26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जयशंकर का दक्षिण कोरिया दौरा: भारत-कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी को नई मज़बूती, चो ह्यून को भारत का न्योता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जयशंकर का दक्षिण कोरिया दौरा: भारत-कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी को नई मज़बूती, चो ह्यून को भारत का न्योता

सारांश

जयशंकर का सियोल दौरा महज़ शिष्टाचार भेंट नहीं था — यह अप्रैल 2026 में राष्ट्रपति ली जे म्युंग की दिल्ली यात्रा के बाद भारत-कोरिया संबंधों को संस्थागत रूप देने की कड़ी है। रक्षा, तकनीक और जहाज निर्माण से लेकर 'वसुधैव कुटुम्बकम' तक — दोनों देश इंडो-पैसिफिक में एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 24-25 जून 2026 को दक्षिण कोरिया का आधिकारिक दौरा किया।
सियोल में कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून के साथ द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा, तकनीक, जहाज निर्माण, व्यापार और संस्कृति पर चर्चा हुई।
अप्रैल 2026 में कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के नतीजों की समीक्षा की गई।
जयशंकर ने राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशक वाई सुंग-लैक से भी मुलाकात कर क्षेत्रीय सुरक्षा पर विचार साझा किए।
जेजू फोरम 2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण देते हुए जयशंकर ने 'वसुधैव कुटुम्बकम' और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का संदेश दिया।
चो ह्यून को भारत-दक्षिण कोरिया संयुक्त आयोग की अगली बैठक के लिए भारत आने का आधिकारिक निमंत्रण दिया गया।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 24-25 जून 2026 को दक्षिण कोरिया के आधिकारिक दौरे पर अपने समकक्ष कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की और भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर सहमति जताई। यह दौरा कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून के निमंत्रण पर हुआ और दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक जुड़ाव की अगली कड़ी है।

द्विपक्षीय वार्ता: किन मुद्दों पर हुई चर्चा

विदेश मंत्रालय द्वारा साझा जानकारी के अनुसार, सियोल में हुई बैठक में दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की। चर्चा में राजनीतिक संवाद, व्यापार और निवेश, आर्थिक सहयोग, जहाज निर्माण, रक्षा और सुरक्षा, नई तकनीक, स्टार्टअप, संस्कृति, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल रहे।

गौरतलब है कि यह बैठक अप्रैल 2026 में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के नतीजों की अगली कड़ी के रूप में हुई। दोनों मंत्रियों ने उस यात्रा में तय प्राथमिकताओं पर हुई प्रगति का आकलन किया और आने वाले वर्षों में सहयोग को और गहरा करने के रास्तों की पहचान की।

राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशक से मुलाकात

दौरे के दौरान जयशंकर ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशक वाई सुंग-लैक से भी मुलाकात की। दोनों के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। यह बैठक इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहे हैं और दोनों देश बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।

जेजू फोरम में मुख्य भाषण: 'वसुधैव कुटुम्बकम' का संदेश

25 जून 2026 को जयशंकर ने जेजू में आयोजित शांति और समृद्धि के लिए जेजू फोरम 2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया। उन्होंने वैश्विक एकजुटता की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा, 'विडंबना यह है कि जिन चुनौतियों का हम सामना कर रहे हैं, उन्होंने एकजुटता की आवश्यकता को और अधिक मजबूत किया है। चाहे कोविड जैसी महामारी हो, आतंकवाद की घटनाएं हों या फिर चरम जलवायु घटनाओं का प्रभाव, इन समस्याओं को राजनीतिक सीमाओं के भीतर सीमित नहीं किया जा सकता। अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है।'

उन्होंने भारत की बहुपक्षीय दृष्टि को रेखांकित करते हुए कहा, 'भारत में, हम इसे पारंपरिक रूप से 'वसुधैव कुटुम्बकम' के नाम से जानते हैं — दुनिया एक परिवार है। अभी हम जो ज्यादातर उथल-पुथल देख रहे हैं, वह उन समाजों के बारे में है जो इस विश्वास को चुनौती देते हैं।' यह संदेश ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बहुपक्षवाद पर दबाव बढ़ रहा है।

भारत-कोरिया संयुक्त आयोग: आगे की राह

दौरे की एक अहम उपलब्धि यह रही कि जयशंकर ने कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून को भारत-दक्षिण कोरिया संयुक्त आयोग की अगली बैठक के लिए आपसी सहमति से तय तारीख पर भारत आने का आधिकारिक निमंत्रण दिया। दोनों मंत्रियों ने हाल की उच्च-स्तरीय बातचीत के नतीजों को आगे बढ़ाने और साझेदारी को नई ऊँचाई देने के लिए निरंतर संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई। यह कूटनीतिक सक्रियता भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत पूर्वी एशिया के साथ संबंध गहरे करने की रणनीति का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

'विशेष रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा 2015 में मिला था, फिर भी द्विपक्षीय व्यापार की क्षमता और वास्तविक आँकड़ों के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई है। जेजू में 'वसुधैव कुटुम्बकम' का संदर्भ देना प्रतीकात्मक रूप से प्रभावशाली है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि जहाज निर्माण और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में ठोस समझौते कब और किस रूप में मूर्त होते हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर का दक्षिण कोरिया दौरा किस उद्देश्य से हुआ?
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 24-25 जून 2026 को कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून के निमंत्रण पर सियोल गए और भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने के लिए द्विपक्षीय वार्ता की। दौरे में रक्षा, व्यापार, तकनीक और बहुपक्षीय सहयोग पर चर्चा हुई।
जेजू फोरम 2026 में जयशंकर ने क्या कहा?
जयशंकर ने 25 जून 2026 को जेजू फोरम के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण देते हुए कहा कि महामारी, आतंकवाद और जलवायु संकट जैसी चुनौतियाँ राजनीतिक सीमाओं में नहीं बँधतीं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने भारत की 'वसुधैव कुटुम्बकम' की अवधारणा को वैश्विक एकजुटता के संदर्भ में रखा।
भारत-दक्षिण कोरिया संयुक्त आयोग की अगली बैठक कब होगी?
जयशंकर ने कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून को भारत-दक्षिण कोरिया संयुक्त आयोग की अगली बैठक के लिए आपसी सहमति से तय तारीख पर भारत आने का निमंत्रण दिया है। बैठक की सटीक तारीख अभी दोनों पक्षों द्वारा तय की जानी है।
इस दौरे की पृष्ठभूमि क्या है?
अप्रैल 2026 में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग भारत दौरे पर आए थे, जिसके नतीजों को आगे बढ़ाने के लिए यह मंत्री-स्तरीय बैठक हुई। दोनों देशों के बीच 2015 से 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा है।
जयशंकर ने दक्षिण कोरिया में किन अधिकारियों से मुलाकात की?
जयशंकर ने सियोल में विदेश मंत्री चो ह्यून के साथ द्विपक्षीय बैठक की और राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशक वाई सुंग-लैक से भी मुलाकात कर क्षेत्रीय व वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर विचार साझा किए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. 2 दिन पहले
  4. 4 दिन पहले
  5. 4 दिन पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले