चुनाव आयोग BJP का 'वोट चोरी में भागीदार': कर्नाटक CM शिवकुमार का बड़ा आरोप, राष्ट्रपति से भंग करने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 26 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित एक बड़े विरोध प्रदर्शन में भारतीय निर्वाचन आयोग पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ मिलकर 'वोट चोरी में भागीदार' होने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने राष्ट्रपति से चुनाव आयोग को भंग करने और मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) को तत्काल रद्द करने की माँग की।
विरोध प्रदर्शन और मुख्य आरोप
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में शिवकुमार ने कहा कि चुनाव आयोग BJP की 'कठपुतली' बन गया है और गरीब मतदाताओं तथा प्रशासन की आलोचना करने वालों के नाम मतदाता सूची से निशाना बनाकर हटाए जा रहे हैं। उनके शब्दों में, 'वे BJP के साथ मिलकर मत चोरी में भागीदार बन गए हैं।'
शिवकुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विशेष रूप से निशाना साधते हुए कहा, 'आप मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं, बल्कि मुख्य चयन आयुक्त हैं।' उन्होंने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और अवैध रूप से कराए गए चुनावों को रद्द करने की भी माँग की।
SIR प्रक्रिया पर गंभीर आरोप
शिवकुमार के अनुसार, कर्नाटक की जनसंख्या लगभग सात करोड़ है और राज्य में 5.54 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के कारण यह संख्या घटकर 4.46 करोड़ रह गई है और 30-40 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।
उन्होंने बेंगलुरु केंद्रीय लोकसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए दावा किया कि चुनाव आयोग के अनुसार कांग्रेस उम्मीदवार मंसूर खान 31,000 वोटों के अंतर से हारे थे, जबकि SIR प्रक्रिया के ज़रिए 12 लाख वोटों की कटौती हुई है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि महादेवपुरा में तीन लाख वोट गायब हो गए हैं।
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद
शिवकुमार ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नियुक्त सदस्यों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के निर्णयों का विरोध किया और अपनी अंतरात्मा के आधार पर काम किया। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्षी दलों की आलोचना पहले से ही तीखी हो चुकी है।
संसद सत्र और संवैधानिक मुद्दे
शिवकुमार ने केंद्र सरकार से संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस मुद्दे पर 'जल्द से जल्द' चर्चा करने की माँग की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि 'मतदान का अधिकार प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है — यह हमारे संविधान द्वारा लोकतांत्रिक व्यवस्था के माध्यम से नागरिकों को दिया गया सबसे बड़ा अवसर है।' साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि 'सत्ता का यह जुनून हमेशा नहीं टिकेगा।'
गौरतलब है कि SIR प्रक्रिया को लेकर कई राज्यों में विपक्षी दलों ने एकजुट होकर आपत्ति जताई है। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार का यह विरोध प्रदर्शन इस मुद्दे पर अब तक का सबसे तीखा और संगठित राजनीतिक प्रदर्शन माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया निर्णायक होगी।