बृजभूषण शरण सिंह का राहुल गांधी पर तंज: 'कांग्रेस की जूठन खाने की आदत, छात्रों की समस्या BJP पहले ही हल कर चुकी'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बृजभूषण शरण सिंह ने 7 अगस्त को गोंडा में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के प्रयागराज में प्रस्तावित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की आदत 'जूठन खाने' की है और छात्रों की जो समस्याएँ थीं, उन्हें BJP पहले ही हल कर चुकी है।
बृजभूषण ने क्या कहा
BJP नेता ने कहा, 'मैं राहुल गांधी के इस कदम का स्वागत करता हूँ कि वे छात्रों से संवाद करने जा रहे हैं। लेकिन उन्होंने बहुत देर कर दी है। उन्हें यह काम एक-दो साल पहले करना चाहिए था। छात्रों की समस्या को कॉकरोच लूटकर ले गए। जिन समस्याओं को उठाया गया था, वे अचानक पैदा नहीं हुई थीं — मगर यह राहुल गांधी की समझ में नहीं आया।'
उन्होंने आगे कहा, 'अगर यह विषय याद आया था तो उन्हें बताना चाहिए कि संसद में इस पर कोई बड़ा वक्तव्य दिया या नहीं।'
BJP का दावा — समस्याएँ पहले ही सुलझाईं
बृजभूषण ने जोर देकर कहा, 'अब कॉकरोच जनता पार्टी इस समस्या को लूट ले गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, धर्मेंद्र प्रधान और BJP ने जितनी डिमांड थी, उससे भी अधिक कर दिया। इसलिए अब कुछ बचा नहीं है। इनकी सिर्फ जूठन खाने की आदत है।' उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी के आते-आते बहुत देर हो चुकी है, फिर भी उनके इस कदम का स्वागत है।
राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शनिवार, 9 अगस्त को शाम 5 बजे प्रयागराज में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में युवाओं से संवाद करने वाले हैं। एक दिन पहले शुक्रवार को राहुल गांधी ने कहा था, 'यह सरकार झुकती है — बस आवाज़ एक साथ उठनी चाहिए। शनिवार को प्रयागराज में यही बात करने आ रहा हूँ।'
कांग्रेस की अपील और एक्स पोस्ट
कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के युवाओं से अपील करते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया, 'यह सिस्टम भारत के युवाओं को निराश कर रहा है। अब बदलाव का समय आ गया है। 'छात्रों की गूंज' का हिस्सा बनें।' यह कार्यक्रम ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में छात्र रोज़गार और परीक्षा पारदर्शिता को लेकर लंबे समय से सवाल उठाते रहे हैं।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह वाकयुद्ध ऐसे समय में हो रहा है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ दोनों प्रमुख दलों में शुरू हो चुकी हैं। युवा मतदाता और छात्र समुदाय दोनों पार्टियों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, और यह वर्चस्व की लड़ाई इसी संदर्भ में देखी जा रही है।