24 सितंबर 2026
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सीईसी ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा, एसआईआर रद्द कर हो नई मतदाता सूची: कर्नाटक सीएम शिवकुमार

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सीईसी ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा, एसआईआर रद्द कर हो नई मतदाता सूची: कर्नाटक सीएम शिवकुमार

सारांश

कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग करते हुए एसआईआर प्रक्रिया को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। उनका आरोप है कि वंचित वर्गों के मतदान अधिकारों का राजनीतिक दुरुपयोग हो रहा है और चुनावी डेटा का नए सिरे से निष्पक्ष संशोधन ज़रूरी है।

मुख्य बातें

शिवकुमार ने 24 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे की माँग की।
चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) प्रक्रिया को रद्द कर नई मतदाता सूची बनाने का आह्वान किया गया।
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि फॉर्म 6, 7 और 8 की मौजूदा प्रक्रिया अनपढ़ और वंचित वर्गों के मतदान अधिकारों पर विशेष रूप से प्रतिकूल असर डाल सकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाई है।
पश्चिम बंगाल और बिहार सहित अन्य राज्यों में भी ऐसी कोशिशें होने का आरोप; संसद में बहस की माँग।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे की माँग की और चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) प्रक्रिया को रद्द कर चुनावी डेटा का नए सिरे से संशोधन कराने का आह्वान किया। बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसे किसी भी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं कुचला जा सकता।

मुख्य आरोप और माँगें

शिवकुमार ने आरोप लगाया कि आम नागरिकों के मतदान अधिकारों का राजनीतिक मकसद के लिए दुरुपयोग करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, 'वोट देने का अधिकार जीने का अधिकार है। कोई भी उस अधिकार को दबा नहीं सकता।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाई है।

सीएम ने माँग की कि मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया तत्काल रद्द हो और एक पारदर्शी नई प्रक्रिया शुरू की जाए। उन्होंने कहा, 'हम कांग्रेस के वोटों या भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वोटों की बात नहीं कर रहे। हर नागरिक का यह मौलिक अधिकार है।'

चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल

चुनाव आयोग के सदस्यों के बीच कथित मतभेदों का उल्लेख करते हुए शिवकुमार ने दावा किया कि आयोग को दी गई संस्थागत स्वायत्तता का दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा, 'जब अधिकतर सदस्य किसी राय से सहमत न हों, तब एकतरफा निर्णय नहीं थोपा जा सकता। नैतिक आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त को स्वयं इस्तीफा दे देना चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कई विपक्षी दलों में व्यापक असंतोष देखा जा रहा है।

वंचित वर्गों पर असर की चिंता

मतदाता सूची संशोधन में प्रयुक्त फॉर्म 6, 7 और 8 का ज़िक्र करते हुए सीएम ने आरोप लगाया कि मौजूदा तरीका समाज के अनपढ़ और वंचित तबकों पर विशेष रूप से प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। उनका कहना था कि यह महज़ राय का मामला नहीं, बल्कि एक संवैधानिक सवाल है। गौरतलब है कि ऐसी आशंकाएँ पहले भी विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची से नामों के बड़े पैमाने पर हटाए जाने के संदर्भ में उठती रही हैं।

बहु-राज्यीय संदर्भ

शिवकुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल, बिहार और कई अन्य राज्यों में इसी तरह की कोशिशें की गई हैं और अब कर्नाटक समेत अन्य राज्यों में भी ऐसा होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक दिन पहले चुनाव आयोग से अधिक समय देने का अनुरोध भी किया था।

संसद में बहस और आगे की राह

सीएम ने इस मुद्दे पर संसद सहित बड़े राष्ट्रीय मंचों पर खुली बहस की माँग की। उन्होंने चुनाव आयोग के नाम पर विभिन्न राज्यों में अधिकारियों पर किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी का विरोध किया। उनका कहना था कि हर मतदाता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए स्थिति की व्यापक समीक्षा और चुनावी डेटा की पुनः जाँच अनिवार्य है। यह मामला अब राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श का केंद्र बनता जा रहा है और आने वाले दिनों में संसदीय चर्चा की माँग तेज़ हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली प्रश्न यह है कि क्या चुनाव आयोग के भीतर निर्णय-प्रक्रिया में बहुमत की राय का सम्मान हो रहा है। यदि सदस्यों के बीच मतभेद की बात सच है, तो यह आयोग की आंतरिक जवाबदेही का संकट भी है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम शिवकुमार ने सीईसी से इस्तीफे की माँग क्यों की?
शिवकुमार का आरोप है कि चुनाव आयोग के अधिकांश सदस्यों की सहमति के बिना एकतरफा निर्णय थोपे जा रहे हैं और मतदान अधिकारों का राजनीतिक दुरुपयोग हो रहा है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में मुख्य चुनाव आयुक्त को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
एसआईआर चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की प्रक्रिया है, जिसमें फॉर्म 6, 7 और 8 के ज़रिये नामों को जोड़ा, हटाया या संशोधित किया जाता है। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया अनपढ़ और वंचित मतदाताओं को सूची से बाहर करने का साधन बन सकती है।
क्या यह विवाद सिर्फ कर्नाटक तक सीमित है?
नहीं। सीएम शिवकुमार ने पश्चिम बंगाल और बिहार सहित कई राज्यों में इसी तरह की कोशिशें होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अब कर्नाटक समेत अन्य राज्यों में भी यही स्थिति पैदा की जा रही है।
कांग्रेस नेतृत्व ने इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया है?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाई है। शिवकुमार ने इसे पार्टी की व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया।
शिवकुमार ने आगे के लिए क्या माँगें रखी हैं?
उन्होंने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — सीईसी का तत्काल इस्तीफा, मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करना और चुनावी डेटा का नए सिरे से पारदर्शी संशोधन। इसके साथ ही उन्होंने संसद में इस मुद्दे पर खुली बहस की माँग भी की है।
राष्ट्र प्रेस
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