एसआईआर पर चुनाव आयोग के निर्देश का स्वागत: डीके शिवकुमार बोले — 'यह देश के मतदाताओं की जीत'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 2 अक्टूबर 2026 को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान छूट गए पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा जारी निर्देश का स्वागत किया। उन्होंने इसे किसी एक दल या सरकार की नहीं, बल्कि कर्नाटक और पूरे देश के मतदाताओं की जीत करार दिया।
चुनाव आयोग का निर्देश क्या है
भारत निर्वाचन आयोग ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में — जहाँ एसआईआर की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है — छूट गए और पहली बार पात्र हुए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का आदेश दिया है। आयोग ने नियमित मतदाता सूची अद्यतन प्रक्रिया के माध्यम से भी नामांकन की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि फॉर्म-6 और फॉर्म-7 से संबंधित निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ), मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा सुनिश्चित किया जाए। पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के नामांकन हेतु विशेष शिविर भी आयोजित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
बेंगलुरु में विधान सौध के निकट पत्रकारों से बातचीत में शिवकुमार ने कहा, 'हम निर्वाचन आयोग के आदेश का स्वागत करते हैं। यह केवल कांग्रेस और सरकार की जीत नहीं है। यह कर्नाटक और पूरे देश के मतदाताओं की जीत है तथा पात्र मतदाताओं को उनके अधिकारों से वंचित करने के प्रयासों के खिलाफ जीत है।'
उन्होंने कहा कि यह निर्देश गुरुवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद आया है। शिवकुमार ने यह भी कहा कि मतदान का अधिकार लोगों के सम्मान के साथ जीने के अधिकार से अभिन्न रूप से जुड़ा है।
भाजपा पर आरोप और विवाद की पृष्ठभूमि
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रतिनिधियों ने समाज के कमजोर वर्गों — दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं — के नाम हटाने के लिए आवेदन दिए थे। उन्होंने इसे 'शर्मनाक' और 'आपराधिक साजिश' बताया तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की माँग की।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा नेताओं ने खुद करीब 25 हज़ार आवेदन जमा करने की बात स्वीकार की है। हालाँकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि उनके (कांग्रेस के) खिलाफ भी कोई शिकायत और गलत काम के सबूत हों, तो उसकी भी जाँच होनी चाहिए।
गौरतलब है कि कर्नाटक में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन जमा किए जाने को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा है। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार ने गुरुवार के प्रदर्शन के बाद चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया था कि जाँच प्रक्रिया में जानबूझकर गलत जानकारी देने वाले आवेदकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए।
कमजोर वर्गों की भागीदारी पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बूथ स्तर पर शिविर लगाए जाएं, ताकि रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, बेघर और अन्य कमजोर वर्गों को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की सुविधा मिल सके। उन्होंने मीडिया से इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाने की अपील की और नागरिकों के मतदान अधिकार की रक्षा पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा की माँग की।
शिवकुमार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के खिलाफ अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस शुरुआत से इस मुद्दे को उठाती रही है और नागरिक समूहों व कार्यकर्ताओं ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में जाकर आँकड़े जुटाए और रिपोर्ट सौंपीं।
आगे क्या होगा
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत अब राज्यभर में विशेष नामांकन शिविर आयोजित किए जाएंगे और कथित रूप से गलत आवेदन जमा करने वालों के खिलाफ जाँच प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब देशभर में एसआईआर प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है।