पप्पू यादव का केंद्र-राज्य सरकार पर हमला: बिहार में 56 लाख बाढ़ पीड़ित, नेता गायब
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने 14 सितंबर 2026 को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में बिहार की बाढ़ स्थिति को लेकर केंद्र की एनडीए सरकार और राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 56 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं, फिर भी प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मुख्यमंत्री सहित शीर्ष नेता प्रभावित क्षेत्रों से नदारद हैं।
बाढ़ का विस्तार और मानवीय संकट
पप्पू यादव के अनुसार, बिहार के 19 से 22 जिले इस समय बाढ़ की गिरफ्त में हैं और करीब 1.46 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है। उनका कहना था कि प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को भोजन, पीने के पानी, दवाइयों, प्लास्टिक शीट और पशु चारे तक की गंभीर किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
सांसद ने दावा किया कि कई गाँवों में लोग कई दिनों से दूषित पानी पीने को विवश हैं। मनिहारी, रूपौली, नौगछिया और बिहपुर समेत दर्जनों इलाकों में बड़ी संख्या में हैंडपंप बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सांप के काटने और करंट लगने से मौतें हो रही हैं।
सरकार पर सीधे सवाल
पप्पू यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 'बाढ़-मुक्त बिहार' के पुराने वादे का हवाला देते हुए पूछा कि वर्षों बाद भी स्थायी समाधान क्यों नहीं निकला। उन्होंने तंज कसा, 'चुनाव के समय बिहार में नेताओं के लिए सैकड़ों हेलीकॉप्टर दिखते हैं, लेकिन जब 56 लाख लोग बाढ़ से त्रस्त हैं तो जनप्रतिनिधि प्रभावित क्षेत्रों में नज़र नहीं आ रहे।'
उन्होंने 2008 की सीमांचल बाढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचे थे और बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया गया था। उन्होंने मौजूदा सरकार से भी इसी तरह की प्रतिक्रिया की माँग की।
भ्रष्टाचार के आरोप और जाँच की माँग
पप्पू यादव ने बाढ़ की समस्या को 'मैन-मेड और नेता-मेड डिजास्टर' करार देते हुए कहा कि फ्लड फाइटिंग और एंटी-इरोशन कार्यों के नाम पर वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च होते रहे, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला। उन्होंने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए इन कार्यों में कथित अनियमितताओं की जाँच की माँग की।
सांसद ने आरोप लगाया कि राहत शिविरों में भी गड़बड़ी हो रही है और छोटे स्तर के राहत कार्यों के बिलों में वास्तविक खर्च से अधिक राशि दिखाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने 1990 के बाद से हुए फ्लड फाइटिंग और एंटी-इरोशन कार्यों की ईडी और सीबीआई से जाँच कराने की माँग की।
मुख्यमंत्री के दौरे पर सवाल
पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे को भी अपर्याप्त बताया। उनका आरोप था कि मुख्यमंत्री कुछ स्थानों पर थोड़े समय रुककर लौट गए और प्रभावित परिवारों से पर्याप्त संवाद नहीं किया। उन्होंने कहा, 'बाढ़ पीड़ितों को केवल निरीक्षण और फोटो सेशन नहीं, तत्काल राहत और स्थायी समाधान चाहिए।'
आगे की राह और पप्पू यादव की पेशकश
सांसद ने कैग रिपोर्ट के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने की घोषणा भी की। उन्होंने मुख्यमंत्री से एक महीने के लिए आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेने की पेशकश करते हुए कहा कि वह बाढ़ पीड़ित परिवारों तक आर्थिक सहायता, किसानों को राहत, और मकान व पशुधन के नुकसान का मुआवजा पहुँचाने का प्रयास करेंगे। नदियों की गाद, तटबंधों और बैराजों की स्थिति पर दीर्घकालिक योजना बनाने की माँग भी उन्होंने रखी।