वैश्विक रियल एस्टेट पारदर्शिता सूचकांक में भारत 26वें स्थान पर, एशिया-प्रशांत का सबसे बड़ा सुधारक
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने जेएलएल ग्लोबल रियल एस्टेट ट्रांसपेरेंसी इंडेक्स (GRETI) में पाँच स्थानों की उल्लेखनीय छलांग लगाते हुए 26वाँ स्थान हासिल किया है और दुनिया के सबसे अधिक सुधार करने वाले पाँच बाज़ारों में अपनी जगह बनाई है। 18 सितंबर 2026 को जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र का सबसे बड़ा सुधारक देश बनकर उभरा है और अब 'ट्रांसपेरेंट' श्रेणी के मध्य स्तर में पहुँच गया है।
सुधार के प्रमुख कारण
रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रगति के पीछे नियामकीय ढाँचे, लेनदेन प्रक्रियाओं और स्थिरता संबंधी मानकों में लगातार हुए सुधार प्रमुख कारक रहे हैं। नियामकीय और कानूनी मानकों की श्रेणी में भारत की रैंकिंग 37वें स्थान से सुधरकर सीधे 19वें स्थान पर पहुँच गई — यह इस पूरे अध्ययन का सबसे बड़ा एकल सुधार है।
इसके पीछे रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम (RERA) का परिपक्व होना, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में उदारीकरण और भूमि अभिलेखों का व्यापक डिजिटलीकरण शामिल हैं। गौरतलब है कि लेनदेन प्रक्रिया के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर 10वें और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तीसरे स्थान पर रहा।
दीर्घकालिक सुधार की तस्वीर
जेएलएल इंडिया की मुख्य कार्यकारी अधिकारी राधा धीर ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत ने वैश्विक स्तर पर चौथा और पिछले 20 वर्षों में तीसरा सबसे बड़ा सुधार दर्ज किया है। उनके अनुसार, भारत अब दुनिया के सबसे पारदर्शी बाज़ारों के बराबर पहुँचने और 'हाइली ट्रांसपेरेंट' श्रेणी में प्रवेश करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक निवेशक उभरते बाज़ारों में पारदर्शिता को निवेश के प्रमुख मानदंड के रूप में देख रहे हैं। भारत का यह सुधार केवल रैंकिंग की बात नहीं — यह संस्थागत पूँजी को आकर्षित करने की क्षमता का प्रमाण है।
निवेश गतिविधियों में रिकॉर्ड वृद्धि
पारदर्शिता में सुधार के साथ-साथ भारत में निवेश गतिविधियाँ भी नई ऊँचाइयों पर पहुँची हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में निजी इक्विटी निवेश बढ़कर $10.5 अरब डॉलर हो गया, जो सालाना आधार पर 17% अधिक था। वहीं, 2026 की पहली छमाही में यह निवेश $4.3 अरब डॉलर रहा — पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 25% अधिक।
भारत का ऑफिस REIT बाज़ार भी तेज़ी से विस्तारित हुआ है। 2024 में जहाँ इसका आकार 104 मिलियन वर्ग फुट था, वहीं 2026 में यह बढ़कर 164 मिलियन वर्ग फुट तक पहुँच गया। रिपोर्ट बताती है कि देश के लगभग आधे ग्रेड-ए ऑफिस स्टॉक अब REIT के लिए उपयुक्त माने जा रहे हैं।
डेटा सेंटर और भविष्य की संभावनाएँ
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत की डेटा सेंटर क्षमता को लेकर है। अनुमान है कि 2029 तक यह क्षमता 1.6 गीगावाट से बढ़कर 6 गीगावाट हो जाएगी, जिसके लिए करीब $110 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी। वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियाँ AI-तैयार डेटा सेंटर सुविधाओं के लिए पहले ही $50 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता जता चुकी हैं।
BSE रियल्टी इंडेक्स और इंडिया REIT इंडेक्स निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बेंचमार्क बन चुके हैं। REIT और सूचीबद्ध फ्लेक्सिबल स्पेस ऑपरेटरों में तिमाही वित्तीय रिपोर्टिंग और वार्षिक खुलासा मानकों के मज़बूत होने से पूरे क्षेत्र में पारदर्शिता का स्तर बढ़ा है। यदि यही गति बनी रही, तो भारत अगले चक्र में 'हाइली ट्रांसपेरेंट' श्रेणी में प्रवेश का प्रबल दावेदार बन सकता है।