बलूचिस्तान में शिक्षकों की जबरन सेवानिवृत्ति पर बीएसएसी का विरोध, 'शिक्षा-विरोधी नीति' बंद करने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
बलोच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (बीएसएसी) ने 16 जून 2026 को बलूचिस्तान में शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों की जबरन सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया की कड़ी निंदा की है। संगठन ने इसे 'अलोकतांत्रिक और दुर्भाग्यपूर्ण' करार देते हुए कहा कि यह कदम उन कर्मचारियों को डराने के लिए उठाया जा रहा है जो अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज़ उठाते हैं। क्वेटा से सामने आई इस खबर ने प्रांत की पहले से ही संकटग्रस्त शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
मुख्य आरोप और संगठन का पक्ष
बीएसएसी ने आरोप लगाया कि जबरन सेवानिवृत्ति की यह प्रक्रिया एक सुनियोजित 'साजिश' का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बलूचिस्तान को शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा रखना और प्रांत की साक्षरता दर को और नीचे धकेलना है। संगठन ने कहा कि पिछले एक वर्ष में अनेक प्रोफेसरों और शिक्षकों को अपने अधिकारों के लिए विरोध प्रदर्शन करने पर भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।
बलूचिस्तान की शिक्षा व्यवस्था की दयनीय स्थिति
बीएसएसी के अनुसार, पूरे प्रांत में शिक्षकों की भारी कमी के चलते कई स्कूल पहले ही बंद हो चुके हैं। इन्हें स्थानीय स्तर पर 'गोस्ट स्कूल' कहा जाता है — अर्थात जहाँ भवन तो मौजूद है, परंतु न शिक्षक हैं और न छात्र। संगठन ने कहा, 'बलूचिस्तान में लंबे समय से शिक्षा की स्थिति दयनीय बनी हुई है। हर सरकार शिक्षा सुधार के दावे करती है, लेकिन वास्तविकता में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। कई क्षेत्रों में न तो शिक्षक हैं, न गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, और कई जगहों पर स्कूल ही मौजूद नहीं हैं।'
शिक्षकों के सम्मान पर बीएसएसी का रुख
छात्र संगठन ने शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, 'शिक्षक किसी भी समाज की प्रगति का अनिवार्य हिस्सा होते हैं। वही शिक्षा क्रांति की बुनियाद रखते हैं। इस तरह उनका अपमान स्वीकार्य नहीं है। हमारा शिक्षकों के साथ संबंध बौद्धिक और आत्मिक है; उनकी मेहनत और ईमानदारी छात्रों को सफलता की ऊँचाई तक पहुँचाती है।' बीएसएसी ने इस स्थिति को प्रांत के 'शैक्षिक पिछड़ेपन' की पीड़ादायक तस्वीर बताया।
सरकार से माँग
बीएसएसी ने पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि वह बलूचिस्तान में अपनाई जा रही 'शिक्षा-विरोधी नीति' पर तत्काल पुनर्विचार करे और शिक्षकों तथा अन्य सरकारी कर्मचारियों की जबरन सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया को फौरन रोके। संगठन का कहना है कि शिक्षकों की जायज माँगों की लगातार अनदेखी प्रांत के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में सामने आया है जब बलूचिस्तान में शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति पर पहले से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। बीएसएसी ने संकेत दिया है कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा।