पाकिस्तान के बलूचिस्तान में मानवाधिकार संगठनों ने नेताओं की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान के बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन की घटनाएं बढ़ रही हैं।
- बीवाईसी ने नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध किया है।
- लापता व्यक्तियों के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।
- संगठन ने जनजागरूकता अभियान चलाया है।
- पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा असहमति को दबाने की नीति पर सवाल उठाए गए हैं।
क्वेटा, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकार संगठन बलूच यकजहती कमेटी (बीवाईसी) ने नेताओं की कथित अन्यायपूर्ण गिरफ्तारी और व्यापक दमन पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
इस संगठन ने बलूचिस्तान के सुराब जिले में एक सेमिनार का आयोजन किया, जिसमें प्रांत के लोगों को झेलनी पड़ रही समस्याओं और दमनकारी हालात को उजागर किया गया। यह कार्यक्रम बीवाईसी के एक महीने लंबे जागरूकता अभियान का हिस्सा था।
बीवाईसी का कहना है कि पाकिस्तानी प्रशासन असहमति की आवाजों को दबाने के लिए कानूनी प्रावधानों का दुरुपयोग कर रहा है। सेमिनार में संगठन की प्रमुख आयोजक महरंग बलोच समेत अन्य नेताओं की “अन्यायपूर्ण हिरासत” का मुद्दा उठाया गया।
संगठन ने यह भी कहा कि बलूचिस्तान में कई परिवार आज भी अपने लापता परिजनों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उनके बीच अनिश्चितता और भय का माहौल बना हुआ है।
बीवाईसी ने आरोप लगाया कि उसके नेताओं को एक वर्ष से हिरासत में रखा गया है और उन्हें निष्पक्ष सुनवाई के संवैधानिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है। संगठन का दावा है कि प्रांत में स्वतंत्र राजनीतिक गतिविधियों पर लगभग पूर्ण प्रतिबंध है।
इसी बीच, संगठन ने क्वेटा के किली कंबरानी और सरयाब इलाकों में जनजागरूकता अभियान चलाया, जिसमें पर्चे बांटकर लोगों को नेताओं की गिरफ्तारी के एक वर्ष पूरा होने की जानकारी दी गई। अभियान के दौरान पाकिस्तानी अदालतों के कथित पक्षपातपूर्ण रवैये और बलूच समुदाय पर हो रहे अत्याचारों को भी उजागर किया गया।
संगठन ने बलूचिस्तान के लोगों से अपील की कि वे मौजूदा संकट के दौरान एकजुट, संगठित और दृढ़ रहें तथा अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखें।
गौरतलब है कि बलूचिस्तान में लंबे समय से जबरन गायब किए जाने और कथित मुठभेड़ों में हत्याओं जैसे मामलों को लेकर सुरक्षा बलों पर आरोप लगते रहे हैं।