. कल
  3. 2 दिन पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले