9 अगस्त 2026
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जयशंकर का मंगोलिया दौरा: राष्ट्रपति उखना व संसद अध्यक्ष से मुलाकात, रिफाइनरी परियोजना का किया निरीक्षण

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जयशंकर का मंगोलिया दौरा: राष्ट्रपति उखना व संसद अध्यक्ष से मुलाकात, रिफाइनरी परियोजना का किया निरीक्षण

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर की मंगोलिया यात्रा महज़ शिष्टाचार नहीं थी — रिफाइनरी निरीक्षण, बौद्ध पांडुलिपि डिजिटलीकरण और शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के साथ यह भारत की मध्य एशिया में गहरी होती कूटनीतिक और आर्थिक पकड़ का संकेत है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 22–23 जून 2026 को उलानबातर की दो दिवसीय यात्रा की।
मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना , संसद अध्यक्ष एस.
ब्याम्बात्सोग्त और शिक्षा मंत्री एल.
एन्ख-अम्गालन से मुलाकात हुई।
डोर्नोगोवी प्रांत में भारत-सहयोगित मंगोल रिफाइनरी परियोजना स्थल का निरीक्षण किया गया।
व्यापार, रक्षा, खनन, महत्वपूर्ण खनिज , हवाई संपर्क और पीपल-टू-पीपल संबंधों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
10 लाख बौद्ध पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण परियोजना और गंडनतेगचिनलेन मठ को भारत के निरंतर सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 22–23 जून 2026 को उलानबातर की दो दिवसीय यात्रा के दौरान मंगोलिया के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। यह यात्रा मंगोलिया की विदेश मंत्री बी. बत्त्सेत्सेग बटमुंख के निमंत्रण पर हुई और भारत-मंगोलिया रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

उच्च-स्तरीय बैठकें और वार्ता

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, जयशंकर ने मंगोलिया के विदेश मंत्री बी. बत्त्सेत्सेग और कैबिनेट सचिवालय के प्रमुख बी. एन्खबयार के साथ विस्तृत वार्ता की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना से शिष्टाचार भेंट की तथा संसद के अध्यक्ष एस. ब्याम्बात्सोग्त और शिक्षा मंत्री एल. एन्ख-अम्गालन से भी मुलाकात की।

दोनों पक्षों ने अक्टूबर 2025 में मंगोलिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की और आगे के सहयोग का रोडमैप तय किया।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

वार्ता में व्यापार, शिक्षा, संस्कृति, रक्षा, खनन एवं महत्वपूर्ण खनिज, आपूर्ति शृंखला, हवाई संपर्क और पीपल-टू-पीपल संबंधों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी 'पड़ोस-प्रथम' और 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत मध्य एशिया में अपनी उपस्थिति को सुदृढ़ करने पर ज़ोर दे रहा है।

मंगोल रिफाइनरी परियोजना स्थल का निरीक्षण

जयशंकर ने डोर्नोगोवी प्रांत के अल्तानशिरी में भारत के सहयोग से निर्माणाधीन मंगोल रिफाइनरी परियोजना स्थल का दौरा किया। यह दौरा मंगोलियाई विदेश मंत्री बत्त्सेत्सेग और उद्योग एवं खनिज संसाधन मंत्री गोंगोर डामडिनन्याम के साथ हुआ। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जयशंकर ने लिखा, "यह लैंडमार्क भारत-मंगोलिया फ्रेंडशिप प्रोजेक्ट लगातार आगे बढ़ रहा है। इसमें शामिल अलग-अलग टीमों के साथ चल रहे कामों की स्थिति की समीक्षा की।"

गंडन मठ और बौद्ध पांडुलिपि डिजिटलीकरण

सांस्कृतिक कूटनीति के तहत जयशंकर ने उलानबातर स्थित ऐतिहासिक गंडनतेगचिनलेन मठ का भी दौरा किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, "यह मठ भारत और मंगोलिया के बीच विशेष और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक है।" इसके साथ ही, भारत-मंगोलिया साझेदारी के तहत 10 लाख बौद्ध पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण की परियोजना पर चल रहे काम को देखकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि भारत इस मठ को आगे भी सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह यात्रा अक्टूबर 2025 की राष्ट्रपति-स्तरीय बैठक के बाद उच्च-स्तरीय संपर्क की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। ऊर्जा, खनन और सांस्कृतिक क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग के साथ, भारत-मंगोलिया रणनीतिक साझेदारी अब ठोस परियोजनाओं के ज़रिए नई परिभाषा पा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन महत्वपूर्ण खनिजों और मध्य एशियाई भू-राजनीति में उसकी स्थिति भारत के लिए रणनीतिक रूप से मूल्यवान है। यह यात्रा चीन और रूस के बीच 'लैंडलॉक्ड' मंगोलिया के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी को दर्शाती है, जो मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर अनदेखी रह जाती है। असली कसौटी यह होगी कि रिफाइनरी परियोजना और खनिज सहयोग कितनी जल्दी व्यावसायिक परिणामों में बदलते हैं।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एस. जयशंकर की मंगोलिया यात्रा का उद्देश्य क्या था?
यह यात्रा मंगोलिया की विदेश मंत्री बी. बत्त्सेत्सेग के निमंत्रण पर हुई और इसका मुख्य उद्देश्य भारत-मंगोलिया रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करना था। दोनों देशों ने व्यापार, रक्षा, खनन, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग पर विस्तृत चर्चा की।
मंगोल रिफाइनरी परियोजना क्या है और इसमें भारत की क्या भूमिका है?
मंगोल रिफाइनरी परियोजना डोर्नोगोवी प्रांत के अल्तानशिरी में भारत के सहयोग से निर्माणाधीन एक तेल रिफाइनरी है। जयशंकर ने 23 जून 2026 को इस स्थल का निरीक्षण किया और इसे 'लैंडमार्क भारत-मंगोलिया फ्रेंडशिप प्रोजेक्ट' बताया।
जयशंकर ने मंगोलिया में किन नेताओं से मुलाकात की?
जयशंकर ने राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना, विदेश मंत्री बी. बत्त्सेत्सेग, कैबिनेट सचिवालय प्रमुख बी. एन्खबयार, संसद अध्यक्ष एस. ब्याम्बात्सोग्त और शिक्षा मंत्री एल. एन्ख-अम्गालन से मुलाकात की।
बौद्ध पांडुलिपि डिजिटलीकरण परियोजना क्या है?
भारत-मंगोलिया साझेदारी के तहत उलानबातर के गंडनतेगचिनलेन मठ में 10 लाख बौद्ध पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण की परियोजना चल रही है। जयशंकर ने इस काम का निरीक्षण किया और भारत की निरंतर प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत-मंगोलिया संबंधों में यह यात्रा कितनी अहम है?
यह यात्रा अक्टूबर 2025 में मंगोलिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के बाद उच्च-स्तरीय संपर्क की अगली कड़ी है। ऊर्जा, खनिज और सांस्कृतिक क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग के साथ यह भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत मध्य एशिया में गहरी होती कूटनीतिक उपस्थिति को दर्शाती है।
राष्ट्र प्रेस
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