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चंसारी स्कूल भवन: ₹1.18 करोड़ का निर्माण सात साल बाद भी अधूरा, 100+ बच्चों की पढ़ाई संकट में

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चंसारी स्कूल भवन: ₹1.18 करोड़ का निर्माण सात साल बाद भी अधूरा, 100+ बच्चों की पढ़ाई संकट में

सारांश

सात साल, ₹1.18 करोड़ का टेंडर, और अभी भी अधूरी दीवारें — कुल्लू के चंसारी स्कूल की कहानी हिमाचल में सरकारी निर्माण की उस पुरानी बीमारी को उजागर करती है जहाँ बजट तो मिलता है, पर छत नहीं। 100 से अधिक बच्चे एक कमरे में तीन-तीन कक्षाएँ झेल रहे हैं।

मुख्य बातें

राजकीय उच्च विद्यालय चंसारी का भवन-निर्माण 2019 से चल रहा है और सात साल बाद भी अधूरा है।
निर्माण टेंडर ₹1.18 करोड़ का था; 2023 की आपदा में पुराना भवन भी क्षतिग्रस्त हो गया।
100 से अधिक विद्यार्थी तीन पंचायतों — बंदल, सेऊगी, चंसारी — के अनेक गाँवों से यहाँ पढ़ते हैं।
निजी भवन का अनुबंध समाप्त होने के बाद बच्चे एक कमरे में दो-तीन कक्षाएँ एक साथ चला रहे हैं।
SMC अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा और ग्रामीणों ने डीसी कुल्लू से मिलकर शीघ्र निर्माण पूर्ण कराने की माँग की है।

कुल्लू जिले की खराहल घाटी में स्थित राजकीय उच्च विद्यालय चंसारी का भवन-निर्माण वर्ष 2019 से चला आ रहा है, लेकिन सात साल बीत जाने के बाद भी यह अधूरा पड़ा है। ₹1.18 करोड़ के टेंडर से शुरू हुई इस परियोजना की सुस्त रफ़्तार ने तीन पंचायतों के 100 से अधिक विद्यार्थियों की पढ़ाई को गंभीर संकट में डाल दिया है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब हिमाचल प्रदेश सरकार शिक्षा और विकास के बड़े दावे कर रही है।

संकट की जड़: आपदा और अधूरा निर्माण

2023 की भीषण बरसात और प्राकृतिक आपदा में स्कूल के पुराने भवन को भारी क्षति पहुँची थी। इसके बाद स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) ने बच्चों की कक्षाएँ एक निजी भवन में स्थानांतरित कर दी थीं, किंतु अब उस भवन के साथ किया गया अनुबंध भी समाप्त हो चुका है। नतीजतन, विद्यार्थियों को एक ही कमरे में दो-दो और तीन-तीन कक्षाओं के बीच पढ़ाई करने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

कितने गाँवों के बच्चे प्रभावित

चंसारी विद्यालय में तीन पंचायतों के अनेक गाँवों के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। इनमें बंदल पंचायत के बंदल और हलैणी, सेऊगी पंचायत के सेऊगी, तथा चंसारी पंचायत के धार्ठ, चंसारी, पेच्छा, माहिश और अपर थर्कू गाँव के विद्यार्थी शामिल हैं। यह विद्यालय इस पूरे क्षेत्र का एकमात्र उच्च शिक्षा केंद्र है।

स्थानीय आवाज़ें: क्या कह रहे हैं अभिभावक और शिक्षक

SMC अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा ने बताया कि भवन-निर्माण का टेंडर ₹1.18 करोड़ में जारी किया गया था, परंतु अभी तक काम पूरा नहीं हो सका। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा विभाग ने शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया, तो आने वाले दिनों में कक्षाएँ संचालित करना असंभव हो जाएगा।

स्थानीय निवासी शीतू शर्मा ने बताया कि आपदा के बाद से प्रशासन से कई बार माँग की जा चुकी है, लेकिन ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई। वहीं, अध्यापक भाल चंद शास्त्री ने स्वीकार किया कि नए भवन का निर्माण लंबे समय तक ठप रहा, हालाँकि अब काम दोबारा शुरू हो गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा।

