13 सितंबर 2026
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राहुल गांधी के '80% भारतीय मांसाहारी' बयान पर अयोध्या के संतों का कड़ा विरोध, मदरसा कार्रवाई का भी किया समर्थन

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राहुल गांधी के '80% भारतीय मांसाहारी' बयान पर अयोध्या के संतों का कड़ा विरोध, मदरसा कार्रवाई का भी किया समर्थन

सारांश

राहुल गांधी का ब्रिक्स डिनर पर '80% भारतीय मांसाहारी हैं' वाला बयान अयोध्या तक पहुँचा — और संतों ने माफी की माँग कर दी। साथ ही पश्चिम बंगाल में मदरसों पर हुई कार्रवाई को भी उनका समर्थन मिला।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने ब्रिक्स सम्मेलन के गाला डिनर में शाकाहारी भोजन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि '80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं' ।
महंत सीताराम दास ने बयान को 'निंदनीय' बताया और गांधी से स्पष्टीकरण माँगा।
महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने बयान को 'तथ्यात्मक रूप से गलत' बताते हुए राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की माँग की।
दोनों संतों ने पश्चिम बंगाल में मदरसों पर हुई कार्रवाई का समर्थन किया।
संतों ने आधुनिक और सद्भावपूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता देने की माँग की।

अयोध्या के प्रमुख संतों ने 13 सितंबर 2026 को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के उस बयान की कड़ी निंदा की, जिसमें उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन के गाला डिनर में शाकाहारी भोजन परोसे जाने पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि '80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं'। संतों ने इस बयान को तथ्यात्मक रूप से गलत और भारतीय सांस्कृतिक भावनाओं के विरुद्ध बताया।

संतों की तीखी प्रतिक्रिया

महंत सीताराम दास ने राहुल गांधी के बयान को 'निंदनीय' करार देते हुए कहा कि उन्हें पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह स्वयं शाकाहारी हैं या मांसाहारी। महंत ने आरोप लगाया कि गांधी भारतीयों के बारे में गलत धारणा प्रस्तुत कर रहे हैं और उनकी यह टिप्पणी देश की सांस्कृतिक भावनाओं के अनुरूप नहीं है।

महंत ने कहा, 'राहुल गांधी भारतीय परंपराओं और संस्कृति को सही ढंग से नहीं समझ पाए हैं और उनके इस बयान से भारतीयों का अपमान होता है।'

विष्णु दास महाराज ने मांगी माफी

महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने भी इस बयान का विरोध करते हुए कहा कि पूरे देश को मांसाहारी बताना 'तथ्यात्मक रूप से गलत' है। उन्होंने कहा कि विभिन्न समुदायों के लोग अपनी पसंद के अनुसार भोजन करते हैं और यह सर्वथा व्यक्तिगत विषय है। महामंडलेश्वर ने मांग की कि राहुल गांधी इस बयान के लिए देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

पश्चिम बंगाल में मदरसा कार्रवाई पर संतों का रुख

इसी अवसर पर दोनों संतों ने पश्चिम बंगाल में मदरसों के विरुद्ध हुई हालिया कार्रवाई पर भी अपना पक्ष रखा। महंत सीताराम दास ने कहा कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा देकर डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मदरसों में नफरत फैलाने वाली शिक्षा दी जाती है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने कहा कि जिन संस्थानों में पर्याप्त सुविधाएँ नहीं थीं और जिनकी गतिविधियों को लेकर सवाल उठ रहे थे, उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई उचित है। उनका दावा है कि कुछ मदरसों में दी जाने वाली शिक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ थीं और इस विषय पर व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए।

शिक्षा पर संतों का साझा संदेश

दोनों संतों ने एकमत होकर कहा कि शिक्षा का उद्देश्य समाज में सद्भाव, विकास और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने किसी भी प्रकार की कट्टरता या वैमनस्य को बढ़ावा देने वाली शिक्षा-व्यवस्था का विरोध किया।

यह ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है और मदरसा शिक्षा का मुद्दा राष्ट्रीय विमर्श में एक बार फिर केंद्र में आ गया है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो स्वाभाविक रूप से घरेलू राजनीतिक बहस में तब्दील हो गया। गौरतलब है कि इस तरह के भोजन-सम्बन्धी बयान भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से गहरे जुड़े हैं, इसलिए इनकी प्रतिक्रिया अयोध्या जैसे धार्मिक केंद्रों से आना अप्रत्याशित नहीं है। दूसरी ओर, मदरसा कार्रवाई पर संतों की प्रतिक्रिया एकपक्षीय है — मदरसों से सम्बद्ध समुदाय का पक्ष इस बयानबाज़ी में अनुपस्थित है, जो मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर अनदेखा रह जाता है। दोनों मुद्दों को एक साथ उठाना इस बात का संकेत है कि धार्मिक-सांस्कृतिक ध्रुवीकरण की राजनीति आगामी दिनों में और तेज़ हो सकती है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने ब्रिक्स सम्मेलन में क्या बयान दिया था?
राहुल गांधी ने ब्रिक्स सम्मेलन के गाला डिनर में शाकाहारी भोजन परोसे जाने पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि '80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं'। इस बयान को अयोध्या के संतों ने तथ्यात्मक रूप से गलत और सांस्कृतिक रूप से आपत्तिजनक बताया।
अयोध्या के संतों ने राहुल गांधी से क्या माँग की?
महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने माँग की कि राहुल गांधी इस बयान के लिए देश से सार्वजनिक माफी माँगें। महंत सीताराम दास ने भी बयान को 'निंदनीय' बताते हुए गांधी से स्पष्टीकरण माँगा।
पश्चिम बंगाल में मदरसों पर क्या कार्रवाई हुई और संतों ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर अपर्याप्त सुविधाओं और गतिविधियों को लेकर सवालों के घेरे में आए कुछ मदरसों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज और महंत सीताराम दास दोनों ने इस कार्रवाई का समर्थन किया और कहा कि मदरसा शिक्षा की व्यापक समीक्षा होनी चाहिए।
संतों का शिक्षा के बारे में क्या रुख है?
दोनों संतों ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य समाज में सद्भाव और राष्ट्र निर्माण को मजबूत करना है। उन्होंने बच्चों को आधुनिक शिक्षा देकर डॉक्टर, इंजीनियर बनाने पर जोर दिया और किसी भी प्रकार की कट्टरता को बढ़ावा देने वाली शिक्षा का विरोध किया।
यह विवाद राजनीतिक रूप से क्यों अहम है?
राहुल गांधी का यह बयान ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिया गया और उसे लेकर अयोध्या के धार्मिक केंद्र से प्रतिक्रिया आना इसे राष्ट्रीय राजनीतिक बहस में केंद्रीय बना देता है। भारत में भोजन-सम्बन्धी बयान धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान से जुड़े संवेदनशील मुद्दे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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