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जयशंकर ने मंगोल रिफाइनरी प्रोजेक्ट साइट का दौरा किया, $1.7 अरब की भारत-मंगोलिया मित्रता परियोजना की समीक्षा

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जयशंकर ने मंगोल रिफाइनरी प्रोजेक्ट साइट का दौरा किया, $1.7 अरब की भारत-मंगोलिया मित्रता परियोजना की समीक्षा

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर का मंगोलिया दौरा महज़ शिष्टाचार भेंट नहीं — यह $1.7 अरब की उस परियोजना की ज़मीनी जाँच थी जो भारत की अब तक की सबसे बड़ी सॉफ्ट LoC पहल है। अल्तानशिरी रिफाइनरी दोनों देशों की विकास-केंद्रित कूटनीति की असली परीक्षा है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 23 जून 2026 को मंगोलिया के अल्तानशिरी में मंगोल रिफाइनरी प्रोजेक्ट की कंस्ट्रक्शन साइट का दौरा किया।
भारत ने इस परियोजना के लिए $1.7 अरब की सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट दी है — यह भारत की वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी ऐसी पहल है।
साइट दौरे में मंगोलिया की विदेश मंत्री बत्त्सेत्सेग बटमुंख और उद्योग एवं खनन मंत्री गोंगोर दमदिन्नयम भी उपस्थित रहे।
जयशंकर ने PM मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागिन खुरेलसुख की पिछले वर्ष हुई वार्ता के निर्णयों की प्रगति की समीक्षा की।
दोनों देशों ने पिछले वर्ष राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया था।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 23 जून 2026 को मंगोलिया के डोर्नोगोवी प्रांत स्थित अल्तानशिरी में निर्माणाधीन मंगोल रिफाइनरी प्रोजेक्ट की कंस्ट्रक्शन साइट का दौरा किया और कार्य प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। यह परियोजना भारत सरकार की ओर से दी गई 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर की सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC) पर आधारित है, जो वैश्विक स्तर पर भारत की सबसे बड़ी ऐसी पहल है।

साइट दौरे में कौन रहे मौजूद

कंस्ट्रक्शन साइट के निरीक्षण के दौरान मंगोलिया की विदेश मंत्री बत्त्सेत्सेग बटमुंख और उद्योग एवं खनन मंत्री गोंगोर दमदिन्नयम भी उपस्थित रहे। तीनों मंत्रियों ने परियोजना से जुड़ी विभिन्न टीमों के साथ बैठक कर निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति का आकलन किया।

जयशंकर ने एक्स पर लिखा, "यह लैंडमार्क भारत-मंगोलिया फ्रेंडशिप प्रोजेक्ट लगातार आगे बढ़ रहा है। इसमें शामिल अलग-अलग टीमों के साथ चल रहे कामों की स्थिति की समीक्षा की।" उन्होंने यह भी कहा कि प्रोजेक्ट साइट पर भारतीय और मंगोलियन कार्यबल से सीधी बातचीत की और "मुश्किल हालात में इतने बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने में उनके समर्पण और प्रतिबद्धता के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।"

भारत-मंगोलिया रणनीतिक साझेदारी

विदेश मंत्री बटमुंख के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जयशंकर ने कहा, "भारत और मंगोलिया रणनीतिक साझेदार हैं। हमारे रिश्ते गहरी सभ्यतागत और आध्यात्मिक जुड़ाव, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, विकास की इच्छाओं और लोगों के बीच मजबूत संबंधों पर आधारित हैं।"

गौरतलब है कि पिछले वर्ष भारत और मंगोलिया ने अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया था। यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब दोनों देश अपनी साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के प्रयास में जुटे हैं।

PM मोदी-राष्ट्रपति खुरेलसुख वार्ता के फैसलों की समीक्षा

जयशंकर ने बताया कि इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागिन खुरेलसुख के बीच पिछले वर्ष भारत यात्रा के दौरान हुई बातचीत में लिए गए निर्णयों और उनकी प्रगति की समीक्षा करना था। उन्होंने कहा, "हमने अपने द्विपक्षीय सहयोग के हर पहलू पर चर्चा की, जिसमें विकास से जुड़ी साझेदारी भी शामिल है। इसमें तेल रिफाइनरी परियोजना सबसे महत्वपूर्ण है।"

परियोजना का महत्व और आगे की राह

अल्तानशिरी तेल रिफाइनरी परियोजना न केवल मंगोलिया की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीतियों का भी अहम हिस्सा है। $1.7 अरब की सॉफ्ट LoC के साथ यह परियोजना भारत की विदेश नीति में विकास-केंद्रित कूटनीति का प्रतीक बन रही है। दोनों देशों के बीच इस परियोजना की सफलता भविष्य में और गहरे ऊर्जा सहयोग की नींव रख सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन $1.7 अरब की सॉफ्ट LoC के बावजूद परियोजना की समयसीमा और निर्माण की वास्तविक प्रगति पर आधिकारिक स्तर पर पारदर्शिता सीमित रही है। जयशंकर का व्यक्तिगत रूप से साइट दौरा यह संकेत देता है कि नई दिल्ली इस परियोजना को रणनीतिक प्राथमिकता मानती है — खासकर तब जब चीन मध्य एशिया में अपनी उपस्थिति तेज़ी से बढ़ा रहा है। असली सवाल यह है कि क्या यह परियोजना तय समय और लागत के भीतर पूरी होगी, क्योंकि भारत की विदेशी LoC परियोजनाओं का इतिहास मिला-जुला रहा है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगोल रिफाइनरी प्रोजेक्ट क्या है?
मंगोल रिफाइनरी प्रोजेक्ट मंगोलिया के डोर्नोगोवी प्रांत के अल्तानशिरी में निर्माणाधीन एक तेल रिफाइनरी परियोजना है, जिसे भारत सरकार की $1.7 अरब की सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट से वित्तपोषित किया जा रहा है। यह वैश्विक स्तर पर भारत की सबसे बड़ी सॉफ्ट LoC पहल है।
जयशंकर का मंगोलिया दौरा क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दौरा PM मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख के बीच पिछले वर्ष हुई वार्ता के निर्णयों की प्रगति की समीक्षा के लिए था। साथ ही, यह भारत-मंगोलिया रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने का अवसर भी था।
भारत और मंगोलिया के राजनयिक संबंध कितने पुराने हैं?
भारत और मंगोलिया ने पिछले वर्ष अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया था। दोनों देशों के बीच संबंध सभ्यतागत, आध्यात्मिक और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं।
मंगोल रिफाइनरी परियोजना से मंगोलिया को क्या फायदा होगा?
यह परियोजना मंगोलिया को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी, क्योंकि अभी मंगोलिया अपनी ईंधन ज़रूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। रिफाइनरी के चालू होने से देश की ऊर्जा सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार अपेक्षित है।
भारत की 'सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट' क्या होती है?
सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC) एक रियायती ऋण सुविधा है जो भारत सरकार विकासशील देशों को उनकी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए देती है। इसमें ब्याज दर सामान्य बाज़ार दर से कम होती है और पुनर्भुगतान की शर्तें लचीली होती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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