सीईसी ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा, एसआईआर रद्द कर हो नई मतदाता सूची: कर्नाटक सीएम शिवकुमार
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे की माँग की और चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) प्रक्रिया को रद्द कर चुनावी डेटा का नए सिरे से संशोधन कराने का आह्वान किया। बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसे किसी भी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं कुचला जा सकता।
मुख्य आरोप और माँगें
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि आम नागरिकों के मतदान अधिकारों का राजनीतिक मकसद के लिए दुरुपयोग करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, 'वोट देने का अधिकार जीने का अधिकार है। कोई भी उस अधिकार को दबा नहीं सकता।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाई है।
सीएम ने माँग की कि मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया तत्काल रद्द हो और एक पारदर्शी नई प्रक्रिया शुरू की जाए। उन्होंने कहा, 'हम कांग्रेस के वोटों या भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वोटों की बात नहीं कर रहे। हर नागरिक का यह मौलिक अधिकार है।'
चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल
चुनाव आयोग के सदस्यों के बीच कथित मतभेदों का उल्लेख करते हुए शिवकुमार ने दावा किया कि आयोग को दी गई संस्थागत स्वायत्तता का दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा, 'जब अधिकतर सदस्य किसी राय से सहमत न हों, तब एकतरफा निर्णय नहीं थोपा जा सकता। नैतिक आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त को स्वयं इस्तीफा दे देना चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कई विपक्षी दलों में व्यापक असंतोष देखा जा रहा है।
वंचित वर्गों पर असर की चिंता
मतदाता सूची संशोधन में प्रयुक्त फॉर्म 6, 7 और 8 का ज़िक्र करते हुए सीएम ने आरोप लगाया कि मौजूदा तरीका समाज के अनपढ़ और वंचित तबकों पर विशेष रूप से प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। उनका कहना था कि यह महज़ राय का मामला नहीं, बल्कि एक संवैधानिक सवाल है। गौरतलब है कि ऐसी आशंकाएँ पहले भी विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची से नामों के बड़े पैमाने पर हटाए जाने के संदर्भ में उठती रही हैं।
बहु-राज्यीय संदर्भ
शिवकुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल, बिहार और कई अन्य राज्यों में इसी तरह की कोशिशें की गई हैं और अब कर्नाटक समेत अन्य राज्यों में भी ऐसा होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक दिन पहले चुनाव आयोग से अधिक समय देने का अनुरोध भी किया था।
संसद में बहस और आगे की राह
सीएम ने इस मुद्दे पर संसद सहित बड़े राष्ट्रीय मंचों पर खुली बहस की माँग की। उन्होंने चुनाव आयोग के नाम पर विभिन्न राज्यों में अधिकारियों पर किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी का विरोध किया। उनका कहना था कि हर मतदाता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए स्थिति की व्यापक समीक्षा और चुनावी डेटा की पुनः जाँच अनिवार्य है। यह मामला अब राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श का केंद्र बनता जा रहा है और आने वाले दिनों में संसदीय चर्चा की माँग तेज़ हो सकती है।