बलूचिस्तान के खुजदार में गर्ल्स स्कूल संकट: 200+ छात्राओं पर मात्र 6-7 शिक्षक, बुनियादी सुविधाएं नदारद
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के खुजदार जिले में एक सरकारी बालिका विद्यालय की दुर्दशा सामने आई है, जहाँ 200 से अधिक छात्राओं को पढ़ाने के लिए महज 6 से 7 शिक्षक उपलब्ध हैं। बलूच लिटरेसी कैंपेन (BLC) ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए बलूचिस्तान के शिक्षा अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। संगठन के अनुसार, यह स्थिति क्षेत्र में बालिका शिक्षा के प्रति प्रशासनिक उदासीनता की बानगी है।
स्कूल की वर्तमान स्थिति
खुजदार के ग्रेशाग क्षेत्र स्थित गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल सर्रेज में 200 से अधिक छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन BLC के अनुसार उन्हें पढ़ाने के लिए केवल 6 से 7 शिक्षक ही तैनात हैं। संगठन का कहना है कि शिक्षकों की इस भारी कमी के कारण छात्राओं को विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
BLC ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल में वैकल्पिक शिक्षकों की अनधिकृत व्यवस्था भी समस्या को और जटिल बना रही है — जिसमें ड्यूटी पर तैनात शिक्षक की जगह बिना उचित प्रशिक्षण के कोई अन्य व्यक्ति पढ़ाने आता है। इससे नियमित कक्षाएं बाधित होती हैं और शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
माध्यमिक कक्षाओं का अभाव
संगठन के अनुसार, यह विद्यालय आधिकारिक तौर पर हाई स्कूल के रूप में पंजीकृत है, किंतु वहाँ माध्यमिक स्तर की कक्षाएं संचालित नहीं हो रही हैं। इस कारण बड़ी संख्या में छात्राओं को बीच में ही पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है और वे उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित हो रही हैं। BLC का कहना है कि यह स्थिति लड़कियों के शैक्षणिक भविष्य पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
बुनियादी सुविधाओं का संकट
BLC की रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल में पर्याप्त कक्षाओं, पाठ्यपुस्तकों और स्वच्छ पेयजल तक का अभाव है। ये परिस्थितियाँ छात्राओं के सीखने के माहौल को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं। यह ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान सरकार शिक्षा सुधार और साक्षरता दर बढ़ाने के दावे करती रहती है।
व्यापक शैक्षणिक संकट की पृष्ठभूमि
BLC, बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (BSAC) की एक पहल है। BSAC ने इससे पहले बलूचिस्तान में शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों की कथित जबरन सेवानिवृत्ति की कड़ी आलोचना की थी और इसे 'अलोकतांत्रिक और दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया था। संगठन का आरोप है कि इस कदम का इस्तेमाल शिक्षकों को अपने अधिकारों की आवाज़ उठाने से रोकने के लिए किया जा रहा है।
BSAC के अनुसार, बलूचिस्तान में शिक्षकों की भारी कमी के चलते कई स्कूल सुचारु रूप से काम नहीं कर पा रहे हैं और कुछ विद्यालय केवल कागजों पर दर्ज 'गोस्ट स्कूल' बनकर रह गए हैं। गौरतलब है कि बलूचिस्तान में शिक्षा की यह खराब स्थिति लंबे समय से बनी हुई है और जमीनी हकीकत सरकारी दावों से कोसों दूर बताई जाती है।
माँग और आगे की राह
BLC ने बलूचिस्तान के शिक्षा अधिकारियों से अपील की है कि वे तत्काल हस्तक्षेप करें, पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करें और स्कूल में बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराएं। आलोचकों का कहना है कि जब तक प्रशासनिक जवाबदेही तय नहीं होगी और संसाधनों का समुचित आवंटन नहीं होगा, तब तक बलूचिस्तान की बालिका शिक्षा इसी तरह हाशिये पर रहेगी।