विश्व बैंक ने पाकिस्तान को फटकारा: बलूचिस्तान बाढ़ पीड़ितों का करोड़ों का आवास फंड बुनियादी ढाँचे में लगाया
सारांश
मुख्य बातें
विश्व बैंक ने पाकिस्तान की संघीय और बलूचिस्तान सरकारों को कड़ी चेतावनी दी है कि बाढ़ पीड़ितों के लिए निर्धारित बहु-अरब रुपये के आवास कार्यक्रम से धन हटाकर बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में लगाना गंभीर उल्लंघन है। 11 अगस्त 2026 को सामने आए इस विवाद में बैंक ने स्पष्ट किया कि इस फैसले से 1,19,049 सत्यापित और पात्र परिवार वित्तीय सहायता से वंचित हो गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
विश्व बैंक की कंट्री डायरेक्टर बोलोरमा अमगाबाजार ने संघीय योजना और आर्थिक मामलों के सचिवों तथा बलूचिस्तान के सचिव को एक विस्तृत पत्र भेजा। इस पत्र में बताया गया कि 22 जून 2026 तक आवास सहायता केवल 62,966 प्रथम चरण के लाभार्थियों तक सीमित कर दी गई, जबकि सब्सिडी सहायता 97,000 परिवारों तक। इस कटौती के बाद शेष 1,19,049 सत्यापित परिवारों के लिए वित्तीय सहायता का कोई स्पष्ट स्रोत नहीं बचा।
पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन के अनुसार, बैंक ने यह भी आपत्ति जताई कि यह फैसला बैंक के साथ संयुक्त संचार रणनीति को अंतिम रूप दिए जाने से पहले ही सार्वजनिक कर दिया गया, जिससे सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर चुके परिवारों में गंभीर भ्रम की स्थिति पैदा हुई।
बाढ़ पीड़ितों की आर्थिक स्थिति
बैंक के आँकड़ों के अनुसार, इस कार्यक्रम के पात्र लाभार्थियों में 84 प्रतिशत अत्यंत गरीब और कमज़ोर वर्ग से हैं। इनमें 28 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 30 डॉलर से कम है, जबकि 26 प्रतिशत की आय 31 से 70 डॉलर के बीच है। करीब 39 प्रतिशत परिवार किरायेदार हैं, 37 प्रतिशत दिहाड़ी मज़दूर और 8 प्रतिशत छोटे किसान।
बैंक ने रेखांकित किया कि इन परिवारों के पास बचत बेहद सीमित है, औपचारिक ऋण तक पहुँच कमज़ोर है और आर्थिक संकट में काम आने वाले उत्पादक संसाधन भी नगण्य हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान पहले से ही सामाजिक और बुनियादी ढाँचे की गंभीर कमियों से जूझ रहा है।
शिकायतों का अंबार और पारदर्शिता की माँग
तय कटऑफ तारीख तक आवास सहायता से बाहर किए जाने के संबंध में परियोजना की शिकायत प्रबंधन प्रणाली में 66,120 शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं। विश्व बैंक ने सरकार को निर्देश दिया कि प्रत्येक शिकायतकर्ता को व्यक्तिगत और औपचारिक तरीके से फैसले की जानकारी दी जाए और इसका लिखित प्रमाण बैंक के साथ साझा किया जाए।
गौरतलब है कि बैंक ने इसे केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि कानूनी, प्रशासनिक और प्रतिष्ठा से जुड़े जोखिम के रूप में चिह्नित किया है।
आम जनता पर असर
विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि आवास सहायता से वंचित परिवारों को अस्थायी आश्रयों की मरम्मत के लिए भोजन, स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा जैसी बुनियादी ज़रूरतों से पैसा हटाना पड़ सकता है। कुछ परिवार कर्ज़ लेने या अपनी उत्पादक संपत्तियाँ बेचने को मजबूर हो सकते हैं।
जो परिवार आपदा-रोधी घर बनाने में असमर्थ रहेंगे, वे भविष्य में बाढ़, तूफान, भूकंप और अत्यधिक गर्मी जैसी आपदाओं के प्रति और अधिक संवेदनशील बने रहेंगे। बैंक ने यह भी कहा कि सत्यापित लाभार्थियों को बाहर किए जाने से अन्याय और भेदभाव की भावना पैदा होगी, जो सरकारी संस्थानों पर जनता के भरोसे को और कमज़ोर करेगी।
क्या होगा आगे
विश्व बैंक ने पाकिस्तान सरकार से अपेक्षा की है कि वह प्रभावित परिवारों को औपचारिक सूचना दे और शिकायत निवारण व्यवस्था को पारदर्शी बनाए। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से बड़े पैमाने पर सहायता प्राप्त कर रहा है और उसकी साख दाँव पर लगी है। आने वाले हफ्तों में बैंक और पाकिस्तान सरकार के बीच इस मुद्दे पर औपचारिक वार्ता की संभावना है।