होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज पर प्रोजेक्टाइल हमला, आग लगी; चालक दल सुरक्षित बचाया गया
सारांश
मुख्य बातें
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक व्यापारिक जहाज पर 20 जुलाई को प्रोजेक्टाइल हमला हुआ, जिसके बाद जहाज में भीषण आग लग गई। ब्रिटिश नौसैनिक एजेंसी यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने पुष्टि की कि जहाज पर सवार सभी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
हमले का विवरण
UKMTO के अनुसार, यह हमला ओमान के कुमजार तट से लगभग 8 समुद्री मील (करीब 15 किलोमीटर) उत्तर-पश्चिम में हुआ। जहाज पर प्रोजेक्टाइल दागे जाने के बाद आग भड़क उठी। एजेंसी ने बताया कि चालक दल ने सुरक्षित रूप से जहाज छोड़ दिया और उन्हें एक टग बोट ने बचा लिया। हमले के समय आग बुझाई नहीं जा सकी थी और जहाज समुद्र में बहता रहा।
सतर्कता की अपील
UKMTO ने क्षेत्र से गुजरने वाले सभी जहाजों को उच्च सतर्कता बरतने की सलाह दी है। एजेंसी ने कहा कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत जाँच अधिकारियों को दी जाए। यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक समुद्री व्यापार पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री की चेतावनी
इस घटना से एक दिन पहले, सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने आरोप लगाया कि ईरान होर्मुज का इस्तेमाल सैन्य दबाव बनाने के लिए कर रहा है। फिलीपींस रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में रूबियो ने कहा, 'अमेरिका होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा, हालांकि यह जिम्मेदारी केवल अमेरिका की नहीं होनी चाहिए।' उन्होंने अन्य देशों से इस रूट की सुरक्षा में अधिक योगदान देने की अपील की।
ईरानी दावे और क्षेत्रीय तनाव
इस बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कथित तौर पर दावा किया कि उसने जॉर्डन के अल-अजराक एयरबेस पर अमेरिकी सेना के 20 हैंगर नष्ट किए और बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों को नुकसान पहुँचाया। ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के हवाले से यह भी दावा किया गया कि IRGC की बैलिस्टिक मिसाइलों ने अकाबा एयरपोर्ट पर खड़े अमेरिकी C-17 ट्रांसपोर्ट विमान और P-8 निगरानी विमान को भी निशाना बनाया। गौरतलब है कि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और इन्हें कथित तौर पर स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया गया है।
आगे की स्थिति
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है, जिससे दुनिया का लगभग 20% समुद्री तेल व्यापार गुजरता है। इस क्षेत्र में बढ़ती घटनाएँ वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों और समुद्री बीमा दरों पर दबाव बढ़ा सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों ने स्थिति पर नज़र बनाए रखी है।