जयशंकर-चो ह्यून वार्ता: भारत-दक्षिण कोरिया साझेदारी को मिली नई रफ्तार, द्विपक्षीय सहयोग पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 24 जून 2026 को सोल में दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर सहमति बनी। जयशंकर दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर दक्षिण कोरिया पहुँचे हैं। उन्होंने इस बैठक को 'सटीक समय पर' बताया, क्योंकि हाल ही में हुई उच्च-स्तरीय राष्ट्रपति यात्रा के बाद वैश्विक परिदृश्य में द्विपक्षीय संबंधों का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
बैठक का संदर्भ और पृष्ठभूमि
विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर ने बैठक में रेखांकित किया कि चो ह्यून के पदभार संभालने के बाद से दोनों मंत्रियों की मुलाकात न्यूयॉर्क, कुआलालंपुर, वाशिंगटन, जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक और हाल ही में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान हो चुकी है। उन्होंने कहा, 'विदेश मंत्रियों के रूप में दोनों की जिम्मेदारी है कि वे इस रिश्ते को आगे बढ़ाएं और विभिन्न सरकारी तथा आर्थिक क्षेत्रों के बीच सहयोग को बेहतर तरीके से समन्वित करें।'
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी भूमिका को पुनर्परिभाषित कर रहे हैं और प्रौद्योगिकी, रक्षा तथा व्यापार के क्षेत्रों में नए समझौतों की दिशा में काम कर रहे हैं।
साझा मूल्यों पर आधारित साझेदारी
जयशंकर ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में इन संबंधों की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि आज की दुनिया में समान विचारधारा वाले, साझा मूल्यों वाले और आपसी विश्वास रखने वाले देशों के बीच सहयोग अत्यंत आवश्यक हो गया है। गौरतलब है कि भारत और दक्षिण कोरिया दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं और दोनों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक भी हैं।
उन्होंने चो ह्यून की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने इस संबंध को शुरू से ही मजबूत करने का स्पष्ट संकेत दिया है, जिसे भारत भी समान रूप से महत्व देता है।
उच्च-स्तरीय बैठकों से मिली दिशा
जयशंकर ने द्विपक्षीय रिश्तों में आई नई गति का श्रेय हाल की उच्च-स्तरीय बैठकों को दिया। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति यात्रा और जी7 जैसे मंचों ने इस साझेदारी को आगे ले जाने के लिए दिशा प्रदान की है।' भारत की ओर से उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि दोनों देशों के रिश्तों की पूरी संभावनाओं को साकार करने के लिए ठोस और निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
आगे की राह
इस बैठक के बाद दोनों देशों के बीच सरकारी और आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग के नए आयाम खुलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति को और मज़बूती देता है, जिसके तहत भारत दक्षिण-पूर्व और पूर्वी एशिया के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक रूप से गहरा कर रहा है। जयशंकर ने संकेत दिया कि वे भविष्य में और अधिक सकारात्मक चर्चाओं की उम्मीद रखते हैं।