जयशंकर का भूटान दौरा: ऊर्जा, विकास और क्षेत्रीय मुद्दों पर भारत-भूटान में व्यापक समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर के 16 से 18 सितंबर 2026 तक के तीन दिवसीय भूटान दौरे के समापन पर दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग के हर पहलू की गहन समीक्षा की और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण की पुष्टि की। यह दौरा भूटान के विदेश एवं विदेश व्यापार मंत्री ल्योंपो डी. एन. ढुंग्येल के निमंत्रण पर हुआ और 18 सितंबर 2026 को जारी संयुक्त बयान के साथ संपन्न हुआ।
दौरे की पृष्ठभूमि और महत्व
संयुक्त बयान में भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच विशेष और बहुआयामी साझेदारी को और सुदृढ़ बनाने में हुई प्रगति का स्वागत किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंध भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने नवंबर 2025 में भूटान का दौरा किया था, और जयशंकर की यह यात्रा उस यात्रा के बाद की कूटनीतिक निरंतरता के रूप में देखी जा रही है।
ऊर्जा सहयोग में बड़े कदम
दोनों मंत्रियों ने मार्च 2024 की ऊर्जा साझेदारी पर जॉइंट विजन के क्रियान्वयन में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। इस संदर्भ में दो बड़े कदमों का उल्लेख किया गया — पहला, 1,020 मेगावाट के पुनातसांगचू-II हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का उद्घाटन और उसके टैरिफ प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर; और दूसरा, 1,200 मेगावाट के पुनातसांगचू-I हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के बांध निर्माण का पुनः आरंभ।
संयुक्त बयान के अनुसार, भूटान में ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ₹4,000 करोड़ की रियायती 'लाइन ऑफ क्रेडिट' से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर को दोनों पक्षों ने सराहा। भारतीय कंपनियों की भूटानी हाइड्रोपावर परियोजनाओं में सक्रिय भागीदारी को भी दोनों देशों के ऊर्जा सहयोग को रफ्तार देने वाला बताया गया।
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी और कनेक्टिविटी
जयशंकर ने भूटान के राजा के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC) के विजन के लिए भारत सरकार के समर्थन को दोहराया। दोनों देशों ने जीएमसी पर बने जॉइंट वर्किंग ग्रुप के माध्यम से चल रही बातचीत का स्वागत किया और इस परियोजना पर सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
संयुक्त बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि भारत ने असम के हातिसार में एक इमिग्रेशन चेक पोस्ट बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे गेलेफू तक निवेशकों और यात्रियों की आवाजाही सुगम होगी। इसके अलावा, भारत ने 1 नवंबर 2026 को प्रोजेक्ट 108 चोर्टेन्स/स्तूपों के लिए तीसरे देशों के नागरिकों के आने-जाने को सुविधाजनक बनाने हेतु हातिसार में एक विशेष अस्थायी इमिग्रेशन सुविधा शुरू करने का निर्णय लिया है।
विकास सहयोग और अन्य समझौते
जयशंकर ने भूटान के विकास लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। भूटान ने अपनी 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों में भारत से मिल रही सहायता की सराहना की।
भारत ने 2028-2029 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता की भारतीय उम्मीदवारी का समर्थन करने पर भूटान का धन्यवाद किया। साथ ही, भारत ने भूटान द्वारा इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) के फ्रेमवर्क एग्रीमेंट को मंजूरी दिए जाने का स्वागत किया।
क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दे और आगे की राह
दोनों विदेश मंत्रियों ने मौजूदा जटिल अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए और इस माहौल में भारत-भूटान के घनिष्ठ संबंधों की अहमियत को स्वीकार किया। संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों देशों के बीच 'एक मिसाल पेश करने वाली साझेदारी' है, जो भरोसे, आपसी सद्भाव और लोगों के बीच गहरे संबंधों पर आधारित है।
यह दौरा दोनों देशों के बीच ऊर्जा, बुनियादी ढाँचे और कूटनीतिक समन्वय की दिशा में आने वाले वर्षों में और अधिक ठोस सहयोग की नींव रखता है।