जयशंकर 22-25 जून को मंगोलिया और दक्षिण कोरिया दौरे पर, सेमीकंडक्टर-AI सहयोग पर रहेगा फोकस
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 22 से 25 जून 2026 तक मंगोलिया और दक्षिण कोरिया (कोरिया गणराज्य) की आधिकारिक यात्रा पर रवाना होंगे। इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को नई ऊर्जा देना है। विदेश मंत्रालय ने सोमवार को इस दौरे की पुष्टि करते हुए विस्तृत कार्यक्रम साझा किया।
मंगोलिया दौरा: 22-23 जून
जयशंकर 22 और 23 जून को उलानबटार में रहेंगे, जहाँ वे मंगोलिया के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और अपने समकक्ष विदेश मंत्री बी. बत्त्सेत्सेग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग की समीक्षा और दीर्घकालिक संबंधों को और सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित रहेगा।
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब 13 अक्टूबर 2025 को मंगोलियाई राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना की भारत यात्रा के दौरान जयशंकर से उनकी मुलाकात हुई थी। उस बातचीत को द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया था। गौरतलब है कि भारत और मंगोलिया ने 24 दिसंबर 1955 को राजनयिक संबंध स्थापित किए थे, और भारत ने 22 फरवरी 1971 को उलानबटार में अपना रेज़िडेंट मिशन खोला था। दोनों देश सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की साझा विरासत से जुड़े हैं।
दक्षिण कोरिया दौरा: 24-25 जून
24 और 25 जून को जयशंकर दक्षिण कोरिया पहुँचेंगे, जहाँ वे वहाँ के विदेश मंत्री चो ह्युन के साथ विस्तृत वार्ता करेंगे। 25 जून को वे जेजू में आयोजित प्रतिष्ठित जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी में मुख्य भाषण देंगे।
यह दौरा अप्रैल 2026 में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की भारत यात्रा के बाद की कड़ी है। उस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने भारत-कोरिया गणराज्य संयुक्त रणनीतिक दृष्टिकोण के रोड मैप पर सहमति जताई थी। अब इस दौरे में उस रोड मैप को आगे बढ़ाने पर केंद्रित चर्चा होने की उम्मीद है।
तकनीकी और आर्थिक सहयोग पर फोकस
भारत-दक्षिण कोरिया वार्ता में सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्रिटिकल मिनरल्स और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को प्राथमिकता मिलने की संभावना है। इसके अलावा, सप्लाई चेन की मज़बूती, रक्षा सहयोग और भारत-कोरिया व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) के तहत हुई प्रगति की समीक्षा भी एजेंडे में शामिल रहने की उम्मीद है।
हिंद-प्रशांत में भारत की बढ़ती सक्रियता
यह दौरा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की सक्रिय कूटनीतिक उपस्थिति का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मंगोलिया और दक्षिण कोरिया दोनों के साथ एक ही यात्रा में जुड़ाव यह दर्शाता है कि भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक भागीदारी को व्यापक और गहरा करने की दिशा में काम कर रहा है। इस यात्रा के नतीजे आने वाले महीनों में भारत की विदेश नीति की दिशा को और स्पष्ट करेंगे।