18 सितंबर 2026
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जिनेवा में बलूचिस्तान पर बड़ा आरोप: बीवाईसी नेताओं को उम्रकैद, परिवारों पर भी दबाव

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जिनेवा में बलूचिस्तान पर बड़ा आरोप: बीवाईसी नेताओं को उम्रकैद, परिवारों पर भी दबाव

सारांश

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के मंच से बलूचिस्तान की तस्वीर दुनिया के सामने रखी गई — जबरन गुमशुदगी, गुप्त अदालती सुनवाई और परिवारों पर लिखित 'अलगाव' का दबाव। बीवाईसी नेता महरंग बलूच को उम्रकैद की सजा और सामूहिक दंड के आरोपों ने इस मुद्दे को वैश्विक एजेंडे पर ला दिया है।

मुख्य बातें

हेग स्थित ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस (जीएचआरडी) ने 18 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र में बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा उठाया।
22 जून 2026 को पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी अदालत ने बीवाईसी नेता महरंग बलूच और सिबगतुल्लाह शाहजी को उम्रकैद की सजा सुनाई — जीएचआरडी के अनुसार बिना ठोस साक्ष्य के गुप्त सुनवाई के बाद।
संगठन ने बीबो बलूच , गुलजादी बलूच सहित अन्य बीवाईसी नेताओं की हिरासत पर यूएन की विशेष प्रक्रियाओं की चिंताओं का भी उल्लेख किया।
परिवारों पर कथित तौर पर लिखित रूप से 'अलगाव' घोषित करने का दबाव डाला जाता है, अन्यथा संपत्ति जब्ती और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई की धमकी दी जाती है।
जीएचआरडी ने यूएन से पाकिस्तान पर दबाव डालने, लापता लोगों का विवरण देने और बंदी कार्यकर्ताओं को रिहा करने की अपील की।

जिनेवा में 18 सितंबर 2026 को आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र में हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय संगठन ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस (जीएचआरडी) ने बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा वैश्विक मंच पर उठाया। संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे कार्यकर्ताओं, छात्रों और लापता लोगों के परिवारों को मनमाने ढंग से हिरासत में ले रहे हैं, जबरन गायब कर रहे हैं और उनके विरुद्ध बदले की कार्रवाई को अंजाम दे रहे हैं।

परिषद में क्या कहा गया

जीएचआरडी ने अपने संबोधन में कहा, "हम परिषद का ध्यान कब्जे वाले बलूचिस्तान में मानवाधिकार संकट की ओर तुरंत दिलाना चाहते हैं, जहाँ बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, छात्रों और लापता लोगों के परिवारों को पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से जबरन गायब किए जाने, मनमानी हिरासत और बदले की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।" संगठन ने स्पष्ट किया कि यह एक व्यापक और योजनाबद्ध पैटर्न है, न कि छिटपुट घटनाएँ।

बीवाईसी नेताओं को उम्रकैद की सजा

जीएचआरडी ने बताया कि 22 जून 2026 को पाकिस्तान की एक आतंकवाद विरोधी अदालत ने बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता महरंग बलूच और सिबगतुल्लाह शाहजी को उम्रकैद की सजा सुनाई। संगठन के अनुसार, यह फैसला जेल के भीतर जल्दबाजी में की गई गुप्त सुनवाई के बाद आया, जिसमें हिंसा से उनका सीधा संबंध साबित करने वाला कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रक्रियाओं ने बीबो बलूच, गुलजादी बलूच और अन्य की हिरासत पर भी चिंता जताई है।

परिवारों पर दबाव और सामूहिक दंड के आरोप

जीएचआरडी के अनुसार, परिवारों पर यह दबाव भी डाला जाता है कि वे ऐसे रिश्तेदारों से खुद को अलग करने का लिखित ऐलान करें, जिन पर उग्रवाद में शामिल होने का आरोप है। संगठन ने कहा, "ऐसा नहीं करने पर उन्हें आतंकवाद विरोधी कार्रवाई और संपत्ति जब्त किए जाने का सामना करना पड़ता है।" संगठन ने इसे सामूहिक दंड की नीति करार देते हुए तर्क दिया कि किसी काम की जिम्मेदारी उस व्यक्ति की होनी चाहिए जिसने वह काम किया, न कि उसके परिजनों की।

