बलूचिस्तान के खुजदार में डिजिटल लाइब्रेरी बंद होने पर छात्रों का विरोध, सड़क किनारे पढ़ाई को मजबूर
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के खुजदार जिले में 31 जुलाई 2026 को छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों ने एक डिजिटल लाइब्रेरी बंद किए जाने के विरोध में शांतिपूर्ण मार्च निकाला। छात्रों का आरोप है कि जिला प्रशासन के इस कदम से उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है और उन्हें लाइब्रेरी भवन के बाहर सड़क किनारे बैठकर पढ़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विरोध मार्च के बाद जिला प्रशासन ने लाइब्रेरी का मुख्य द्वार बंद कर दिया और कथित तौर पर कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। छात्रों ने अपने अभियान को पूर्णतः शांतिपूर्ण बताते हुए कहा, 'हमारी एकमात्र माँग हमारे जायज और बुनियादी शैक्षणिक अधिकारों की सुरक्षा है।'
प्रदर्शनकारियों ने बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री, कलात डिवीजन के कमिश्नर और अन्य संबंधित अधिकारियों से लाइब्रेरी में शैक्षणिक गतिविधियाँ बिना किसी रुकावट के फिर से शुरू करने की माँग की।
बलूच वॉयस फॉर जस्टिस की प्रतिक्रिया
बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) ने लाइब्रेरी बंद किए जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा, 'खुजदार लाइब्रेरी से स्टूडेंट्स को निकालना बेहद चिंताजनक फैसला है। सैकड़ों छात्र पढ़ाई, परीक्षा की तैयारी, शोध और अकादमिक अध्ययन के लिए इस सार्वजनिक लाइब्रेरी पर निर्भर हैं। उन्हें इस जरूरी शैक्षणिक स्थान तक पहुँचने से रोकना शिक्षा के अधिकार पर सीधा हमला है। हम खुजदार के छात्रों के साथ खड़े हैं।'
बलूचिस्तान में शिक्षा की बदहाल तस्वीर
यह विरोध प्रदर्शन बलूचिस्तान सहित पूरे पाकिस्तान में शिक्षा क्षेत्र की बिगड़ती स्थिति की पृष्ठभूमि में हुआ है। द न्यूज इंटरनेशनल में प्रकाशित CSA की एक विस्तृत रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि पाकिस्तान में शिक्षा की समस्या केवल नई नीति न बनने तक सीमित नहीं, बल्कि मौजूदा नीतियों को सही ढंग से लागू न कर पाना भी एक बड़ी चुनौती है — जिसकी वजह कमजोर प्रशासनिक ढाँचा, धन की कमी, सटीक डेटा का अभाव और राज्यों के बीच असमानता है।
रिपोर्ट में बलूचिस्तान को ढाँचागत दृष्टि से सबसे पिछड़ा प्रांत बताया गया है। यहाँ स्कूल न जाने वाले बच्चों की दर 2023 में 69% से घटकर 2025 में 45% हो गई है, लेकिन बुनियादी ढाँचे की गहरी कमी अब भी बनी हुई है। प्रांत की विशाल भौगोलिक विस्तार के कारण बच्चों को प्राथमिक विद्यालय तक पहुँचने के लिए कथित तौर पर लगभग 30 किलोमीटर और माध्यमिक शिक्षा के लिए 360 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ता है।
आम जनता पर असर और आगे की चेतावनी
एक अलग रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में राष्ट्रीय शिक्षा आपातकाल घोषित होने के दो वर्ष बाद भी देश दुनिया के सबसे गंभीर शिक्षा संकटों में से एक से जूझ रहा है, जहाँ 2.5 करोड़ से अधिक बच्चे अभी भी स्कूल से बाहर हैं। ऐसे में खुजदार की डिजिटल लाइब्रेरी का बंद होना उन छात्रों के लिए बड़ा झटका है जिनके पास पहले से ही शैक्षणिक संसाधनों की भारी कमी है।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी माँगें पूरी नहीं हुईं तो वे हाईवे पर विरोध प्रदर्शन करेंगे और किसी भी प्रतिकूल परिणाम की जिम्मेदारी जिला प्रशासन पर डाली जाएगी। यह मामला पाकिस्तान में शैक्षणिक अधिकारों की व्यापक बहस को एक नई धार दे सकता है।