27 सितंबर 2026
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नागालैंड कांग्रेस का कोहिमा में प्रदर्शन, इस्तीफे की मांग

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नागालैंड कांग्रेस का कोहिमा में प्रदर्शन, इस्तीफे की मांग

सारांश

नागालैंड कांग्रेस ने कोहिमा में सड़क पर उतरकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँगा। एआईसीसी के देशव्यापी आह्वान के तहत हुए इस प्रदर्शन में मतदाता सूची एसआईआर विवाद की स्वतंत्र जाँच की माँग उठी — जो चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर बढ़ते विपक्षी दबाव की बानगी है।

मुख्य बातें

नागालैंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एनपीसीसी) ने 25 सितंबर 2026 को कोहिमा के चुनाव सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद एस.
सुपोंगमेरेन जमीर ने किया।
मुख्य माँग — मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा या पद से हटाया जाना।
मतदाता सूचियों के एसआईआर से जुड़े निर्णयों की स्वतंत्र जाँच और उचित कानूनी कार्रवाई की माँग।
यह प्रदर्शन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के देशव्यापी विरोध-आह्वान का हिस्सा रहा।

नागालैंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एनपीसीसी) ने 25 सितंबर 2026 को कोहिमा स्थित चुनाव सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे अथवा उन्हें पद से हटाए जाने की माँग की। साथ ही, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े विवाद और उस दौरान लिए गए निर्णयों की स्वतंत्र जाँच कराने की भी माँग उठाई गई।

प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

यह विरोध-प्रदर्शन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के उस देशव्यापी आह्वान का हिस्सा था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध पूरे देश में प्रदर्शन करने का निर्देश दिया गया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं लोकसभा सांसद एस. सुपोंगमेरेन जमीर के नेतृत्व में एनपीसीसी कार्यकर्ताओं ने कोहिमा के चुनाव सचिवालय के समक्ष प्रदर्शन किया। पार्टी ने 26 सितंबर 2026 को इस संबंध में आधिकारिक प्रेस वक्तव्य जारी किया।

जमीर के मुख्य आरोप और बयान

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जमीर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों के एसआईआर को लेकर चल रहे विवाद पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 'वोट देने का अधिकार प्रत्येक भारतीय नागरिक के सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक अधिकारों में से एक है।'

जमीर ने यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा की जिम्मेदारी सँभालने वाली संस्था को इस प्रकार कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे उसकी स्वतंत्रता, पारदर्शिता या निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न हो। उन्होंने रेखांकित किया कि 'वोट जनता का है और किसी व्यक्ति, प्राधिकरण या संस्था को जनता के जनादेश को कमज़ोर करने का अधिकार नहीं है।'

एनपीसीसी की प्रमुख माँगें

एनपीसीसी ने तीन प्रमुख माँगें सामने रखी हैं — पहली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा अथवा उन्हें पद से हटाया जाए; दूसरी, मतदाता सूचियों से जुड़े निर्णयों पर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र जाँच हो और निष्कर्षों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए; तीसरी, संबंधित मतदाता सूची परिवर्तनों की व्यापक एवं स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।

पार्टी ने यह भी कहा कि यदि जाँच में कोई व्यक्ति जिम्मेदार पाया जाता है, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। एनपीसीसी ने मतदाता सूचियों में कथित संशोधन से जुड़े निर्णयों पर चुनाव आयोग के भीतर कथित तौर पर जताई गई आपत्तियों से संबंधित रिपोर्टों पर भी सवाल उठाए।

लोकतंत्र पर व्यापक असर

यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब देशभर में मतदाता सूचियों के एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों और नागरिक समाज के बीच बहस तेज हो गई है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी स्वायत्तता पर उठते सवाल सीधे लोकतांत्रिक विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं। जमीर ने कहा कि 'चुनावी व्यवस्था पर नागरिकों का भरोसा लोकतंत्र के लिए बेहद ज़रूरी है और यदि इस प्रक्रिया में लोगों का विश्वास कमज़ोर होता है तो इसका सीधा असर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ता है।'

आगे की राह

एनपीसीसी ने स्पष्ट किया है कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी व्यवस्था की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और जब भी नागरिकों के संवैधानिक या चुनावी अधिकारों पर प्रश्न उठेंगे, पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ उठाती रहेगी। इस विवाद पर चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एआईसीसी की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें चुनाव आयोग को सीधे निशाने पर लिया जा रहा है — खासकर मतदाता सूची एसआईआर विवाद के बाद। विपक्ष का यह कदम संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता के सवाल को राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में लाने की कोशिश है, जो आगामी चुनावी माहौल में महत्वपूर्ण हो सकती है। हालाँकि, माँगों की विश्वसनीयता तब तक सीमित रहेगी जब तक कांग्रेस उन कथित आपत्तियों और रिपोर्टों के ठोस साक्ष्य सार्वजनिक नहीं करती, जिनका वह उल्लेख करती है। चुनाव आयोग की चुप्पी इस बहस को और लंबा खींचेगी।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागालैंड कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन क्यों किया?
एनपीसीसी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े विवाद और उससे संबंधित निर्णयों पर आपत्ति जताते हुए यह प्रदर्शन किया। पार्टी का आरोप है कि इन निर्णयों से नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
यह प्रदर्शन कब और कहाँ हुआ?
यह प्रदर्शन 25 सितंबर 2026 को कोहिमा स्थित चुनाव सचिवालय के बाहर हुआ। इसका नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं लोकसभा सांसद एस. सुपोंगमेरेन जमीर ने किया।
एनपीसीसी की मुख्य माँगें क्या हैं?
एनपीसीसी ने तीन माँगें रखी हैं — मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा या उन्हें पद से हटाया जाना, मतदाता सूचियों से जुड़े निर्णयों की स्वतंत्र जाँच और दोषियों की जवाबदेही, तथा संबंधित मतदाता सूची परिवर्तनों की व्यापक और स्वतंत्र समीक्षा।
क्या यह प्रदर्शन केवल नागालैंड तक सीमित है?
नहीं, यह प्रदर्शन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के उस देशव्यापी आह्वान का हिस्सा है जिसमें पूरे देश में मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध विरोध-प्रदर्शन करने का निर्देश दिया गया था। नागालैंड कांग्रेस ने इसी राष्ट्रीय अभियान के तहत कोहिमा में प्रदर्शन किया।
मतदाता सूची एसआईआर विवाद क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, मतदाता सूचियों की जाँच और अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है। कांग्रेस और कुछ विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में लिए गए कुछ निर्णय पक्षपातपूर्ण हो सकते हैं और इससे नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं; हालाँकि चुनाव आयोग ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राष्ट्र प्रेस
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