बलूचिस्तान में महिलाओं-बच्चों की जबरन गुमशुदगी: बलूच संगठनों ने उठाई आवाज, मस्तुंग में 6 लापता
सारांश
मुख्य बातें
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के मामले एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय ध्यान के केंद्र में आ गए हैं। बलूच महिला फोरम (BWF) ने 25 जुलाई को आरोप लगाया कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों के लापता होने की घटनाएं एक गंभीर मानवाधिकार संकट का रूप ले चुकी हैं। संगठन के अनुसार, यह संकट अब केवल आँकड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि हर लापता व्यक्ति के पीछे एक परिवार की टूटती ज़िंदगी की कहानी है।
मस्तुंग घटना: एक परिवार के छह सदस्य लापता
BWF का यह बयान 21 जुलाई को बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले के किल्ली कोंगरह इलाके में हुई एक कथित घटना के बाद सामने आया। संगठन के अनुसार, सुरक्षा बलों ने एक घर पर छापा मारकर एक परिवार के छह सदस्यों को अपने साथ ले लिया। लापता लोगों में 33 वर्षीय बीबी राफिया, उनके तीन छोटे बच्चे — जिनकी उम्र क्रमशः 3 महीने, 4 साल और 6 साल बताई गई है — उनके 40 वर्षीय भाई मुहम्मद आरिफ और 18 वर्षीय भतीजी बीबी निदा शामिल हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मानवाधिकार संकट की व्यापक तस्वीर
बलूच महिला फोरम ने कहा कि मस्तुंग की यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगियों की एक लंबी श्रृंखला की अगली कड़ी है। संगठन के अनुसार, स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ता और प्रभावित परिवार लंबे समय से इस मुद्दे को उठाते रहे हैं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया।
संगठन ने आरोप लगाया कि कई पीड़ितों की मौत अपने लापता प्रियजनों का इंतजार करते-करते हो चुकी है। BWF के अनुसार, कुछ मामलों में शव बरामद होते हैं, कुछ लोगों को अज्ञात कब्रों में दफन पाए जाने की खबरें आती हैं, जबकि कई वर्षों तक लापता रहते हैं और उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती।
महिलाओं और बच्चों पर विशेष प्रभाव
BWF ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय कानून महिलाओं और बच्चों को विशेष सुरक्षा का अधिकार देता है। संगठन का कहना है कि किसी माँ का लापता होना केवल एक व्यक्ति के गायब होने तक सीमित नहीं रहता — इससे पूरा परिवार, विशेष रूप से छोटे बच्चे, गंभीर मानसिक, आर्थिक और सामाजिक संकट में पड़ जाते हैं। गौरतलब है कि मस्तुंग मामले में लापता बच्चों में एक महज 3 महीने का शिशु भी शामिल है।
छात्र संगठन की निंदा
इस बीच, बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (BSAC) ने छात्र राजनीतिक कार्यकर्ता जीयंद बलूच, युवक आसिफ बलूच और उनके साथियों की कथित गुमशुदगी की कड़ी निंदा की है। BSAC के अनुसार, इस तरह की घटनाएं बलूच छात्रों के सामने बढ़ते खतरों को उजागर करती हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि लगातार हो रही कथित जबरन गुमशुदगियां भय का माहौल पैदा कर रही हैं और ये लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध हैं।
आगे की राह
BWF ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से आह्वान किया है कि वे हर मंच पर इन कथित अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठाएं। यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति पर वैश्विक निगाहें पहले से ही टिकी हुई हैं। पाकिस्तानी प्रशासन की चुप्पी के बीच, इन संगठनों का दबाव अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को और अधिक उठाए जाने का संकेत देता है।