करौली में 100 साल पुरानी जर्जर इमारत में पढ़ रहीं छात्राएँ, दरारें और टपकती छत बनी खतरा
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के करौली जिले में 29 जून 2026 को ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुई, लेकिन पहले ही दिन जिला मुख्यालय स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की दुर्दशा ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यह विद्यालय करीब 100 वर्ष पुरानी इमारत में संचालित हो रहा है, जिसमें चौड़ी दरारें, झड़ता प्लास्टर और कमज़ोर छतें छात्राओं के लिए निरंतर जोखिम बनी हुई हैं।
भवन की स्थिति: दरारें, ढही छत और टीनशेड का सहारा
विद्यालय की इमारत कई स्थानों पर इस कदर क्षतिग्रस्त हो चुकी है कि दो वर्ष पहले बारिश के दौरान भवन का एक हिस्सा ढह गया था। आज तक उस हिस्से का पुनर्निर्माण नहीं हो पाया है। बजट के अभाव में दो क्षतिग्रस्त कमरों की छत हटाकर जनसहयोग से टीनशेड लगाकर अस्थायी व्यवस्था की गई है। बारिश के मौसम में इन टीनशेड कमरों में भी पानी टपकता है, जिससे पढ़ाई बाधित होती है।
प्रधानाचार्य का बयान: बार-बार प्रस्ताव, पर स्वीकृति नहीं
विद्यालय के प्रधानाचार्य मिथिलेश कुमार शर्मा ने बताया कि भवन की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए कई बार प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन अब तक कोई स्वीकृति नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान अत्यधिक जर्जर कमरों को बंद कर दिया जाता है और जगह की कमी के चलते कई बार एक ही कक्ष में तीन-तीन कक्षाओं की छात्राओं को एक साथ बैठाना पड़ता है।
मरम्मत की स्वीकृति के बावजूद काम अधूरा
गौरतलब है कि पिछले वर्ष बारिश में प्रदेशभर में स्कूल भवनों की जर्जर स्थिति उजागर होने के बाद आपदा प्रबंधन के तहत करौली जिले के 737 विद्यालयों की मरम्मत के लिए प्रति विद्यालय ₹2 लाख की स्वीकृति दी गई थी। इनमें 281 विद्यालयों की मरम्मत शिक्षा विभाग और 456 विद्यालयों की मरम्मत पंचायती राज विभाग के माध्यम से होनी थी। एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जिले के कई विद्यालयों में मरम्मत कार्य पूरा नहीं हो सका है — यह प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाता है।
अधिकारी का आश्वासन
करौली सेकेंडरी के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) इंद्रेश तिवाड़ी ने बताया कि जिन विद्यालयों के भवन जर्जर हैं, उनके निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि पहले भी कई भवनों का निर्माण कराया जा चुका है और शेष कार्य जल्द पूरा कराया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी बताया कि जिन विद्यालयों में नामांकन कम हुआ है, वहाँ छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
आम जनता और अभिभावकों की उम्मीद
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ अभिभावकों और विद्यार्थियों को उम्मीद है कि विद्यालयों की आधारभूत समस्याओं का शीघ्र समाधान होगा। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में मानसून का आगमन निकट है और जर्जर भवनों में पढ़ रहे बच्चों के लिए खतरा और बढ़ सकता है। प्रशासन के आश्वासन कितनी जल्दी ज़मीन पर उतरते हैं, यही असली परीक्षा होगी।