18 सितंबर 2026
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बिहार बाढ़: '56 लाख प्रभावित, ₹5,000 करोड़ कहाँ गए?' — पप्पू यादव ने केंद्र-राज्य सरकार को घेरा

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बिहार बाढ़: '56 लाख प्रभावित, ₹5,000 करोड़ कहाँ गए?' — पप्पू यादव ने केंद्र-राज्य सरकार को घेरा

सारांश

56 लाख प्रभावित, 8-9 दिन भूखे गरीब, और ₹5,000 करोड़ की घोषणा जो जनता तक नहीं पहुँची — पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने बिहार बाढ़ पर केंद्र और राज्य सरकार को एक साथ घेरा, और तंज कसा कि नेपाल याद आता है, बिहार को लात मारी जा रही है।

मुख्य बातें

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने 18 सितंबर 2026 को बिहार बाढ़ पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा।
राज्य में 56 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित; कथित तौर पर 8-9 दिनों तक गरीब पानी पीकर जीवित रहे।
यादव ने पूछा कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित ₹5,000 करोड़ जनता तक क्यों नहीं पहुँचे।
₹2,000 करोड़ की तत्काल राहत घोषणा और प्रभावितों का कर्ज माफी की माँग।
भागलपुर, बरारी, लखीसराय, बक्सर, निर्मली, सोनपुर में 18 दिन बाद भी जलस्तर बरकरार।
BJP के 'आशीर्वाद का दीया' कार्यक्रम पर भी यादव ने आपत्ति जताई, इसे 'गलत संदेश' करार दिया।

पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने 18 सितंबर 2026 को बिहार बाढ़ पर केंद्र और राज्य सरकार को कड़े शब्दों में घेरा, यह कहते हुए कि राज्य में 56 लाख लोग प्रभावित हैं और 8-9 दिनों तक गरीब पानी पीकर जीवित रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों के वक्त दिखने वाले 100 हेलिकॉप्टर बाढ़ राहत के समय एक भी नज़र नहीं आए, और प्रधानमंत्री द्वारा पहले घोषित ₹5,000 करोड़ अभी तक जनता तक नहीं पहुँचे।

मुख्य आरोप: राहत में लापरवाही

पप्पू यादव ने कहा कि बिहार की बाढ़ से जूझती जनता को तत्काल ₹2,000 करोड़ की घोषणा की जानी चाहिए और प्रभावितों का कर्ज माफ किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि बाढ़ स्थिति का जायजा लेने गई केंद्रीय टीम ने सूखे इलाकों में ट्रैक्टर क्यों चलाया। उनके शब्दों में, 'आज यह एआई और ड्रोन का ज़माना है — बिना सही जानकारी के सूखे इलाकों में ट्रैक्टर कौन चलाने गया?'

उन्होंने यह भी कहा कि 18 दिन बाद भी अहमदाबाद, बरारी और भागलपुर में पानी का स्तर जस का तस बना हुआ है, सिवाय कुछ इलाकों के। उनका इशारा था कि मुख्यमंत्री का दौरा महज फोटो-खिंचवाई तक सीमित रहा।

नेपाल बनाम बिहार — राजनीतिक तीखापन

सांसद यादव ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा नेतृत्व को नेपाल याद आ रहा है, जबकि बिहार को लात मारी जा रही है। उन्होंने लखीसराय, भागलपुर, बक्सर, निर्मली और सोनपुर जैसे जिलों का उल्लेख करते हुए पूछा कि क्या नेताओं ने इन स्थानों का वास्तविक दौरा किया। यह बयान नेपाल से जुड़ी केंद्र की कूटनीतिक सक्रियता के संदर्भ में आया, जिसे विपक्ष पड़ोसी देश को प्राथमिकता देने का संकेत बता रहा है।

'आशीर्वाद का दीया' पर भी निशाना

पप्पू यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा आयोजित 'आशीर्वाद का दीया' कार्यक्रम पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकारी उत्सव की यह परंपरा पहली घटना है, जिससे लोगों में आक्रोश है और उन्होंने इसकी आलोचना की है। उनके अनुसार, इस अवसर पर रोजगार मेला लगवाना या किसानों के लिए महंगाई कम करना बेहतर संदेश देता।

पृष्ठभूमि: बिहार बाढ़ का दायरा

बिहार में हर वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है, जिसमें नेपाल से आने वाली नदियाँ — विशेषकर कोसी, गंडक और बागमती — प्रमुख भूमिका निभाती हैं। इस वर्ष की स्थिति कथित तौर पर विशेष रूप से गंभीर रही है, जिसमें 56 लाख लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि केंद्र-राज्य राहत समन्वय पर विपक्ष का आरोप नया नहीं है — पिछले कई वर्षों से बाढ़ राहत के वितरण और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

आगे क्या

बाढ़ प्रभावित ज़िलों में राहत कार्यों की गति और घोषित ₹5,000 करोड़ के वास्तविक वितरण पर विपक्ष की नज़र बनी रहेगी। पप्पू यादव ने स्पष्ट किया कि जब तक प्रभावित परिवारों को ठोस मदद नहीं मिलती, वे सरकार पर दबाव बनाते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की घोषणा और उसका ज़मीनी वितरण — यही वह परीक्षा है जिस पर न सिर्फ केंद्र, बल्कि बिहार सरकार भी खरी उतरती नहीं दिखती। बाढ़ राहत में ड्रोन-एआई तकनीक का उल्लेख सांकेतिक है — यह दर्शाता है कि आपदा प्रबंधन अब सिर्फ संसाधन का नहीं, इच्छाशक्ति और तकनीकी तैयारी का भी सवाल है। जब तक राहत वितरण का स्वतंत्र सत्यापन नहीं होगा, ऐसे बयान हर बाढ़ सीज़न में दोहराए जाते रहेंगे।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पप्पू यादव ने बिहार बाढ़ पर क्या माँग की है?
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए तत्काल ₹2,000 करोड़ की राहत घोषणा और कर्ज माफी की माँग की है। उन्होंने यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री द्वारा पहले घोषित ₹5,000 करोड़ अब तक जनता तक क्यों नहीं पहुँचे।
बिहार बाढ़ 2026 में कितने लोग प्रभावित हैं?
पप्पू यादव के अनुसार बिहार में 56 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि कई गरीब परिवार 8-9 दिनों तक भोजन के बिना केवल पानी पीकर जीवित रहे।
'नेपाल याद आता है, बिहार को लात' — यादव का यह बयान किस संदर्भ में है?
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का ध्यान नेपाल से जुड़े कूटनीतिक मामलों पर अधिक है जबकि बाढ़ में डूबे बिहार की उपेक्षा की जा रही है। यह बयान विपक्ष की उस व्यापक आलोचना का हिस्सा है जिसमें NDA सरकार पर बिहार को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप है।
केंद्रीय बाढ़ जायजा टीम पर यादव ने क्या सवाल उठाए?
यादव ने कहा कि बाढ़ का जायजा लेने गई केंद्रीय टीम सूखे इलाकों में ट्रैक्टर चलाती रही, जो सही सूचना के अभाव को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रैक्टर को केसरिया रंग में रंगना महज प्रचार था, न कि असली राहत।
BJP के 'आशीर्वाद का दीया' कार्यक्रम पर यादव की क्या आपत्ति है?
पप्पू यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर सरकारी उत्सव मनाने की यह परंपरा पहली घटना है और इससे गलत संदेश गया है। उनका सुझाव था कि इस अवसर पर रोजगार मेला या किसान सम्मेलन आयोजित करना और महंगाई कम करना बेहतर होता।
राष्ट्र प्रेस
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