14 सितंबर 2026
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पप्पू यादव का केंद्र-राज्य सरकार पर हमला: बिहार में 56 लाख बाढ़ पीड़ित, नेता गायब

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पप्पू यादव का केंद्र-राज्य सरकार पर हमला: बिहार में 56 लाख बाढ़ पीड़ित, नेता गायब

सारांश

56 लाख पीड़ित, 22 जिले डूबे — और नेता गायब। पप्पू यादव ने पटना प्रेस वार्ता में बिहार की बाढ़ को 'मैन-मेड डिजास्टर' करार देते हुए केंद्र और राज्य सरकार दोनों को कठघरे में खड़ा किया। कैग रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट जाने और ईडी-सीबीआई जाँच की माँग से मामला गर्मा गया है।

मुख्य बातें

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 14 सितंबर 2026 को पटना में प्रेस वार्ता कर केंद्र व राज्य सरकार पर बाढ़ में अनदेखी का आरोप लगाया।
बिहार के 19 से 22 जिले बाढ़ से प्रभावित; करीब 1.46 लाख हेक्टेयर भूमि जलमग्न; 56 लाख से अधिक लोग प्रभावित।
सांसद ने बाढ़ को 'मैन-मेड और नेता-मेड डिजास्टर' बताया और कैग रिपोर्ट के आधार पर ईडी-सीबीआई जाँच की माँग की।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के दौरे को अपर्याप्त बताया; कहा — पीड़ितों को फोटो सेशन नहीं, राहत चाहिए।
पप्पू यादव ने सर्वोच्च न्यायालय जाने और मुख्यमंत्री से एक महीने के लिए आपदा प्रबंधन सौंपने की पेशकश की।

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने 14 सितंबर 2026 को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में बिहार की बाढ़ स्थिति को लेकर केंद्र की एनडीए सरकार और राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 56 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं, फिर भी प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मुख्यमंत्री सहित शीर्ष नेता प्रभावित क्षेत्रों से नदारद हैं।

बाढ़ का विस्तार और मानवीय संकट

पप्पू यादव के अनुसार, बिहार के 19 से 22 जिले इस समय बाढ़ की गिरफ्त में हैं और करीब 1.46 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है। उनका कहना था कि प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को भोजन, पीने के पानी, दवाइयों, प्लास्टिक शीट और पशु चारे तक की गंभीर किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

सांसद ने दावा किया कि कई गाँवों में लोग कई दिनों से दूषित पानी पीने को विवश हैं। मनिहारी, रूपौली, नौगछिया और बिहपुर समेत दर्जनों इलाकों में बड़ी संख्या में हैंडपंप बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सांप के काटने और करंट लगने से मौतें हो रही हैं।

सरकार पर सीधे सवाल

पप्पू यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 'बाढ़-मुक्त बिहार' के पुराने वादे का हवाला देते हुए पूछा कि वर्षों बाद भी स्थायी समाधान क्यों नहीं निकला। उन्होंने तंज कसा, 'चुनाव के समय बिहार में नेताओं के लिए सैकड़ों हेलीकॉप्टर दिखते हैं, लेकिन जब 56 लाख लोग बाढ़ से त्रस्त हैं तो जनप्रतिनिधि प्रभावित क्षेत्रों में नज़र नहीं आ रहे।'

उन्होंने 2008 की सीमांचल बाढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचे थे और बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया गया था। उन्होंने मौजूदा सरकार से भी इसी तरह की प्रतिक्रिया की माँग की।

भ्रष्टाचार के आरोप और जाँच की माँग

पप्पू यादव ने बाढ़ की समस्या को 'मैन-मेड और नेता-मेड डिजास्टर' करार देते हुए कहा कि फ्लड फाइटिंग और एंटी-इरोशन कार्यों के नाम पर वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च होते रहे, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला। उन्होंने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए इन कार्यों में कथित अनियमितताओं की जाँच की माँग की।