बीवाईसी का व्यापक आरोप

पिछले सप्ताह बीवाईसी ने भी पाकिस्तानी अधिकारियों पर बलूचिस्तान में सैन्य मौजूदगी योजनाबद्ध तरीके से बढ़ाने और दमन का अभियान चलाने का आरोप लगाया था। कमेटी का कहना था कि इलाके में हिंसा और जन विस्थापन अब आम नागरिकों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन गए हैं। बीवाईसी ने इसे अलग अलग घटनाओं की कड़ी नहीं, बल्कि लोगों की आजीविका समाप्त करने, उन्हें विस्थापित करने और नागरिकों के विरुद्ध हिंसा की एक सुनियोजित नीति बताया।

संयुक्त राष्ट्र से अपील और आगे की माँगें

जीएचआरडी ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त से अपील की कि वे पाकिस्तान पर दबाव डालें ताकि जबरन गुमशुदगी और सामूहिक दंड जैसी कार्रवाइयाँ तुरंत बंद हों। साथ ही माँग की गई कि सभी लापता लोगों का विवरण दिया जाए, निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित की जाए और शांतिपूर्ण मानवाधिकार गतिविधियों के कारण हिरासत में लिए गए बलूच कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए। यह मामला अब वैश्विक मानवाधिकार एजेंडे पर आ चुका है और आने वाले सत्रों में इस पर और अधिक दबाव बनने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार जीएचआरडी ने जो ब्यौरा दिया — गुप्त अदालती सुनवाई, परिवारों पर लिखित 'अलगाव' का दबाव और बिना सबूत उम्रकैद — वह पाकिस्तान की न्यायिक स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। यूएन मंच पर आवाज़ उठना ज़रूरी है, पर असली परीक्षा यह है कि परिषद इन आरोपों की स्वतंत्र जाँच के लिए पाकिस्तान पर कितना ठोस दबाव बनाती है। पिछले कई सत्रों में इसी तरह की अपीलें की गई हैं जो बयानों से आगे नहीं बढ़ीं। जब तक जवाबदेही का कोई सत्यापन योग्य तंत्र नहीं बनता, ये अपीलें प्रतीकात्मक बनकर रह जाने का जोखिम उठाती हैं।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जिनेवा में बलूचिस्तान का मुद्दा किसने और कैसे उठाया?
हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय संगठन ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस (जीएचआरडी) ने 18 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र को संबोधित करते हुए बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी, मनमाने हिरासत और परिवारों पर बदले की कार्रवाई के आरोप उठाए।
महरंग बलूच को उम्रकैद की सजा क्यों और कैसे दी गई?
जीएचआरडी के अनुसार, 22 जून 2026 को पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी अदालत ने बीवाईसी नेता महरंग बलूच और सिबगतुल्लाह शाहजी को उम्रकैद की सजा सुनाई। संगठन का दावा है कि यह सजा जेल में गुप्त और जल्दबाजी में की गई सुनवाई के बाद आई, जिसमें हिंसा से सीधे संबंध का कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
बलूच परिवारों पर किस तरह का दबाव डाला जाता है, जैसा जीएचआरडी ने बताया?
जीएचआरडी के अनुसार परिवारों पर यह दबाव डाला जाता है कि वे उग्रवाद के आरोपी रिश्तेदारों से खुद को अलग करने की लिखित घोषणा करें। ऐसा न करने पर उन्हें आतंकवाद विरोधी कार्रवाई और संपत्ति जब्ती का सामना करना पड़ता है, जिसे संगठन सामूहिक दंड की नीति बताता है।
बीवाईसी ने बलूचिस्तान की स्थिति के बारे में क्या कहा है?
बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर सैन्य मौजूदगी योजनाबद्ध तरीके से बढ़ाने, लोगों को विस्थापित करने और नागरिकों के खिलाफ हिंसा की सुनियोजित नीति लागू करने का आरोप लगाया है। कमेटी के अनुसार यह छिटपुट घटनाएँ नहीं बल्कि एक समन्वित दमन अभियान है।
संयुक्त राष्ट्र से जीएचआरडी ने क्या माँग की है?
जीएचआरडी ने यूएन मानवाधिकार परिषद और उच्चायुक्त से अपील की है कि वे पाकिस्तान पर दबाव डालें ताकि जबरन गुमशुदगी और सामूहिक दंड तुरंत बंद हो, सभी लापता लोगों का विवरण सार्वजनिक हो, निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो और शांतिपूर्ण गतिविधियों के कारण हिरासत में लिए गए बलूच कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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