होर्मुज जलडमरूमध्य में एडीएनओसी के दो टैंकरों पर हमला, यूएई ने ईरान की कड़ी निंदा की
सारांश
मुख्य बातें
यूएई की सरकारी तेल कंपनी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) के दो जहाजों पर गुरुवार, 13 अगस्त 2026 की शाम होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय हमला किया गया। स्थानीय अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार सुबह इस घटना की पुष्टि हुई। एडीएनओसी ने स्पष्ट किया कि किसी भी नाविक के हताहत होने की सूचना नहीं है और स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया है।
यूएई विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
यूएई के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जारी एक आधिकारिक बयान में ईरान के इन हमलों की कड़ी निंदा की। मंत्रालय ने इस हमले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का खुला उल्लंघन बताया — वह प्रस्ताव जो नेविगेशन की स्वतंत्रता की पुष्टि करता है और व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने या अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में बाधा उत्पन्न करने को अस्वीकार्य ठहराता है।
मंत्रालय ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पर आरोप लगाते हुए कहा कि व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना और होर्मुज जलडमरूमध्य का उपयोग आर्थिक दबाव या ब्लैकमेल के हथियार के रूप में करना समुद्री डकैती के समान है।
यूएई की माँगें
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, 'यूएई ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईरान को इन बिना उकसावे के किए गए हमलों को रोकना चाहिए, सभी तरह की शत्रुता को तुरंत खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध होना चाहिए और क्षेत्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह और बिना किसी शर्त के फिर से खोलना चाहिए।'
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा
यूएई के मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि यह घटना केवल द्विपक्षीय मसला नहीं है — यह क्षेत्र की स्थिरता, वहाँ के नागरिकों और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% तेल व्यापार गुजरता है, जिससे इस जलमार्ग की रणनीतिक अहमियत असाधारण है।
एडीएनओसी ने अपने बयान में नाविकों की सुरक्षा और नेविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखने के महत्व पर बल दिया। कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी तेल और गैस उत्पादक कंपनियों में से एक है और यूएई की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है।
घटना का विवरण अब भी अधूरा
रिपोर्टों के अनुसार, अभी तक हमले में शामिल विशिष्ट जहाजों की पहचान और हमलों से हुए नुकसान की सीमा का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर बना हुआ है। आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया इस घटनाक्रम की दिशा तय करेगी।