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भारत और भूटान के बीच बिजली व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर

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भारत और भूटान के बीच बिजली व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर

सारांश

भारत और भूटान ने द्विपक्षीय बिजली व्यापार को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण समझौते किए हैं, जो ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देंगे। जानें कैसे ये समझौते दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होंगे।

मुख्य बातें

भारत और भूटान के बीच दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन 2025 में हुआ था।
रिएक्टिव पावर एक्सचेंज के लिए तकनीकी ढांचा तैयार किया गया है।
दोनों देशों का सहयोग स्वच्छ ऊर्जा में है।
ये समझौते बिजली व्यापार को सुदृढ़ करेंगे।

नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत और भूटान ने अपने द्विपक्षीय बिजली व्यापार को सुदृढ़ करने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के अनुसार, ये समझौते पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना के टैरिफ प्रोटोकॉल और रिएक्टिव पावर एक्सचेंज के लिए रिएक्टिव एनर्जी अकाउंटिंग की कार्यप्रणाली से जुड़े हैं।

ये समझौते भारत के ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर और भूटान के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री जेम शेरिंग के बीच थिम्फू में हुई बैठक के दौरान साइन किए गए।

1020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने 11 नवंबर 2025 को संयुक्त रूप से किया था। इस परियोजना से 19 सितंबर 2025 से भारत को अतिरिक्त बिजली निर्यात की जा रही है। टैरिफ प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर से दोनों देशों के बीच जलविद्युत सहयोग को और मजबूती मिलेगी।

दूसरा समझौता रिएक्टिव पावर एक्सचेंज के लिए तकनीकी ढांचा तैयार करता है, जिससे ग्रिड की स्थिरता बढ़ेगी, बिजली आदान-प्रदान की दक्षता सुधरेगी और सीमा पार बिजली व्यापार को सुगम बनाया जा सकेगा।

चार दिवसीय भूटान दौरे पर पहुंचे मनोहर लाल खट्टर ने भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत और भूटान के संबंध पारस्परिक विश्वास और समझ पर आधारित रहे हैं, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में घनिष्ठ सहयोग देखने को मिलता है। यह दौरा ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दोनों देशों ने बिजली क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक उन्नत द्विपक्षीय संस्थागत ढांचा भी स्थापित किया है। इसके तहत गैर-जलविद्युत ऊर्जा, सीमा पार ट्रांसमिशन, परियोजना वित्तपोषण, क्षमता निर्माण और संस्थागत साझेदारी जैसे क्षेत्रों में नियमित समीक्षा और समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।

माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान हुई बैठकों से भविष्य में सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे दोनों देशों की समृद्धि और विकास को बढ़ावा मिलेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि क्षेत्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता भी लाएगा।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और भूटान के बीच ये समझौते कब हस्ताक्षरित हुए?
ये समझौते 9 अप्रैल को थिम्फू में हस्ताक्षरित हुए।
पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना की क्षमता क्या है?
इस परियोजना की क्षमता 1020 मेगावाट है।
इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इनका उद्देश्य द्विपक्षीय बिजली व्यापार को सुदृढ़ करना है।
क्या ये समझौते स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में मदद करेंगे?
जी हां, ये समझौते स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास में सहयोग बढ़ाएंगे।
भारत और भूटान के संबंधों का आधार क्या है?
ये संबंध पारस्परिक विश्वास और समझ पर आधारित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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