18 सितंबर 2026
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वैश्विक रियल एस्टेट पारदर्शिता सूचकांक में भारत 26वें स्थान पर, एशिया-प्रशांत का सबसे बड़ा सुधारक

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वैश्विक रियल एस्टेट पारदर्शिता सूचकांक में भारत 26वें स्थान पर, एशिया-प्रशांत का सबसे बड़ा सुधारक

सारांश

भारत ने जेएलएल के वैश्विक रियल एस्टेट पारदर्शिता सूचकांक में पाँच स्थानों की छलांग लगाकर 26वाँ स्थान हासिल किया है। RERA की परिपक्वता, FDI उदारीकरण और भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण ने इसे एशिया-प्रशांत का शीर्ष सुधारक बनाया — और $10.5 अरब डॉलर के रिकॉर्ड PE निवेश ने इसकी पुष्टि की।

मुख्य बातें

भारत जेएलएल GRETI में 5 स्थान सुधरकर 26वें स्थान पर पहुँचा; एशिया-प्रशांत का सबसे बड़ा सुधारक।
नियामकीय और कानूनी मानकों की रैंकिंग 37वें से सुधरकर 19वें स्थान पर — रिपोर्ट का सबसे बड़ा एकल सुधार।
वर्ष 2025 में निजी इक्विटी निवेश $10.5 अरब डॉलर ( 17% वृद्धि); 2026 की पहली छमाही में $4.3 अरब डॉलर ( 25% वृद्धि)।
ऑफिस REIT बाज़ार 2024 में 104 मिलियन वर्ग फुट से बढ़कर 2026 में 164 मिलियन वर्ग फुट ।
डेटा सेंटर क्षमता 2029 तक 1.6 GW से 6 GW होने का अनुमान; $110 अरब डॉलर निवेश अपेक्षित।
वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियाँ AI-तैयार डेटा सेंटरों के लिए $50 अरब डॉलर से अधिक निवेश के लिए प्रतिबद्ध।

भारत ने जेएलएल ग्लोबल रियल एस्टेट ट्रांसपेरेंसी इंडेक्स (GRETI) में पाँच स्थानों की उल्लेखनीय छलांग लगाते हुए 26वाँ स्थान हासिल किया है और दुनिया के सबसे अधिक सुधार करने वाले पाँच बाज़ारों में अपनी जगह बनाई है। 18 सितंबर 2026 को जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र का सबसे बड़ा सुधारक देश बनकर उभरा है और अब 'ट्रांसपेरेंट' श्रेणी के मध्य स्तर में पहुँच गया है।

सुधार के प्रमुख कारण

रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रगति के पीछे नियामकीय ढाँचे, लेनदेन प्रक्रियाओं और स्थिरता संबंधी मानकों में लगातार हुए सुधार प्रमुख कारक रहे हैं। नियामकीय और कानूनी मानकों की श्रेणी में भारत की रैंकिंग 37वें स्थान से सुधरकर सीधे 19वें स्थान पर पहुँच गई — यह इस पूरे अध्ययन का सबसे बड़ा एकल सुधार है।

इसके पीछे रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम (RERA) का परिपक्व होना, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में उदारीकरण और भूमि अभिलेखों का व्यापक डिजिटलीकरण शामिल हैं। गौरतलब है कि लेनदेन प्रक्रिया के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर 10वें और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तीसरे स्थान पर रहा।

दीर्घकालिक सुधार की तस्वीर

जेएलएल इंडिया की मुख्य कार्यकारी अधिकारी राधा धीर ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत ने वैश्विक स्तर पर चौथा और पिछले 20 वर्षों में तीसरा सबसे बड़ा सुधार दर्ज किया है। उनके अनुसार, भारत अब दुनिया के सबसे पारदर्शी बाज़ारों के बराबर पहुँचने और 'हाइली ट्रांसपेरेंट' श्रेणी में प्रवेश करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक निवेशक उभरते बाज़ारों में पारदर्शिता को निवेश के प्रमुख मानदंड के रूप में देख रहे हैं। भारत का यह सुधार केवल रैंकिंग की बात नहीं — यह संस्थागत पूँजी को आकर्षित करने की क्षमता का प्रमाण है।

निवेश गतिविधियों में रिकॉर्ड वृद्धि

पारदर्शिता में सुधार के साथ-साथ भारत में निवेश गतिविधियाँ भी नई ऊँचाइयों पर पहुँची हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में निजी इक्विटी निवेश बढ़कर $10.5 अरब डॉलर हो गया, जो सालाना आधार पर 17% अधिक था। वहीं, 2026 की पहली छमाही में यह निवेश $4.3 अरब डॉलर रहा — पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 25% अधिक।

