30 सितंबर 2026
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एसआईआर में गड़बड़ी का आरोप: बीजेडी ने फिर उठाई सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग

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एसआईआर में गड़बड़ी का आरोप: बीजेडी ने फिर उठाई सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग

सारांश

बीजेडी ने एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग एक बार फिर दोहराई। नेता प्रसन्न आचार्य का तीखा बयान — 'अब सरकार मतदाता चुन रही है' — लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

बीजू जनता दल (बीजेडी) ने 30 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग दोहराई।
बीजेडी नेता प्रसन्न आचार्य ने आरोप लगाया कि एसआईआर के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
आचार्य ने कहा — 'लोकतंत्र में मतदाता सरकार चुनते हैं, लेकिन अब सरकार मतदाता चुन रही है।' बीजेडी ने स्पष्ट किया कि वह न इंडी गठबंधन का हिस्सा है और न ही एनडीए का।
पार्टी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने शुरुआत से ही एसआईआर प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई है।

बीजू जनता दल (बीजेडी) ने 30 सितंबर को एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग दोहराई, यह आरोप लगाते हुए कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएँ हुई हैं। भुवनेश्वर में पत्रकारों से बात करते हुए बीजेडी के वरिष्ठ नेता एवं ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के उपनेता प्रसन्न आचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर पहले दिन से अपनी स्थिति स्पष्ट करती आई है।

मुख्य आरोप और पार्टी का रुख

प्रसन्न आचार्य ने कहा कि बीजेडी अध्यक्ष एवं विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने शुरुआत से ही एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर पार्टी की आपत्तियाँ सार्वजनिक रूप से सामने रखी हैं। उनके अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में जिस तरह से एसआईआर संचालित की जा रही है, उससे मतदाताओं के मन में स्वाभाविक रूप से संदेह उत्पन्न हो रहा है।

आचार्य ने आरोप लगाया कि एसआईआर के अंतर्गत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जबकि नए नाम भी जोड़े गए हैं। उनके अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

लोकतंत्र पर सीधा प्रहार — आचार्य का बयान

आचार्य ने तीखे शब्दों में कहा, 'लोकतंत्र में मतदाता सरकार चुनते हैं, लेकिन अब ऐसा लगता है कि सरकार मतदाता चुन रही है। अगर सत्ताधारी पार्टी नहीं चाहे तो कोई व्यक्ति मतदाता नहीं बन सकता।' यह बयान कथित तौर पर मतदाता सूची प्रबंधन में राजनीतिक हस्तक्षेप की ओर इशारा करता है।

उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त जिस तरीके से संस्था का संचालन कर रहे हैं, वह लोकतांत्रिक मानदंडों के प्रति चिंता उत्पन्न करता है।

इंडी गठबंधन से दूरी का स्पष्टीकरण

इंडी गठबंधन की बैठक में बीजेडी की भागीदारी के सवाल पर प्रसन्न आचार्य ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी न तो इंडी गठबंधन का हिस्सा है और न ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का। उन्होंने कहा कि बीजेडी की दोनों राष्ट्रीय गठबंधनों से समान दूरी बनाए रखने की नीति दीर्घकालिक है और यह आगे भी जारी रहेगी।

गौरतलब है कि बीजेडी ने ओडिशा में लंबे समय तक सत्ता में रहते हुए केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी से मुद्दे-दर-मुद्दे समर्थन लेने की रणनीति अपनाई थी, लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद पार्टी अब विपक्ष की भूमिका में है।

आगे क्या होगा

प्रसन्न आचार्य ने स्पष्ट किया कि बीजेडी एसआईआर से जुड़ी अपनी आपत्तियाँ लगातार उठाती रहेगी और चुनाव आयोग के समक्ष पारदर्शिता की माँग जारी रखेगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर कई विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं और चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता के लिए गंभीर चुनौती है। विडंबना यह है कि बीजेडी, जो स्वयं लंबे समय तक ओडिशा में सत्ता में रही और केंद्र से मुद्दे-दर-मुद्दे समर्थन लेती रही, अब उसी व्यवस्था पर सवाल उठा रही है — जो दर्शाता है कि विपक्ष में आने के बाद राजनीतिक दृष्टिकोण कैसे बदलता है। असली प्रश्न यह है कि क्या चुनाव आयोग एसआईआर के आँकड़े सार्वजनिक करेगा — कितने नाम हटाए गए, किस आधार पर, और क्या पुनर्विचार का अवसर दिया गया। पारदर्शिता के बिना ये आरोप न तो सिद्ध होंगे, न खारिज।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है, जिसमें अपात्र नाम हटाए जाते हैं और नए पात्र मतदाता जोड़े जाते हैं। बीजेडी सहित कई विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं और पारदर्शिता का अभाव है।
बीजेडी सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग क्यों कर रही है?
बीजेडी का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में एसआईआर की प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण तरीके से संचालित की जा रही है, जिससे मतदाताओं में संदेह पैदा हो रहा है। पार्टी नेता प्रसन्न आचार्य का कहना है कि यह लोकतांत्रिक मानदंडों के विरुद्ध है।
क्या बीजेडी इंडी गठबंधन के साथ मिलकर यह माँग उठा रही है?
नहीं। बीजेडी नेता प्रसन्न आचार्य ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी न इंडी गठबंधन का हिस्सा है और न एनडीए का। बीजेडी दोनों राष्ट्रीय गठबंधनों से समान दूरी बनाए रखने की नीति पर कायम है।
नवीन पटनायक का एसआईआर पर क्या रुख है?
बीजेडी अध्यक्ष एवं विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने शुरुआत से ही एसआईआर की प्रक्रिया पर पार्टी की आपत्ति सार्वजनिक रूप से व्यक्त की है। पार्टी के अनुसार यह रुख पहले दिन से अपरिवर्तित है और आगे भी जारी रहेगा।
एसआईआर विवाद का आम मतदाताओं पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि मतदाता सूची पुनरीक्षण में अनियमितताएँ हुई हैं, तो पात्र मतदाताओं के नाम हट सकते हैं, जिससे वे मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। बीजेडी का कहना है कि इस प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित किए बिना चुनावी निष्पक्षता पर सवाल बना रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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