24 अगस्त 2026
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यानबू तट पर टैंकर पर प्रोजेक्टाइल हमला, मुख्य डेक पर लगी आग; यूकेएमटीओ की पुष्टि

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यानबू तट पर टैंकर पर प्रोजेक्टाइल हमला, मुख्य डेक पर लगी आग; यूकेएमटीओ की पुष्टि

सारांश

सऊदी अरब के प्रमुख तेल बंदरगाह यानबू से महज 117 किमी दूर एक टैंकर पर प्रोजेक्टाइल हमला — लाल सागर में हूती खतरे का नया अध्याय। चालक दल सुरक्षित, लेकिन वैश्विक तेल आपूर्ति मार्ग पर मंडरा रहा संकट गहरा होता जा रहा है।

मुख्य बातें

यूकेएमटीओ ने 24 अगस्त को पुष्टि की कि यानबू से 63 नॉटिकल मील (117 किमी) पश्चिम में एक टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ।
जहाज के मुख्य डेक पर आग लगी; जहाज की कंपनी के सुरक्षा अधिकारी के अनुसार चालक दल सुरक्षित है।
वैनगार्ड टेक ने इसे सऊदी झंडे वाले जहाज पर मिसाइल हमला बताया।
इससे पहले 17 अगस्त को हूती ने मोचा के पास सऊदी लैंडिंग शिप और चार एस्कॉर्ट जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले का दावा किया था।
यानबू होर्मुज़ के विकल्प के रूप में सऊदी तेल निर्यात का प्रमुख मार्ग है — इस हमले से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर की आशंका।

यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (यूकेएमटीओ) ने सोमवार, 24 अगस्त को पुष्टि की कि सऊदी अरब के प्रमुख तेल बंदरगाह यानबू से लगभग 63 नॉटिकल मील (117 किमी) पश्चिम में एक टैंकर पर 'अज्ञात प्रोजेक्टाइल' से हमला किया गया, जिससे जहाज के मुख्य डेक पर आग भड़क उठी। जहाज की कंपनी के सुरक्षा अधिकारी के अनुसार, चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं।

हमले का ब्यौरा

ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा कंपनी वैनगार्ड टेक ने बताया कि हमले का शिकार हुआ जहाज सऊदी झंडे वाला था और उस पर मिसाइल से हमला किया गया, जिसके बाद उसमें आग लग गई। यूकेएमटीओ ने इसे 'अज्ञात प्रोजेक्टाइल' बताया है, जबकि वैनगार्ड टेक ने इसे मिसाइल हमला करार दिया — दोनों विवरणों में मामूली अंतर है जिसे अधिकारी अभी जाँच रहे हैं।

यानबू लाल सागर के तट पर स्थित सऊदी अरब का सबसे बड़ा ऑयल एक्सपोर्ट टर्मिनल है, जहाँ से रोज़ाना लाखों बैरल कच्चा तेल लोड किया जाता है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव के बाद यानबू सऊदी तेल निर्यात का एक प्रमुख वैकल्पिक मार्ग बन चुका है।

हूती विद्रोहियों का बढ़ता खतरा

पिछले महीने यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने रेड सी में सऊदी अरब से जुड़े जहाजों की नाकेबंदी की घोषणा की थी। इसके बाद से यानबू से होने वाली शिपिंग में भी बाधाएँ आई हैं। इससे पहले 17 अगस्त को हूती ने दावा किया था कि उन्होंने लाल सागर में दक्षिण-पश्चिमी बंदरगाह शहर मोचा के निकट सऊदी सेना के एक लैंडिंग शिप और उसके साथ चल रहे चार एस्कॉर्ट जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया था।

हूती सेना के प्रवक्ता याह्या सरी ने उस ऑपरेशन के बारे में कहा था कि यह हमला 'कई बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल करके किया गया और सीधा व सटीक था।' उन्होंने दावा किया कि लैंडिंग जहाज में आग लग गई, जबकि कुछ एस्कॉर्ट नावें डूब गईं और अन्य में आग लगाई गई — हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

रणनीतिक महत्व

मोचा रणनीतिक बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य के निकट सरकार-नियंत्रित एक बंदरगाह शहर है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। यह विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री चोकपॉइंट्स में से एक है, जहाँ से वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है।

यह ऐसे समय में आया है जब लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हमलों की श्रृंखला लगातार जारी है। गौरतलब है कि हूती हमलों के कारण कई बड़ी शिपिंग कंपनियाँ पहले ही इस मार्ग से अपने जहाज हटा चुकी हैं।

आगे की स्थिति

यूकेएमटीओ ने क्षेत्र में जहाजों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है। अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक बलों ने इस घटना का संज्ञान लिया है। ताज़ा हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी संगठन ने नहीं ली है और जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इस मार्ग पर लगातार हमले वैश्विक तेल बाज़ार में अस्थिरता की नई लहर ला सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गश्त की मौजूदगी के बावजूद हमले जारी हैं — यह सवाल उठाता है कि मौजूदा सुरक्षा ढाँचा इस खतरे के लिए पर्याप्त है या नहीं।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यानबू के पास टैंकर पर हमला कब और कहाँ हुआ?
यह हमला 24 अगस्त को सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह से लगभग 63 नॉटिकल मील (117 किमी) पश्चिम में हुआ। यूकेएमटीओ ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि जहाज के मुख्य डेक पर आग लग गई।
क्या टैंकर के चालक दल को नुकसान पहुँचा?
जहाज की कंपनी के सुरक्षा अधिकारी के अनुसार चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं और सभी मौजूद हैं। आग मुख्य डेक तक सीमित बताई गई है।
इस हमले के पीछे कौन है?
अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालाँकि, पिछले महीने यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने रेड सी में सऊदी जहाजों की नाकेबंदी की घोषणा की थी और 17 अगस्त को मोचा के पास सऊदी जहाजों पर हमले का दावा किया था।
यानबू बंदरगाह रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
यानबू सऊदी अरब का प्रमुख ऑयल एक्सपोर्ट टर्मिनल है जहाँ से रोज़ाना लाखों बैरल कच्चा तेल निर्यात होता है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर तनाव बढ़ने के बाद यह सऊदी तेल निर्यात का मुख्य वैकल्पिक मार्ग बन गया है।
बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य का इस संकट से क्या संबंध है?
बाब अल-मंदाब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला रणनीतिक समुद्री चोकपॉइंट है। मोचा इसी के निकट स्थित है और हूती इस मार्ग पर नियंत्रण या बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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