सांसद ने आरोप लगाया कि राहत शिविरों में भी गड़बड़ी हो रही है और छोटे स्तर के राहत कार्यों के बिलों में वास्तविक खर्च से अधिक राशि दिखाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने 1990 के बाद से हुए फ्लड फाइटिंग और एंटी-इरोशन कार्यों की ईडी और सीबीआई से जाँच कराने की माँग की।

मुख्यमंत्री के दौरे पर सवाल

पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे को भी अपर्याप्त बताया। उनका आरोप था कि मुख्यमंत्री कुछ स्थानों पर थोड़े समय रुककर लौट गए और प्रभावित परिवारों से पर्याप्त संवाद नहीं किया। उन्होंने कहा, 'बाढ़ पीड़ितों को केवल निरीक्षण और फोटो सेशन नहीं, तत्काल राहत और स्थायी समाधान चाहिए।'

आगे की राह और पप्पू यादव की पेशकश

सांसद ने कैग रिपोर्ट के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने की घोषणा भी की। उन्होंने मुख्यमंत्री से एक महीने के लिए आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेने की पेशकश करते हुए कहा कि वह बाढ़ पीड़ित परिवारों तक आर्थिक सहायता, किसानों को राहत, और मकान व पशुधन के नुकसान का मुआवजा पहुँचाने का प्रयास करेंगे। नदियों की गाद, तटबंधों और बैराजों की स्थिति पर दीर्घकालिक योजना बनाने की माँग भी उन्होंने रखी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी 22 जिले डूबे हैं। असली सवाल यह है कि फ्लड फाइटिंग के नाम पर वर्षों से खर्च हो रहे करोड़ों रुपयों का हिसाब क्यों नहीं माँगा गया — कैग ने अनियमितताएँ रेखांकित कीं, पर जवाबदेही शून्य रही। जब तक नदी गाद, तटबंध और जल निकासी पर दीर्घकालिक नीति नहीं बनती, बिहार की बाढ़ राहत महज एक मौसमी कर्मकांड बनी रहेगी।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पप्पू यादव ने बिहार बाढ़ पर क्या आरोप लगाए?
पप्पू यादव ने 14 सितंबर 2026 को पटना में आरोप लगाया कि 56 लाख बाढ़ पीड़ितों के बावजूद केंद्र और राज्य सरकार के शीर्ष नेता प्रभावित क्षेत्रों से अनुपस्थित हैं। उन्होंने बाढ़ को 'मैन-मेड और नेता-मेड डिजास्टर' करार दिया और राहत कार्यों में कथित भ्रष्टाचार की जाँच की माँग की।
बिहार बाढ़ 2026 में कितने जिले और लोग प्रभावित हैं?
पप्पू यादव के अनुसार बिहार के 19 से 22 जिले बाढ़ की चपेट में हैं, करीब 1.46 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न है और लगभग 56 लाख लोग प्रभावित हैं। कई इलाकों में भोजन, पानी, दवा और पशु चारे की गंभीर कमी बताई जा रही है।
पप्पू यादव ने कैग रिपोर्ट का जिक्र क्यों किया?
सांसद ने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए फ्लड फाइटिंग और एंटी-इरोशन कार्यों में 1990 के बाद से कथित अनियमितताओं की ईडी और सीबीआई से जाँच कराने की माँग की। उनका कहना था कि इन कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर क्या सवाल उठाए?
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुछ समय रुककर वापस लौट गए और पीड़ित परिवारों से पर्याप्त संवाद नहीं किया। सांसद ने कहा कि जनता को निरीक्षण और फोटो सेशन नहीं, तत्काल राहत और स्थायी समाधान चाहिए।
पप्पू यादव ने बाढ़ राहत के लिए क्या माँगें और पेशकश रखी?
सांसद ने कैग रिपोर्ट के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय जाने की घोषणा की। साथ ही मुख्यमंत्री से एक महीने के लिए आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेने की पेशकश करते हुए कहा कि वह पीड़ितों तक आर्थिक सहायता, किसान राहत और मुआवजा पहुँचाने का प्रयास करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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