बलोच नेताओं ने यूएनएचआरसी में पाकिस्तान के मानवाधिकार उल्लंघनों पर उठाई आवाज

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बलोच नेताओं ने यूएनएचआरसी में पाकिस्तान के मानवाधिकार उल्लंघनों पर उठाई आवाज

सारांश

जिनेवा में बलोच नेशनल मूवमेंट ने पाकिस्तान पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए तात्कालिक कार्रवाई की मांग की है। यह मुद्दा बलूचिस्तान में बढ़ते दमन और जबरन गुमशुदगी के मामलों से जुड़ा है, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

Key Takeaways

  • बलोच नेताओं ने यूएनएचआरसी में पाकिस्तान के मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा उठाया।
  • पाकिस्तान पर जबरन गुमशुदगी और फर्जी मुठभेड़ों के आरोप।
  • बीएनएम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कार्रवाई की अपील की।
  • सीपीईसी से जुड़ी परियोजनाओं का बलूचिस्तान में अत्याचार पर प्रभाव।

जिनेवा, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने वैश्विक समुदाय से बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनों के खिलाफ तात्कालिक कदम उठाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पाकिस्तान की सरकार और सुरक्षा बल असहमति को कुचलने, आम नागरिकों को निशाना बनाने और पूरे क्षेत्र की आवाज को दबाने के लिए कानूनी प्रावधानों का दुरुपयोग कर रहे हैं।

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में बीएनएम के प्रतिनिधियों ने बलूचिस्तान में बढ़ते जबरन गुमशुदगी, फर्जी मुठभेड़ों, और बिना न्यायिक प्रक्रिया के हत्याओं के मामलों की ओर ध्यान आकर्षित किया।

उनका कहना है कि यह सब बलोच समुदाय की आवाज को दबाने की सुनियोजित कोशिश का हिस्सा है। बीएनएम की सदस्य माहरा बलोच ने कहा कि बलूचिस्तान में नागरिकों को केवल इस वजह से सामूहिक सजा दी जा रही है कि वे अपनी पहचान के साथ वहां मौजूद हैं। बलूचिस्तान की पूरी जनसंख्या को उनके अस्तित्व के कारण दंडित किया जा रहा है। पाकिस्तान ने आतंकवाद विरोधी कानून को हथियार बना लिया है।

असहमति रखने वालों को अपराधी के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लोग अपनी जान गंवा रहे हैं और पूरी कौम की आवाज को दबाया जा रहा है।

माहरा बलोच ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान के आतंकवाद निरोधक कानून का दुरुपयोग कर बलोच छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार रक्षकों को संदिग्ध व्यक्तियों की तरह चिह्नित किया जा रहा है। इससे उनकी स्वतंत्रता बाधित होती है, यात्रा का अधिकार प्रभावित होता है और वे निरंतर खतरे में जीने को मजबूर हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में बीएनएम के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ ने बलूचिस्तान में 1,355 जबरन गुमशुदगी और 225 गैर-न्यायिक हत्याओं के मामले दर्ज किए। माहरा ने कहा कि ये केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उन लोगों की कहानियाँ हैं जिन्हें घरों से उठाया गया, छात्रों को जिन्हें कैंपस से अगवा किया गया, और शव जिन्हें डराने के लिए लौटाया गया।

उन्होंने बलोच यकजहती कमेटी (बीवाईसी) के सदस्यों पर हो रहे अत्याचारों का भी जिक्र किया। माहरा ने कहा कि “महरंग बलोच, जिन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया, उन्हें अवैध रूप से गिरफ्तार किया गया, चिकित्सा से वंचित रखा गया और केवल शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने की वजह से निशाना बनाया गया।” उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेट बंद करना, बड़े पैमाने पर निगरानी करना और सामूहिक दंड देना वहां एक सामान्य प्रथा बन गई है, ताकि दुनिया को बलूचिस्तान की वास्तविक स्थिति का पता न चल सके।

माहरा बलोच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की कि पाकिस्तान पर दबाव डाला जाए ताकि वह तुरंत इन मानवाधिकार उल्लंघनों को रोके, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए बलोच कार्यकर्ताओं को रिहा करे और जबरन गुमशुदगी और गैर-न्यायिक हत्याओं की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराए।

इससे पहले बुधवार को इसी सत्र में ‘पांक’ के मीडिया कोऑर्डिनेटर जमाल बलोच ने भी कहा था कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) से जुड़े प्रोजेक्ट्स के बीच अत्याचार और बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा, “मैं इस परिषद के सामने बलूचिस्तान में पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे सुनियोजित मानवाधिकार उल्लंघनों की बात रखने आया हूं, जिन्हें चीन की रणनीतिक और आर्थिक भागीदारी से मजबूती मिल रही है।

बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी एक राज्य नीति में तब्दील हो चुकी है। पाकिस्तान की सेना कानून से ऊपर के रूप में काम करती है और छात्रों, शिक्षकों, पत्रकारों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को उठाने में संलिप्त है।

जमाल बलोच ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध को आतंकवाद के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं द्वारा संचालित नागरिक अधिकार आंदोलनों को कुचला जा रहा है और बलूचिस्तान के कई जिलों में इंटरनेट बंद रखा जाता है, ताकि सैन्य अभियानों और पीड़ितों की आवाज दुनिया तक न पहुंच सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि सीपीईसी से जुड़े प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ दमन बढ़ा है, क्योंकि इन परियोजनाओं की सुरक्षा और संसाधनों पर नियंत्रण के लिए आम नागरिकों के जीवन का सैन्यीकरण किया जा रहा है।

Point of View

जिसमें बलूच नेताओं ने पाकिस्तान के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। यह मुद्दा न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक अवसर है।
NationPress
20/03/2026

Frequently Asked Questions

बलोच नेताओं ने यूएनएचआरसी में क्या मुद्दा उठाया?
बलोच नेताओं ने पाकिस्तान पर मानवाधिकारों के उल्लंघनों का आरोप लगाते हुए तात्कालिक कार्रवाई की मांग की।
पाकिस्तान के खिलाफ क्या आरोप हैं?
पाकिस्तान पर असहमति को दबाने, जबरन गुमशुदगी, और बिना न्यायिक प्रक्रिया के हत्याओं का आरोप लगाया गया है।
बीएनएम का क्या कहना है?
बीएनएम का कहना है कि बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो रहा है और इसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कदम उठाने चाहिए।
माहरा बलोच ने क्या आरोप लगाया?
माहरा बलोच ने कहा कि बलूच लोगों को उनकी पहचान के कारण सामूहिक सजा दी जा रही है।
सीपीईसी का क्या संबंध है?
सीपीईसी से जुड़े प्रोजेक्ट्स के कारण बलूचिस्तान में अत्याचार बढ़ने की बात की गई है।
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