29 जून 2026
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करौली में 100 साल पुरानी जर्जर इमारत में पढ़ रहीं छात्राएँ, दरारें और टपकती छत बनी खतरा

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करौली में 100 साल पुरानी जर्जर इमारत में पढ़ रहीं छात्राएँ, दरारें और टपकती छत बनी खतरा

सारांश

करौली में 100 साल पुरानी इमारत में चल रहे सरकारी बालिका विद्यालय की दरारें और टपकती छत खतरे की घंटी हैं। 737 स्कूलों की मरम्मत के लिए ₹2 लाख प्रति स्कूल स्वीकृत हुए, एक साल से ज़्यादा बीत गया — पर काम अधूरा। मानसून सिर पर है।

मुख्य बातें

करौली के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की 100 वर्ष पुरानी इमारत में चौड़ी दरारें, झड़ता प्लास्टर और कमज़ोर छतें छात्राओं के लिए खतरा बनी हैं।
दो वर्ष पहले बारिश में भवन का एक हिस्सा ढह गया था, जिसका पुनर्निर्माण अब तक नहीं हुआ; जनसहयोग से टीनशेड लगाकर काम चलाया जा रहा है।
जिले के 737 विद्यालयों की मरम्मत के लिए प्रति विद्यालय ₹2 लाख स्वीकृत हुए थे, लेकिन एक वर्ष से अधिक बाद भी कई स्कूलों में काम अधूरा है।
प्रधानाचार्य मिथिलेश कुमार शर्मा के अनुसार, जगह की कमी से एक ही कक्ष में तीन-तीन कक्षाओं की छात्राओं को बैठाना पड़ता है।
DEO इंद्रेश तिवाड़ी ने शेष मरम्मत कार्य जल्द पूरा कराने का आश्वासन दिया है।

राजस्थान के करौली जिले में 29 जून 2026 को ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुई, लेकिन पहले ही दिन जिला मुख्यालय स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की दुर्दशा ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यह विद्यालय करीब 100 वर्ष पुरानी इमारत में संचालित हो रहा है, जिसमें चौड़ी दरारें, झड़ता प्लास्टर और कमज़ोर छतें छात्राओं के लिए निरंतर जोखिम बनी हुई हैं।

भवन की स्थिति: दरारें, ढही छत और टीनशेड का सहारा

विद्यालय की इमारत कई स्थानों पर इस कदर क्षतिग्रस्त हो चुकी है कि दो वर्ष पहले बारिश के दौरान भवन का एक हिस्सा ढह गया था। आज तक उस हिस्से का पुनर्निर्माण नहीं हो पाया है। बजट के अभाव में दो क्षतिग्रस्त कमरों की छत हटाकर जनसहयोग से टीनशेड लगाकर अस्थायी व्यवस्था की गई है। बारिश के मौसम में इन टीनशेड कमरों में भी पानी टपकता है, जिससे पढ़ाई बाधित होती है।

प्रधानाचार्य का बयान: बार-बार प्रस्ताव, पर स्वीकृति नहीं

विद्यालय के प्रधानाचार्य मिथिलेश कुमार शर्मा ने बताया कि भवन की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए कई बार प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन अब तक कोई स्वीकृति नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान अत्यधिक जर्जर कमरों को बंद कर दिया जाता है और जगह की कमी के चलते कई बार एक ही कक्ष में तीन-तीन कक्षाओं की छात्राओं को एक साथ बैठाना पड़ता है।

मरम्मत की स्वीकृति के बावजूद काम अधूरा

गौरतलब है कि पिछले वर्ष बारिश में प्रदेशभर में स्कूल भवनों की जर्जर स्थिति उजागर होने के बाद आपदा प्रबंधन के तहत करौली जिले के 737 विद्यालयों की मरम्मत के लिए प्रति विद्यालय ₹2 लाख की स्वीकृति दी गई थी। इनमें 281 विद्यालयों की मरम्मत शिक्षा विभाग और 456 विद्यालयों की मरम्मत पंचायती राज विभाग के माध्यम से होनी थी। एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जिले के कई विद्यालयों में मरम्मत कार्य पूरा नहीं हो सका है — यह प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाता है।

अधिकारी का आश्वासन

करौली सेकेंडरी के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) इंद्रेश तिवाड़ी ने बताया कि जिन विद्यालयों के भवन जर्जर हैं, उनके निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि पहले भी कई भवनों का निर्माण कराया जा चुका है और शेष कार्य जल्द पूरा कराया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी बताया कि जिन विद्यालयों में नामांकन कम हुआ है, वहाँ छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

आम जनता और अभिभावकों की उम्मीद

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ अभिभावकों और विद्यार्थियों को उम्मीद है कि विद्यालयों की आधारभूत समस्याओं का शीघ्र समाधान होगा। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में मानसून का आगमन निकट है और जर्जर भवनों में पढ़ रहे बच्चों के लिए खतरा और बढ़ सकता है। प्रशासन के आश्वासन कितनी जल्दी ज़मीन पर उतरते हैं, यही असली परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्रियान्वयन और जवाबदेही की है। जब तक मरम्मत निधि के उपयोग की समयबद्ध निगरानी नहीं होगी, ये घोषणाएँ कागज़ी राहत से आगे नहीं जाएँगी। मानसून के आने से पहले यदि ये भवन सुरक्षित नहीं किए गए, तो ज़िम्मेदारी तय करना और भी ज़रूरी हो जाएगा।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करौली के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की स्थिति इतनी खराब क्यों है?
यह विद्यालय करीब 100 वर्ष पुरानी इमारत में चल रहा है, जिसमें दरारें, झड़ता प्लास्टर और कमज़ोर छतें हैं। दो वर्ष पहले बारिश में भवन का एक हिस्सा ढह गया था और पुनर्निर्माण के लिए बजट स्वीकृति अब तक नहीं मिली है।
करौली जिले में स्कूल मरम्मत के लिए कितना बजट स्वीकृत हुआ था?
आपदा प्रबंधन के तहत करौली जिले के 737 विद्यालयों की मरम्मत के लिए प्रति विद्यालय ₹2 लाख स्वीकृत किए गए थे। इनमें 281 स्कूल शिक्षा विभाग और 456 स्कूल पंचायती राज विभाग के ज़िम्मे थे, लेकिन एक वर्ष बाद भी कई जगह काम पूरा नहीं हुआ।
जर्जर कमरों में छात्राओं की पढ़ाई कैसे हो रही है?
प्रधानाचार्य मिथिलेश कुमार शर्मा के अनुसार, बारिश के दौरान अत्यधिक जर्जर कमरे बंद कर दिए जाते हैं और जगह की कमी के कारण एक ही कक्ष में तीन-तीन कक्षाओं की छात्राओं को बैठाना पड़ता है। टीनशेड वाले कमरों में भी बारिश के समय पानी टपकता है।
जिला शिक्षा विभाग ने इस समस्या पर क्या कहा?
करौली सेकेंडरी के जिला शिक्षा अधिकारी इंद्रेश तिवाड़ी ने कहा कि जर्जर भवनों की मरम्मत और निर्माण की प्रक्रिया जारी है और शेष कार्य जल्द पूरा कराया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कम नामांकन वाले विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं।
नए शैक्षणिक सत्र में करौली के सरकारी स्कूलों में उपस्थिति कैसी रही?
29 जून 2026 को नए सत्र के पहले दिन करौली जिले के अधिकांश सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति अपेक्षा से काफी कम रही। जर्जर भवनों की स्थिति और बुनियादी सुविधाओं की कमी इसके प्रमुख कारणों में मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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