भारत-भूटान रणनीतिक साझेदारी: ₹10,000 करोड़ की सहायता, 920 MW जलविद्युत परियोजना और नई कनेक्टिविटी
सारांश
मुख्य बातें
भारत और भूटान के बीच दशकों पुरानी मित्रता अब एक नए और व्यापक रणनीतिक आयाम में प्रवेश कर चुकी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक वर्ष में दोनों देशों के बीच आर्थिक योजना, ऊर्जा परिवर्तन, क्षेत्रीय संपर्क और ज्ञान साझाकरण — इन चार प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुआ है। 1949 और 2007 की मैत्री संधियों की नींव पर खड़ी यह साझेदारी अब परियोजना-आधारित सहायता से आगे बढ़कर संस्थागत और भविष्योन्मुखी स्वरूप ग्रहण कर रही है।
आर्थिक सहयोग: 13वीं पंचवर्षीय योजना को भारत का समर्थन
हाल ही में संपन्न 5वीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता में भारत द्वारा भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024–29) के लिए घोषित ₹10,000 करोड़ (100 अरब नगुल्ट्रम) की सहायता की समीक्षा की गई। इस पैकेज में से ₹6,860 करोड़ की राशि 82 उच्च प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए आवंटित की गई है, जिनमें स्वास्थ्य सेवाएँ, शहरी अवसंरचना और आपदा प्रतिरोधी विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
शेष राशि भूटान के आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम के लिए बजटीय सहायता के रूप में दी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मॉडल की विशेषता यह है कि भारतीय सहायता भूटान पर बाहर से थोपी गई नहीं है, बल्कि वह भूटान की अपनी राष्ट्रीय विकास रणनीति का अभिन्न हिस्सा है — जिससे स्थानीय स्वामित्व और परियोजनाओं की दीर्घकालिक प्रभावशीलता सुनिश्चित होती है।
ऊर्जा साझेदारी: 920 MW जलविद्युत परियोजना में संयुक्त उद्यम
ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों की साझेदारी का सबसे मजबूत स्तंभ बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की JSW एनर्जी और भूटान की ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन (DGPC) ने 920 मेगावाट पुनात्सांगछू-III जलविद्युत परियोजना के विकास के लिए एक संयुक्त उद्यम स्थापित किया है। इस उद्यम में DGPC की 51% और JSW एनर्जी की 49% हिस्सेदारी होगी, और यह परियोजना भूटान की सबसे बड़ी जलविद्युत योजनाओं में से एक मानी जा रही है।
इसके अतिरिक्त, भूटान सरकार और भारतीय निर्यात-आयात बैंक (Exim Bank) के बीच ₹4,000 करोड़ की अम्ब्रेला ऋण सुविधा भी सक्रिय हो चुकी है, जिसका उपयोग नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण में किया जाएगा।
कनेक्टिविटी: नए व्यापार मार्ग और डिजिटल सेतु
दोनों देश अपनी साझा सीमा को एक जीवंत आर्थिक गलियारे में बदलने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं। दक्षिण-पूर्वी भूटान के सामरंग और असम के उदालगुड़ी जिले को जोड़ने वाला एक नया भूमि सीमा शुल्क मार्ग विकसित किया जा रहा है, जिससे कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामग्री और दैनिक उपभोग की वस्तुओं के आवागमन को सुगमता मिलेगी। यह मार्ग भूटान के दक्षिणी क्षेत्रों को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से और अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ेगा।
डिजिटल मोर्चे पर, गुवाहाटी में शुरू की गई पहली अंतरराष्ट्रीय डाक सहयोग पहल के तहत इंडिया पोस्ट और भूटान पोस्ट के बीच संबंधों को औपचारिक रूप दिया गया है। इसमें यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन के 'PosTransfer' सिस्टम को भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे दोनों देशों के बीच वित्तीय और डाक सेवाएँ अधिक सुलभ होंगी। रेल संपर्क के क्षेत्र में भी भारत सीमा तक विस्तार कर रहा है, और सीमा पर लॉजिस्टिक केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
दोनों देशों के नेताओं का संदेश
भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने भारत की 80वीं स्वतंत्रता वर्षगाँठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे संदेश में भारत को 'अडिग साझेदार और बड़े भाई' की संज्ञा दी। इसके जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत थिम्फू के साथ अपने विशेष संबंधों को अत्यंत महत्व देता है और भूटान की संप्रभुता, समृद्धि तथा सकल राष्ट्रीय खुशहाली (Gross National Happiness) के प्रति उसकी प्रतिबद्धता अटूट है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है और पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों की प्रकृति वैश्विक ध्यान का केंद्र बनी हुई है। गौरतलब है कि भूटान-चीन सीमा वार्ता की पृष्ठभूमि में भारत-भूटान साझेदारी की यह मजबूती रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सीमा पर लॉजिस्टिक केंद्रों की स्थापना और ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त उद्यम इस साझेदारी को आने वाले वर्षों में और गहरा बनाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो सकते हैं।