25 सितंबर 2026
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एसआईआर विवाद: कांग्रेस का बेंगलुरु फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

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एसआईआर विवाद: कांग्रेस का बेंगलुरु फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

सारांश

कर्नाटक कांग्रेस एसआईआर विवाद में सड़क पर उतरने की तैयारी में है। बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन, फिर सभी जिलों में। तीन राज्यों में करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप और मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी की मांग — यह संघर्ष चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सीधा प्रहार है।

मुख्य बातें

केपीसीसी अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने 25 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में एसआईआर विरोधी प्रदर्शन की घोषणा की।
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की माँग की है।
आरोप है कि बिहार में 63 लाख , पश्चिम बंगाल में 91 लाख और कर्नाटक में 1.07 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए।
केपीसीसी के पास हटाए गए नामों से जुड़े 65,000 आवेदन हैं, जिनमें से कई पर हस्ताक्षर नहीं।
हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियाँ नज़रअंदाज़ की गईं।
चुनाव आयोग ने कहा है कि आंतरिक मतभेद संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) शनिवार, 27 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित करेगी। यह प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के विरोध में होगा, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग उठाई जाएगी। यह ऐलान केपीसीसी अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने 25 सितंबर 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया।

प्रदर्शन का कार्यक्रम और दूसरा चरण

बीके हरिप्रसाद ने बताया कि पहले चरण में फ्रीडम पार्क, बेंगलुरु में केंद्रित प्रदर्शन होगा और दूसरे चरण में कर्नाटक के सभी जिलों में इसी तरह के विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने लोकतंत्र में आस्था रखने वाले सभी राजनीतिक दलों को इस आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया।

हरिप्रसाद ने कहा कि चुनाव आयोग ने कांग्रेस की पूर्व में उठाई गई चिंताओं का उचित जवाब नहीं दिया, जिसके बाद सड़क पर उतरना पार्टी की मजबूरी बन गई।

आरोप: अन्य दो आयुक्तों की आपत्तियाँ नज़रअंदाज़

केपीसीसी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े निर्णय एकतरफा लिए गए, जबकि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पुनरीक्षण के दौरान कई बार आपत्ति दर्ज कराई थी। मीडिया रिपोर्टों के हवाले से उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने इन मतभेदों को खारिज करते हुए मतदाता सूची संशोधन के निर्णयों को आगे बढ़ाया। यह भी आरोप लगाया गया कि दोनों आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार कर फॉर्म 6 में संशोधन किया गया।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आयुक्तों के बीच की टिप्पणियाँ और मतभेद संस्था की आंतरिक विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा हैं, और निर्णय स्थापित संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।

मतदाता नाम हटाने के आँकड़े और प्रभावित वर्ग

हरिप्रसाद के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया के चलते बिहार में 63 लाख, पश्चिम बंगाल में 91 लाख और कर्नाटक में 1.07 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया का सबसे बुरा असर अल्पसंख्यक, दलित और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के मतदान अधिकारों पर पड़ेगा।

केपीसीसी अध्यक्ष ने बताया कि उनके पास हटाए गए नामों से संबंधित 65,000 आवेदन हैं, जिनमें से कई पर हस्ताक्षर भी नहीं हैं। उनका दावा है कि पार्टी की आंतरिक जाँच से पता चला है कि हटाए गए नामों का बड़ा हिस्सा अल्पसंख्यक और दलित समुदायों से है। उन्होंने बाबलेश्वर और हुबली-धारवाड़ को उन इलाकों के रूप में विशेष रूप से उद्धृत किया जहाँ नाम हटाने के प्रयास हुए।

भाजपा पर निशाना और स्वतंत्र समीक्षा की माँग

हरिप्रसाद ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'जब हम चुनाव आयोग से सवाल करते हैं तो आयोग को खुद जवाब देना चाहिए, लेकिन BJP नेता जवाब दे रहे हैं।' उनके अनुसार यह इस बात का प्रमाण है कि चुनाव आयोग स्वायत्त रूप से नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल के प्रभाव में काम कर रहा है।

केपीसीसी अध्यक्ष ने एसआईआर प्रक्रिया की व्यापक और स्वतंत्र समीक्षा की माँग की। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार की कार्रवाई संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर करने के समान है।

आगे क्या होगा

कर्नाटक कांग्रेस के इस प्रदर्शन पर राष्ट्रीय स्तर पर नज़र रहेगी, क्योंकि विपक्षी दल पहले से ही एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते रहे हैं। यह आंदोलन कर्नाटक से शुरू होकर अन्य राज्यों में फैल सकता है यदि कांग्रेस के दावों को समर्थन मिलता है। चुनाव आयोग की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि स्वतंत्र रूप से सत्यापित हों, तो यह महज़ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संरचनात्मक चिंता का विषय बनते हैं। विपक्ष की माँग जितनी तेज़ है, उतना ही ज़रूरी है कि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया की पारदर्शी व्याख्या दे — BJP के प्रवक्ताओं के ज़रिये नहीं, बल्कि सीधे। बिना स्वतंत्र ऑडिट के यह विवाद आगामी चुनावों की वैधता पर दीर्घकालिक सवाल खड़ा करता रहेगा।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची को अद्यतन करता है और अपात्र या फर्जी नाम हटाता है। विवाद इसलिए है क्योंकि कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बिहार, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में करोड़ों वैध मतदाताओं — विशेषकर अल्पसंख्यकों और दलितों — के नाम अनुचित तरीके से हटाए गए।
कर्नाटक कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग क्यों की?
केपीसीसी अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों — सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — की आपत्तियों को दरकिनार कर एकतरफा निर्णय लिए। पार्टी का मानना है कि इस तरह की कार्यप्रणाली चुनाव आयोग की संस्थागत गरिमा के खिलाफ है और इसीलिए उनका इस्तीफा और गिरफ्तारी आवश्यक है।
कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं?
कांग्रेस के अनुसार एसआईआर प्रक्रिया के चलते बिहार में 63 लाख, पश्चिम बंगाल में 91 लाख और कर्नाटक में 1.07 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। ये आँकड़े कांग्रेस द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
चुनाव आयोग का इन आरोपों पर क्या कहना है?
चुनाव आयोग ने पहले स्पष्ट किया है कि आयुक्तों के बीच आंतरिक टिप्पणियाँ और मतभेद संस्था की सामान्य विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा हैं और सभी निर्णय स्थापित संस्थागत प्रक्रिया के अनुसार लिए जाते हैं। कांग्रेस के ताज़ा आरोपों पर आयोग की कोई नई प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है।
कर्नाटक कांग्रेस का यह आंदोलन आगे कहाँ-कहाँ फैलेगा?
केपीसीसी अध्यक्ष हरिप्रसाद के अनुसार पहले चरण में बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन होगा। दूसरे चरण में कर्नाटक के सभी जिलों में इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कांग्रेस ने अन्य लोकतंत्र-समर्थक दलों को भी इस आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है।
राष्ट्र प्रेस
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