जयशंकर की सोल में दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून से मुलाकात, जहाज निर्माण से रक्षा तक सहयोग की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार, 24 जून 2026 को सोल में दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से द्विपक्षीय वार्ता की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच जहाज निर्माण, व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, संस्कृति और जन-से-जन संपर्क (P2P) जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की विस्तृत समीक्षा की गई। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब हाल ही में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंध नई ऊँचाई पर हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'विदेश मंत्री चो ह्यून से मिलकर अच्छा लगा। हमारी चर्चा हाल ही में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के परिणामों पर आधारित थी।' उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने राजनीतिक, जहाज निर्माण, व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, संस्कृति और जन-से-जन संपर्क के क्षेत्रों में प्रगति की समीक्षा की। इसके अलावा स्टार्टअप, फिनटेक और बहुपक्षीय मंचों में सहयोग के नए अवसरों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
कोरिया वीक और द्विपक्षीय पहल
दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून ने एक्स पर अपनी पोस्ट में बताया कि इस सप्ताह भारत का प्रधानमंत्री कार्यालय 'कोरिया वीक' की मेजबानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें भारतीय बाज़ार में प्रवेश करने वाली कोरियाई कंपनियों की चुनौतियों के समाधान खोजने की बात कही गई थी। चो ह्यून ने भारत के समर्थन के लिए आभार जताया और घोषणा की कि जल्द ही कोरिया में भारतीय कंपनियों के लिए भी इसी तरह की राउंडटेबल आयोजित की जाएगी।
वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा
चो ह्यून के अनुसार, लंच के दौरान दोनों विदेश मंत्रियों ने वैश्विक परिस्थितियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। विशेष रूप से मध्य पूर्व की स्थिति से उत्पन्न आर्थिक प्रभावों पर मिलकर प्रतिक्रिया देने पर दोनों देशों ने सहमति जताई। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ पुनर्गठन के दौर से गुज़र रही हैं और भारत व दक्षिण कोरिया दोनों ही इस बदलाव से प्रभावित हैं।
जयशंकर का संबोधन और साझेदारी का महत्व
बैठक के शुरुआती संबोधन में जयशंकर ने कहा, 'सोल लौटना और अपने समकक्ष से मिलना मेरे लिए खुशी की बात है। यह बैठक समयानुकूल है क्योंकि हाल ही में राष्ट्रपति स्तर की यात्रा हुई है और दुनिया की वर्तमान परिस्थितियों में भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों का महत्व और बढ़ गया है।' उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि वे न्यूयॉर्क, कुआलालंपुर, वाशिंगटन, जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान भी चो ह्यून से मिल चुके हैं — जो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद की गहराई को दर्शाता है।
आगे की राह
जयशंकर ने ज़ोर देकर कहा कि आज विदेश मंत्रियों की ज़िम्मेदारी है कि वे इस संबंध को आगे बढ़ाएँ और विभिन्न सरकारी तथा आर्थिक क्षेत्रों के बीच सहयोग को समन्वित करें, ताकि एक अधिक आधुनिक और भविष्योन्मुखी साझेदारी विकसित हो सके। उनके अनुसार, आज की दुनिया समान विचारधारा वाले, साझा मूल्यों वाले और पारस्परिक विश्वास रखने वाले देशों के सहयोग की माँग करती है। दोनों देशों ने निकट संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई है, और आने वाले समय में भारत-दक्षिण कोरिया रणनीतिक साझेदारी के नए आयाम उभरने की संभावना है।