हैदराबाद में कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन: सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की माँग
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना की सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 28 सितंबर 2026 को हैदराबाद में बड़ा विरोध मार्च निकाला और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे व गिरफ्तारी की माँग की। पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियाँ की गई हैं, जिससे नागरिकों का मतदान अधिकार प्रभावित हुआ है।
प्रदर्शन का स्वरूप और मार्ग
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के राष्ट्रव्यापी विरोध आह्वान के अनुरूप तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के नेता और कार्यकर्ता नेकलेस रोड स्थित इंदिरा गांधी की प्रतिमा के पास एकत्रित हुए। वहाँ से प्रदर्शनकारी बीआरके भवन स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय तक रैली निकालते हुए पहुँचे। प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग का पुतला जलाया गया और 'वोट चोरी' तथा 'डेमोक्रेसी के दुश्मन' जैसे नारे लिखी तख्तियाँ लहराई गईं।
प्रदर्शनकारी नेताओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी सी. सुदर्शन रेड्डी से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें सीईसी ज्ञानेश कुमार से तत्काल पद छोड़ने की माँग दर्ज की गई।
प्रमुख नेताओं की उपस्थिति
प्रदर्शन में उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क, टीपीसीसी अध्यक्ष महेश कुमार गौड़, मंत्री पोन्नम प्रभाकर और श्रीधर बाबू, सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी और अनिल कुमार यादव समेत वरिष्ठ नेता शामिल हुए। भारतीय संविधान की प्रति हाथ में लिए विक्रमार्क ने सभी लोकतांत्रिक शक्तियों से कांग्रेस की इस मुहिम में साथ आने की अपील की।
नेताओं के दावे और आरोप
विक्रमार्क ने दावा किया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी वर्षों से कथित 'वोट चोरी' के प्रति आगाह करते आए हैं और एसआईआर की घटनाओं ने उनकी बात को सही साबित किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने भी स्वीकार किया है कि एसआईआर के नाम पर नागरिकों के वोट हटाए गए। विक्रमार्क ने कहा, "लोकतंत्र की सबसे अहम ताकत मतदान का अधिकार है और अगर उसी अधिकार को नुकसान पहुँचाया जाता है तो देश में लोकतंत्र की स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।"
टीपीसीसी अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने आरोप लगाया कि भारत निर्वाचन आयोग, जो एक स्वायत्त संस्था के रूप में कार्य करती है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों का औजार बन गई है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई। गौरतलब है कि ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और चुनाव आयोग की तरफ से इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं थी।
सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान की माँग
पूर्व मंत्री दानम नागेंद्र ने माँग की कि सर्वोच्च न्यायालय मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों से जुड़े मामले का स्वत: संज्ञान ले। यह ऐसे समय में आया है जब एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियाँ देशभर में तेज हो रही हैं और कई राज्यों में कांग्रेस ने इसी मुद्दे पर सड़क पर उतरने का फैसला किया है।
आगे की राह
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि जब तक हर नागरिक के मतदान के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, पार्टी का यह आंदोलन जारी रहेगा। विक्रमार्क ने संविधान और लोकतंत्र में आस्था रखने वाले सभी राजनीतिक दलों से मतभेद भुलाकर साथ आने की अपील की। अब सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में कोई कदम उठाता है या नहीं।