बिहार बाढ़: 45 लाख प्रभावित, 50+ मौतें — तेजस्वी यादव का केंद्र पर भेदभाव का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 14 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार पर बिहार के साथ भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया, यह कहते हुए कि राज्य में बाढ़ से 50 से अधिक लोगों की मौत और 45 लाख लोगों के प्रभावित होने के बावजूद केंद्र की ओर से न कोई ठोस सहायता मिली है, न प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के मुँह से एक शब्द। उन्होंने गुजरात में मामूली बारिश पर केंद्र की तत्परता से इसकी तुलना करते हुए दोहरे मानदंड का आरोप लगाया।
तेजस्वी का सीधा आरोप
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में दावा किया कि 23 जुलाई 2026 को गुजरात में बारिश के कारण एक व्यक्ति की मौत होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के मुख्यमंत्री से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए बात की और वायुसेना तथा NDRF को अलर्ट मोड पर रखा गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ वर्ष पूर्व गुजरात में बाढ़ आने पर प्रधानमंत्री ने हवाई सर्वेक्षण किया था और तत्काल ₹500 करोड़ का पैकेज दिया गया था, प्रभावित परिवारों को ₹2 लाख की व्यक्तिगत सहायता मिली थी, और सेना, वायुसेना व NDRF की टीमें तैनात की गई थीं।
तेजस्वी ने कहा, 'गुजरात के किसी नाले में भी बारिश का पानी बढ़ जाता है तो प्रधानमंत्री वहाँ पहुँच जाते हैं और उसे आपदा घोषित कर हजारों करोड़ रुपये का पैकेज दे दिया जाता है।' उनका यह भी आरोप है कि बिहार में बारिश से होने वाली मौत पर केंद्र से कोई मुआवज़ा नहीं मिलता, जबकि गुजरात में ऐसी मौत पर ₹2 लाख की सहायता दी जाती है।
बिहार में बाढ़ की भयावह स्थिति
तेजस्वी यादव के अनुसार, बिहार में इस वर्ष की बाढ़ में 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, हजारों मवेशी लापता हैं और हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि करीब 45 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इसके बावजूद, उनके अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से न तो कोई पैकेज घोषित हुआ है और न ही प्रधानमंत्री या गृह मंत्री ने बिहार के लिए कोई सार्वजनिक बयान दिया है।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार हर वर्ष मानसून में भारी बाढ़ का सामना करता है — राज्य की भौगोलिक स्थिति, नेपाल से निकलने वाली नदियों के कारण, इसे बाढ़-प्रवण बनाती है। गौरतलब है कि यह राज्य की उन समस्याओं में से एक है जिसे दशकों से दोनों दलों की सरकारें हल नहीं कर पाई हैं।
ठनका और राष्ट्रीय आपदा सूची का मुद्दा
तेजस्वी ने बाढ़ के अलावा ठनका गिरने (वज्रपात) से होने वाली मौतों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि बिहार में हर वर्ष वज्रपात से बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है, लेकिन इसे अब तक राष्ट्रीय आपदा की सूची में शामिल नहीं किया गया है, जिससे केंद्र से मुआवज़ा पाने का अधिकार राज्य को नहीं मिलता।
सांसदों और मंत्रियों की चुप्पी पर सवाल
राजद नेता ने बिहार के 30 सांसदों और 8 केंद्रीय मंत्रियों की चुप्पी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में केंद्र में प्रतिनिधित्व होने के बावजूद कोई भी बिहार के अधिकारों के लिए आवाज़ नहीं उठा रहा। उन्होंने अतीत की तुलना करते हुए कहा कि पहले लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आपदा के समय बिहार के हक के लिए एकजुट होकर केंद्र से लड़ते थे।
तेजस्वी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह विपक्ष में होने के बावजूद पहले दिन से केंद्र पर दबाव बना रहे हैं और प्रधानमंत्री को पत्र भी लिख चुके हैं। उन्होंने कहा, 'यदि केंद्र से पैकेज मिलता है तो वह बिहार सरकार को ही मिलेगा — इसमें मेरा कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं है।'
आगे क्या
तेजस्वी यादव ने जनता से अपील की है कि वे राजनीति से अलग होकर यह सवाल पूछें कि बिहार के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बाढ़ राहत और केंद्रीय सहायता पर यह राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।