प्रशासन से मुलाकात, पर राहत नहीं

SMC और ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने डीसी कुल्लू से भेंट कर भवन-निर्माण शीघ्र पूरा कराने की माँग रखी। ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में एक कमरे में कई कक्षाएँ एक साथ चलाने से बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। गौरतलब है कि यह मामला पहाड़ी राज्यों में सरकारी निर्माण परियोजनाओं की पुरानी समस्या — बजट स्वीकृति के बावजूद वर्षों तक अधूरे काम — को एक बार फिर उजागर करता है।

आगे क्या

अध्यापकों और SMC का आग्रह है कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन कुल्लू तत्काल हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य की समय-सीमा तय करें। यदि शीतकाल से पहले भवन पूरा नहीं हुआ, तो कड़ाके की ठंड में खुले या अपर्याप्त स्थान पर पढ़ाई बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों के लिए घातक हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी जिलों में सरकारी निर्माण परियोजनाओं की उस प्रणालीगत विफलता का प्रतीक है जहाँ टेंडर जारी होते हैं, फ़ाइलें चलती हैं, पर ज़मीन पर दीवारें नहीं उठतीं। सात साल में ₹1.18 करोड़ की परियोजना का न पूरा होना और आपदा के बाद वैकल्पिक व्यवस्था का भी ध्वस्त हो जाना — यह दोहरी प्रशासनिक चूक है। असली सवाल यह है कि जब निर्माण एजेंसी वर्षों तक काम ठप रखे, तो जवाबदेही का तंत्र कहाँ था? शिक्षा का अधिकार क़ानून बच्चों को उचित बुनियादी ढाँचे की गारंटी देता है — एक कमरे में तीन कक्षाएँ उस गारंटी का खुला उल्लंघन है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंसारी स्कूल भवन का निर्माण कब से अधूरा है?
राजकीय उच्च विद्यालय चंसारी के नए भवन का निर्माण वर्ष 2019 से चल रहा है और 2025 तक — यानी लगभग सात साल बाद भी — पूरा नहीं हो सका है। ₹1.18 करोड़ के टेंडर के बावजूद काम लंबे समय तक ठप रहा, हालाँकि हाल ही में दोबारा शुरू होने की जानकारी है।
इस स्कूल में कितने और कहाँ-कहाँ के बच्चे पढ़ते हैं?
चंसारी स्कूल में तीन पंचायतों — बंदल, सेऊगी और चंसारी — के कुल 100 से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। इनमें बंदल, हलैणी, सेऊगी, धार्ठ, चंसारी, पेच्छा, माहिश और अपर थर्कू गाँव के बच्चे शामिल हैं।
2023 की आपदा के बाद बच्चों की पढ़ाई कैसे चल रही है?
2023 की बाढ़ और आपदा में पुराना स्कूल भवन क्षतिग्रस्त होने के बाद SMC ने निजी भवन में कक्षाएँ चलाने की व्यवस्था की थी, लेकिन वह अनुबंध भी समाप्त हो चुका है। अब एक ही कमरे में दो-तीन कक्षाएँ एक साथ संचालित की जा रही हैं, जिससे पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित है।
ग्रामीणों और SMC ने प्रशासन से क्या माँग की है?
SMC अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा के नेतृत्व में ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने डीसी कुल्लू से मुलाकात कर नए भवन का निर्माण शीघ्र पूरा कराने की माँग रखी है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग को तत्काल हस्तक्षेप कर निर्माण की समय-सीमा तय करनी चाहिए।
क्या भवन-निर्माण पर अब कोई प्रगति हो रही है?
अध्यापक भाल चंद शास्त्री के अनुसार, नए भवन का निर्माण कार्य लंबे समय तक बंद रहने के बाद हाल ही में दोबारा शुरू हुआ है। हालाँकि निर्माण पूरा होने की कोई आधिकारिक समय-सीमा अभी तक घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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