14 सितंबर 2026
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ब्रिक्स मेन्यू विवाद: विश्वास सारंग का राहुल गांधी पर पलटवार — 'भारतीय संस्कृति को दुनिया ने माना, आपको क्यों नहीं?'

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ब्रिक्स मेन्यू विवाद: विश्वास सारंग का राहुल गांधी पर पलटवार — 'भारतीय संस्कृति को दुनिया ने माना, आपको क्यों नहीं?'

सारांश

ब्रिक्स डिनर मेन्यू पर राहुल गांधी की टिप्पणी ने सियासी तूफान खड़ा किया। मध्य प्रदेश मंत्री विश्वास सारंग और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने एक साथ पलटवार किया — तर्क दिया कि भारतीय संस्कृति और व्यंजन वैश्विक मंच पर सम्मान पा रहे हैं और विपक्ष का नज़रिया 'राजनीतिक चश्मे' से रँगा है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश मंत्री विश्वास सारंग ने 14 सितंबर 2026 को भोपाल में राहुल गांधी की ब्रिक्स मेन्यू टिप्पणी को 'आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण' बताया।
सारंग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर दलीय राजनीति से ऊपर उठकर बात करनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि जी20 में भी विदेशी मेहमानों को भारतीय व्यंजन परोसे गए थे — यह देश की परंपरा है।
सारंग ने अबू धाबी में मंदिर-निर्माण और योग की वैश्विक स्वीकृति को भारतीय संस्कृति की बढ़ती साख का प्रमाण बताया।
विवाद की जड़ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में परोसे गए शाकाहारी डिनर मेन्यू पर राहुल गांधी की आलोचनात्मक टिप्पणी है।

मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने 14 सितंबर 2026 को भोपाल में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर कड़ा पलटवार किया। सारंग ने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के डिनर मेन्यू को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी 'आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण' है, क्योंकि भारतीय संस्कृति और खानपान को आज वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल रही है।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, 'मुझे हैरानी होती है कि राहुल गांधी कब परिपक्व होंगे। वह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में विपक्ष के नेता हैं। जब कोई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम हो, तो दलीय राजनीति से ऊपर उठकर बात करनी चाहिए।' उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को ब्रिक्स में भारत की भूमिका और वहाँ हुई महत्वपूर्ण चर्चाओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए था, न कि भोजन की थाली पर।

सारंग ने यह भी जोड़ा कि उन्हें समझ नहीं आता कि राहुल गांधी को ऐसी सलाह कौन दे रहा है और वे राजनीतिक परिपक्वता कब हासिल करेंगे।

भारतीय संस्कृति की वैश्विक स्वीकार्यता का तर्क

सारंग ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को पूरी दुनिया में स्वीकार्यता मिली है। उन्होंने योग का उदाहरण देते हुए कहा कि मोदी की पहल के बाद योग को वैश्विक स्तर पर व्यापक मान्यता मिली है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शाकाहारी भारतीय भोजन परोसे जाने और विदेशी मेहमानों की सकारात्मक प्रतिक्रिया का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय खानपान और संस्कृति आज दुनिया में सम्मान पा रही है।

उन्होंने अबू धाबी में मंदिर-निर्माण का उदाहरण भी दिया और कहा कि ये सकारात्मक बदलाव राहुल गांधी को स्वीकार नहीं हो रहे, क्योंकि उनकी आँखों पर 'राजनीतिक चश्मा' लगा हुआ है।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी राहुल गांधी की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जी20 सम्मेलन के दौरान भी विदेशी मेहमानों के सामने भारतीय व्यंजन परोसे गए थे। उनका तर्क था कि जब घर पर मेहमान आते हैं, तो उन्हें अपनी परंपरा और क्षेत्र के व्यंजन ही परोसे जाते हैं — यही परंपरा ब्रिक्स में भी निभाई गई।

गिरिराज सिंह ने तीखे शब्दों में कहा, 'अगर राहुल गांधी का दिमाग खराब है, तो क्या इसका मतलब यह है कि पूरे देश का दिमाग खराब हो जाना चाहिए?' उन्होंने जोड़ा कि ब्रिक्स में भारतीय संस्कृति और भारतीय व्यंजन प्रस्तुत करना देश की परंपरा के अनुरूप है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में परोसे गए शाकाहारी डिनर मेन्यू पर राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद भड़का। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक मंचों पर अपनी सांस्कृतिक पहचान को प्रमुखता से प्रस्तुत करने की नीति अपना रहा है। गौरतलब है कि ब्रिक्स के सदस्य देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं और इस मंच पर भारत की स्थिति लगातार मज़बूत होती जा रही है।

आगे क्या

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच यह ज़ुबानी जंग आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ब्रिक्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों को लेकर सत्ता-विपक्ष की यह बहस घरेलू राजनीति के लिए एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह उस बड़ी लड़ाई का हिस्सा है जो सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद' की ज़मीन पर लड़ी जा रही है। सवाल यह भी है कि क्या ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय कूटनीतिक मंच को घरेलू राजनीति के अखाड़े में खींचना किसी के हित में है — सत्ता पक्ष के या विपक्ष के? राहुल गांधी की टिप्पणी की विषय-वस्तु सार्वजनिक रूप से पूरी तरह सामने नहीं आई है, फिर भी सरकार ने उसे त्वरित और कड़े जवाब का मौका माना। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है: ब्रिक्स में भारत की वास्तविक कूटनीतिक उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ इस मेन्यू-विवाद की आँच में ओझल हो गई हैं।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स मेन्यू विवाद क्या है?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में विदेशी मेहमानों को परोसे गए शाकाहारी भारतीय डिनर मेन्यू पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने टिप्पणी की, जिसे सत्ता पक्ष ने आपत्तिजनक और राजनीति से प्रेरित बताया। इसके बाद मध्य प्रदेश मंत्री विश्वास सारंग और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पलटवार किया।
विश्वास सारंग ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
विश्वास सारंग ने कहा कि राहुल गांधी में 'राजनीतिक परिपक्वता' की कमी है और वे भारतीय संस्कृति की वैश्विक स्वीकार्यता को स्वीकार नहीं कर पा रहे। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर दलीय राजनीति से ऊपर उठकर देश की बात करनी चाहिए।
गिरिराज सिंह ने ब्रिक्स भोजन मामले पर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि जी20 सम्मेलन में भी विदेशी मेहमानों को भारतीय व्यंजन परोसे गए थे और यह भारतीय परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने राहुल गांधी की टिप्पणी को सिरे से खारिज किया।
क्या भारतीय भोजन परोसना कूटनीतिक दृष्टि से उचित है?
सरकार का पक्ष है कि मेज़बान देश अपनी सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार भोजन परोसता है, जैसा भारत में अतिथि-देवो-भव की परंपरा है। विपक्ष इस पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है, हालाँकि उसकी पूरी आपत्ति सार्वजनिक रूप से विस्तार से सामने नहीं आई है।
यह विवाद ब्रिक्स और भारत की कूटनीति के संदर्भ में क्यों मायने रखता है?
ब्रिक्स देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका रखते हैं और इस मंच पर भारत की स्थिति लगातार मज़बूत हो रही है। मेन्यू को लेकर उठा यह विवाद घरेलू राजनीति में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और विपक्षी आलोचना के बड़े टकराव का हिस्सा बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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