भारत का ऑफिस REIT बाज़ार भी तेज़ी से विस्तारित हुआ है। 2024 में जहाँ इसका आकार 104 मिलियन वर्ग फुट था, वहीं 2026 में यह बढ़कर 164 मिलियन वर्ग फुट तक पहुँच गया। रिपोर्ट बताती है कि देश के लगभग आधे ग्रेड-ए ऑफिस स्टॉक अब REIT के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं।

डेटा सेंटर और भविष्य की संभावनाएँ

रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत की डेटा सेंटर क्षमता को लेकर है। अनुमान है कि 2029 तक यह क्षमता 1.6 गीगावाट से बढ़कर 6 गीगावाट हो जाएगी, जिसके लिए करीब $110 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी। वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियाँ AI-तैयार डेटा सेंटर सुविधाओं के लिए पहले ही $50 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता जता चुकी हैं।

BSE रियल्टी इंडेक्स और इंडिया REIT इंडेक्स निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बेंचमार्क बन चुके हैं। REIT और सूचीबद्ध फ्लेक्सिबल स्पेस ऑपरेटरों में तिमाही वित्तीय रिपोर्टिंग और वार्षिक खुलासा मानकों के मज़बूत होने से पूरे क्षेत्र में पारदर्शिता का स्तर बढ़ा है। यदि यही गति बनी रही, तो भारत अगले चक्र में 'हाइली ट्रांसपेरेंट' श्रेणी में प्रवेश का प्रबल दावेदार बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि RERA अभी भी राज्यों में असमान रूप से लागू है और भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण कई राज्यों में अधूरा पड़ा है। रैंकिंग में सुधार और ज़मीनी स्तर पर खरीदारों के अनुभव के बीच की खाई बंद होने में अभी वक्त लगेगा। PE निवेश के आँकड़े प्रभावशाली हैं, लेकिन ये मुख्यतः संस्थागत और वाणिज्यिक क्षेत्र को दर्शाते हैं — आम आवासीय खरीदार की पारदर्शिता-अनुभव की कहानी अलग और अभी भी जटिल है। 'हाइली ट्रांसपेरेंट' श्रेणी की दौड़ में वास्तविक प्रवेश तभी संभव होगा जब उपभोक्ता स्तर की शिकायत-निपटान प्रणाली भी उतनी ही मज़बूत हो।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएलएल ग्लोबल रियल एस्टेट ट्रांसपेरेंसी इंडेक्स में भारत की रैंकिंग क्या है?
जेएलएल GRETI 2026 रिपोर्ट के अनुसार भारत पाँच स्थान सुधरकर 26वें स्थान पर पहुँच गया है। इसके साथ भारत 'ट्रांसपेरेंट' श्रेणी के मध्य स्तर में प्रवेश कर गया है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र का सबसे बड़ा सुधारक देश बना है।
भारत की रियल एस्टेट पारदर्शिता में सुधार के प्रमुख कारण क्या हैं?
RERA का परिपक्व होना, FDI नियमों में उदारीकरण और भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण प्रमुख कारण हैं। इन्हीं सुधारों के चलते नियामकीय और कानूनी मानकों की रैंकिंग 37वें से सीधे 19वें स्थान पर पहुँची।
भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश की स्थिति कैसी है?
2025 में निजी इक्विटी निवेश $10.5 अरब डॉलर रहा, जो सालाना 17% अधिक था। 2026 की पहली छमाही में यह $4.3 अरब डॉलर था — पिछले वर्ष की समान अवधि से 25% ज़्यादा।
भारत का REIT बाज़ार कितना बड़ा हो गया है?
भारत का ऑफिस REIT बाज़ार 2024 के 104 मिलियन वर्ग फुट से बढ़कर 2026 में 164 मिलियन वर्ग फुट हो गया है। देश के लगभग आधे ग्रेड-ए ऑफिस स्टॉक अब REIT के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं।
भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र में कितना निवेश अपेक्षित है?
रिपोर्ट के अनुसार भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2029 तक 1.6 गीगावाट से बढ़कर 6 गीगावाट होने का अनुमान है, जिसके लिए करीब $110 अरब डॉलर के निवेश की ज़रूरत होगी। वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियाँ AI-तैयार सुविधाओं के लिए $50 अरब डॉलर से अधिक की प्रतिबद्धता पहले ही जता चुकी हैं।
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