क्या बलूचिस्तान में शिक्षकों को विरोध प्रदर्शन के लिए सजा दी गई?

Click to start listening
क्या बलूचिस्तान में शिक्षकों को विरोध प्रदर्शन के लिए सजा दी गई?

सारांश

बलूचिस्तान में शिक्षकों के खिलाफ की गई सस्पेंशन की कार्रवाई ने विरोध का एक नया मोड़ लिया है। जानिए इस पर क्या कहते हैं स्थानीय संगठनों और टीचरों के प्रतिनिधि।

Key Takeaways

  • बलूचिस्तान में 38 शिक्षकों को सस्पेंड किया गया है।
  • सरकार का यह कदम शिक्षा में सुधार के दावों के विपरीत है।
  • कर्मचारी संगठनों ने इस कार्रवाई की निंदा की है।
  • शांतिपूर्ण बातचीत का आह्वान किया गया है।

क्वेटा, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बढ़ते तनाव के बीच, पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों के खिलाफ एक कठोर कदम उठाया गया है। शिक्षकों को विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के कारण गंभीर परिणाम भुगतने पड़े हैं।

मीडिया में आई खबरों के अनुसार, बलूचिस्तान की प्रांतीय सरकार ने कॉलेजों के विभिन्न विभागों की छह महिला शिक्षिकाओं सहित 38 असिस्टेंट प्रोफेसर और लेक्चरर को तीन महीने के लिए सस्पेंड कर दिया है।

बलूचिस्तान के महासचिव द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि यह कार्रवाई बलूचिस्तान एम्प्लॉइज एफिशिएंसी एंड डिसिप्लिन एक्ट (बीईडीए) के तहत की गई है, जिसमें हड़ताल में शामिल होने, सरकारी दफ्तरों में ताला लगाने और सरकारी कार्यों में रुकावट डालने का आरोप है।

सस्पेंड किए गए शिक्षकों में बलूचिस्तान ग्रैंड अलायंस के अध्यक्ष अब्दुल कुदूस काकर भी शामिल हैं। यह एक सरकारी कर्मचारियों का संघ है, जो अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहा है।

हालांकि, सरकार के इस कदम की व्यापक निंदा की गई है। कर्मचारी संगठनों ने इसे विरोध करने के अधिकार को कुचलने का प्रयास बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस प्रकार की सजा से सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच तनाव और बढ़ेगा।

इस बीच, बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (बीएसएसी) ने भी सरकार के फैसले की आलोचना की है, उसे न्याय की मांग करने वाली आवाजों को दबाने का एक प्रयास बताया है। बीएसएसी ने कहा, “बलूचिस्तान का इतिहास बताता है कि जब भी सत्य और न्याय के लिए आवाज उठाई गई, तब की सरकार ने उसे कुचलने की कोशिश की।”

बीएसएसी के प्रवक्ता ने कहा कि शिक्षकों का सस्पेंशन और संघ के नेताओं की गिरफ्तारी उस सरकार की पहचान है जो ज्ञान और शिक्षा से डरती है। उन्होंने कहा कि भले ही अधिकारियों के शिक्षा में सुधार के दावे हों, यह सच्चाई है कि उनकी प्राथमिकताएं शिक्षा और जनकल्याण नहीं हैं।

संगठन ने बलूचिस्तान सरकार से अपील की है कि वह अपनी जिद छोड़कर विरोध कर रहे कर्मचारियों के साथ शांतिपूर्ण बातचीत करे।

Point of View

मैं यह मानता हूं कि बलूचिस्तान में शिक्षकों के खिलाफ उठाया गया यह कदम जनहित में नहीं है। यह न केवल शैक्षिक संस्थाओं को प्रभावित करेगा, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम भी होंगे। सरकार को चाहिए कि वह संवाद और सहिष्णुता के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकाले।
NationPress
12/01/2026

Frequently Asked Questions

बलूचिस्तान में सस्पेंड किए गए शिक्षकों की संख्या कितनी है?
बलूचिस्तान में 38 शिक्षकों को सस्पेंड किया गया है।
सरकार ने शिक्षकों को क्यों सस्पेंड किया?
शिक्षकों को हड़ताल में शामिल होने और सरकारी कार्यों में रुकावट डालने के आरोप में सस्पेंड किया गया।
इस कार्रवाई की आलोचना क्यों की जा रही है?
इस कार्रवाई को विरोध करने के अधिकार को कुचलने का प्रयास मानते हुए आलोचना की जा रही है।
Nation Press