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होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रखने की संयुक्त राष्ट्र की अपील, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक चिंता

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होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रखने की संयुक्त राष्ट्र की अपील, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक चिंता

सारांश

होर्मुज़ जलडमरूमध्य में IRGC के ड्रोन हमले और अमेरिकी जवाबी कार्रवाई के बाद संयुक्त राष्ट्र मैदान में उतरा है। प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक की अपील — जलमार्ग खुला रखो, नाविकों की जान बचाओ — वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते खतरे की गंभीरता को दर्शाती है।

मुख्य बातें

संयुक्त राष्ट्र ने 27 जून 2025 को होर्मुज़ जलडमरूमध्य को 'सतत रूप से खुला' रखने की अपील की।
प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने सभी पक्षों से समझौतों का पालन करने और क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देने को कहा।
25 जून को IRGC ने सिंगापुर के कार्गो पोत 'एमवी एवर लवली' पर ड्रोन हमला किया था।
अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई में ईरान के मिसाइल-ड्रोन ठिकानों और तटीय रडार साइट्स को निशाना बनाया।
IRGC ने दावा किया कि उसने भी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए।
NIAC ने दोनों देशों से बमों की जगह कूटनीतिक माध्यमों से मतभेद सुलझाने का आग्रह किया।

संयुक्त राष्ट्र ने 27 जून 2025 को होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य टकराव के बीच सभी पक्षों से संयम बरतने और जलमार्ग को 'सतत रूप से खुला' रखने की अपील की है। यह अपील ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाइयों का सिलसिला तेज़ हो गया है और वैश्विक समुद्री व्यापार पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, "यह महत्वपूर्ण है कि सभी पक्ष हर उस समझौते का पालन करें, जिस पर उन्होंने हस्ताक्षर किए हैं।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी संबंधित पक्षों को क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के व्यापक हितों पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए।

दुजारिक ने जहाज़ों पर फंसे नाविकों की भलाई का विशेष उल्लेख करते हुए कहा, "हज़ारों पुरुष और महिलाएं जहाज़ों पर फंसे हुए हैं, जिन पर हम सभी उन वस्तुओं के लिए निर्भर हैं जिनका हम रोज़ाना उपभोग करते हैं।" यह बयान होर्मुज़ संकट के मानवीय आयाम को रेखांकित करता है।

मुख्य घटनाक्रम: हमले और जवाबी कार्रवाई

25 जून को सिंगापुर के कार्गो पोत 'एमवी एवर लवली' पर ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ड्रोन हमला किया था। इसके जवाब में अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान पर सैन्य हमले किए।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल-ड्रोन ठिकानों और तटीय रडार साइट्स को निशाना बनाया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "ईरान ने सीज़फायर तोड़ा, इसलिए जवाबी कार्रवाई की गई।"

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, IRGC की नौसेना ने दावा किया कि उसने जवाब में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। शनिवार को ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी मेहर ने होर्मोजगान के पूर्वी क्षेत्र में बंदरगाह प्राधिकरण के प्रमुख के हवाले से बताया कि सिरिक बंदरगाह पर अमेरिकी हमलों के बाद किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया

अमेरिका स्थित गैर-लाभकारी संगठन नेशनल ईरानी-अमेरिकन काउंसिल (NIAC) ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हुए हमले और अमेरिकी सैन्य जवाबी कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने कहा कि वह इन घटनाओं से "निराश और चिंतित" है।

NIAC ने अपने बयान में कहा, "अमेरिका और ईरान ने कूटनीतिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। दोनों देशों को अपने मतभेद सुलझाने के लिए बमों का नहीं, बल्कि कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए।"

आम जनता और वैश्विक व्यापार पर असर

होर्मुज़ जलडमरूमध्य विश्व के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है। यदि यह जलमार्ग बाधित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में ऊर्जा की कीमतों पर तत्काल और गंभीर असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में तनाव कोई नई बात नहीं — पिछले कुछ वर्षों में कई बार जहाज़ों पर हमले और नाकेबंदी के प्रयास हो चुके हैं।

आगे की राह

फिलहाल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चैनल सक्रिय बताए जा रहे हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर सैन्य गतिविधियाँ जारी हैं। संयुक्त राष्ट्र की अपील के बाद अब सभी की नज़रें इस बात पर हैं कि क्या दोनों पक्ष तनाव कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाते हैं या यह संकट और गहरा होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पास इसे लागू कराने का कोई व्यावहारिक तंत्र नहीं है। विरोधाभास यह है कि एक तरफ अमेरिका और ईरान कूटनीतिक वार्ता की बात करते हैं, दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाइयाँ थमने का नाम नहीं ले रहीं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि इस जलमार्ग पर निर्भर भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा आयात और शिपिंग लागत पर पड़ने वाले दीर्घकालिक असर की गंभीरता कहीं अधिक है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर संयुक्त राष्ट्र ने क्या अपील की है?
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने 27 जून 2025 को सभी पक्षों से संयम बरतने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को 'सतत रूप से खुला' रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के साथ-साथ नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
'एमवी एवर लवली' पर हमला क्यों हुआ और इसके क्या परिणाम हुए?
25 जून को IRGC ने सिंगापुर के कार्गो पोत 'एमवी एवर लवली' पर ड्रोन हमला किया। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के मिसाइल-ड्रोन ठिकानों और तटीय रडार साइट्स पर हमले किए, जिसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हमले को लेकर क्या कहा?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने सीज़फायर तोड़ा, इसलिए जवाबी सैन्य कार्रवाई की गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की कि निशाने पर मिसाइल-ड्रोन ठिकाने और तटीय रडार साइट्स थे।
NIAC ने इस संकट पर क्या रुख अपनाया है?
नेशनल ईरानी-अमेरिकन काउंसिल (NIAC) ने इन घटनाओं पर 'निराशा और चिंता' जताई और दोनों देशों से कूटनीतिक माध्यमों से मतभेद सुलझाने का आग्रह किया। संगठन ने कहा कि बमों की जगह बातचीत ही एकमात्र स्थायी समाधान है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव से भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुज़रता है, जिस पर भारत भी ऊर्जा आयात के लिए निर्भर है। यदि यह जलमार्ग बाधित होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और शिपिंग लागत में वृद्धि से भारत की आर्थिक स्थिति पर सीधा दबाव पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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