पाकिस्तान: बलूच नेताओं की हिरासत पर मानवाधिकार संगठन की गंभीर चिंता
सारांश
Key Takeaways
- मनमानी हिरासत: बलूच नेताओं की हिरासत पर चिंता जताई गई है।
- जागरूकता अभियान: स्वतंत्र आवाजों को दबाने के खिलाफ बीवाईसी ने अभियान शुरू किया है।
- मानवाधिकार उल्लंघन: बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति चिंताजनक है।
- न्याय की मांग: संगठन ने न्याय और जवाबदेही की मांग की है।
- राजनीतिक स्वतंत्रता: हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई की आवश्यकता।
क्वेटा, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकार की स्थिति को लेकर बलोच एकजुटता समिति (बीवाईसी) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। इस संगठन ने कराची में आयोजित एक सेमिनार में बलूच नेताओं की कथित “मनमानी हिरासत” और क्षेत्र में बिगड़ते हालात को उजागर किया।
बीवाईसी के अनुसार, यह आयोजन एक महीने के जागरूकता अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बलूचिस्तान में स्वतंत्र आवाजों को दबाने, कानूनी ढांचे के दुरुपयोग और लोकतांत्रिक गतिविधियों पर बढ़ती पाबंदियों के खिलाफ आवाज उठाना है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रभावित परिवारों की आवाज को उठाना, समुदाय में जागरूकता फैलाना और न्याय तथा जवाबदेही के लिए सामूहिक प्रयासों को सशक्त बनाना है।
सेमिनार में प्रमुख वक्ताओं ने बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों, शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों पर रोक और लोकतांत्रिक अधिकारों में निरंतर गिरावट की चिंता व्यक्त की। बीवाईसी ने बताया कि इसके प्रमुख आयोजक महरंग बलोच समेत कई नेताओं को एक वर्ष से अधिक समय से हिरासत में रखा गया है।
संगठन ने कहा कि बेबर्ग बलोच, सिबघतुल्लाह शाह जी, गुलजादी बलोच और बेबोव बलोच जैसे नेताओं की लंबी और कथित अवैध हिरासत इस समस्या का एक उदाहरण है।
बीवाईसी ने यह भी उल्लेख किया कि इन नीतियों का सबसे अधिक असर उन परिवारों पर पड़ा है, जिनके सदस्य लापता या हिरासत में हैं, जिससे वे मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।
संगठन ने आरोप लगाया कि नेताओं के खिलाफ आतंकवाद निरोधक अदालतों में “झूठे मामलों” के तहत मुकदमे चलाए जा रहे हैं। हिरासत में बंद नेताओं ने 7 फरवरी को अदालत में जाकर न्यायिक प्रक्रिया पर अविश्वास प्रकट किया और निष्पक्ष सुनवाई की मांग की।
बीवाईसी ने पाकिस्तान की न्यायपालिका, वकील समुदाय और बलूचिस्तान बार काउंसिल से अनुरोध किया है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और कानून के अनुसार निष्पक्ष एवं पारदर्शी न्याय सुनिश्चित करें।
संगठन ने दोहराया कि हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई और राजनीतिक स्वतंत्रता की बहाली उनके मौलिक अधिकार हैं, जिसके लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।