एसआईआर विवाद: पप्पू यादव का सीईसी ज्ञानेश कुमार पर हमला — 'संविधान का गला घोंटा, महाभियोग चलाओ'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने 25 सितंबर 2026 को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) पर छिड़े राष्ट्रीय विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि उन्होंने 'संविधान का गला घोंटा है।' उनका यह बयान उस रिपोर्ट के एक दिन बाद आया जिसमें बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने हाल के महीनों में भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के फैसलों और प्रक्रियाओं पर आंतरिक रूप से असहमति जताई थी।
क्या है पूरा विवाद
ईसीआई में तीन चुनाव आयुक्त होते हैं, जिनमें सीईसी संवैधानिक रूप से 'बराबर वालों में प्रथम' की स्थिति रखते हैं। नियम यह है कि जहाँ तक संभव हो, सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जाएँ। एसआईआर को लेकर आयोग के भीतर असहमति की खबरें सामने आने के बाद यह विवाद राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
पप्पू यादव के आरोप
यादव ने कहा, 'ज्ञानेश कुमार गरीबों, दलितों, कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों और वोटों की चोरी करते हैं, उन्हें सबक मिलना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि 'ज्ञानेश ने बहुत बड़ा अपराध किया है और लोकतंत्र की हत्या की है।'
उनके अनुसार, सीईसी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने माँग की कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जाए और विपक्ष एकजुट होकर उनके इस्तीफे तक सभी चुनावों का बहिष्कार करे।
बिहार, बंगाल और असम पर सवाल
यादव ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण बंगाल, बिहार और असम में 13 करोड़ लोगों के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने माँग की कि इन तीनों राज्यों में चुनाव रद्द किए जाएँ।
उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी और मैं इसके खिलाफ लड़ते रहे हैं। सभी को एक मंच पर आना चाहिए और ज्ञानेश जैसे व्यक्ति के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए।'
विवादित बयानों की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यादव की टिप्पणी विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी के उस विवादित बयान के ठीक एक दिन बाद आई, जिसमें सहनी ने कथित तौर पर कहा था कि अगर उन्हें एक हत्या की छूट होती तो वे सीईसी को गोली मार देते। इन बयानों की व्यापक निंदा हो रही है और राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ रहा है।
आगे क्या
ईसीआई की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विपक्षी दलों के बीच एसआईआर के खिलाफ संयुक्त रणनीति पर चर्चा जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले राज्य चुनावों की रणनीति को गहरे तक प्रभावित कर सकता है।