6 जुलाई 2026
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एसआईआर विवाद: सीएम शिवकुमार का आरोप — भाजपा अल्पसंख्यकों और गरीबों का वोटिंग अधिकार छीनने की साजिश में

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एसआईआर विवाद: सीएम शिवकुमार का आरोप — भाजपा अल्पसंख्यकों और गरीबों का वोटिंग अधिकार छीनने की साजिश में

सारांश

कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार ने BJP पर एसआईआर के ज़रिए अल्पसंख्यकों और गरीबों का मताधिकार छीनने का आरोप लगाया। सरकार ने प्रक्रिया पर कानूनी आपत्ति बरकरार रखते हुए चुनाव आयोग को सहयोग जारी रखने और हर बूथ पर मदद केंद्र खोलने की बात कही।

मुख्य बातें

सीएम डीके शिवकुमार ने 6 जुलाई को BJP पर आरोप लगाया कि वह एसआईआर के ज़रिए अल्पसंख्यकों और गरीबों को मताधिकार से वंचित करने की साजिश रच रही है।
कर्नाटक सरकार ने एसआईआर प्रक्रिया की समय-सीमा को अदालत में चुनौती दी है और कानूनी लड़ाई जारी रखने की घोषणा की।
राज्य में लगभग 4.5 करोड़ लोगों के जाति प्रमाण पत्र अब ऑनलाइन डाउनलोड किए जा सकते हैं।
पहली बार हर पोलिंग बूथ पर मदद केंद्र स्थापित किए गए हैं ताकि मतदाताओं को एसआईआर में सहायता मिले।
शिवकुमार ने BJP पर पलटवार करते हुए पूछा कि सत्ता में रहते हुए उसने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस क्यों नहीं भेजा।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार, 6 जुलाई को बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए विपक्ष पर सीधा आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) मतदाता सूची के चल रहे 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) का इस्तेमाल गरीब और अल्पसंख्यक समुदायों को उनके मताधिकार से वंचित करने के लिए कर रही है। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार एसआईआर की कुछ प्रक्रियाओं से असहमत होने के बावजूद चुनाव आयोग को पूरा सहयोग दे रही है, ताकि कोई भी योग्य मतदाता अपने मताधिकार से न चूके।

मुख्य घटनाक्रम

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी और प्रह्लाद जोशी द्वारा एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी को शिकायत सौंपे जाने के सवाल पर शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही इस प्रक्रिया के कुछ पहलुओं को अदालत में चुनौती दे चुकी है और संशोधन के लिए तय समय-सीमा के खिलाफ कानूनी कदम उठाती रहेगी।

उन्होंने कहा, "एसआईआर प्रक्रिया को लेकर हमारे मतभेद हैं और हमने अदालत के सामने अपनी दलीलें पेश की हैं। हम समय-सीमा से भी खुश नहीं हैं और इसे कानूनी रूप से चुनौती देंगे। हालांकि, हमारी सरकार की प्राथमिकता हर नागरिक के वोटिंग अधिकारों की रक्षा करना है, इसीलिए हम चुनाव आयोग के साथ सहयोग कर रहे हैं।"

विपक्ष पर पलटवार

शिवकुमार ने कहा कि चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को बूथ लेवल एजेंट (BLA-2) नियुक्त करने की अनुमति दी थी और कांग्रेस, BJP तथा जनता दल (सेक्युलर) — तीनों ने अपने प्रतिनिधि नियुक्त किए हैं। उन्होंने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा, "विपक्ष डरा हुआ है, क्योंकि सरकार लोगों में जागरूकता फैला रही है। वे खुद चुनाव आयोग पर अविश्वास जता रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि इस प्रक्रिया को रद्द कर दिया जाए। यह फैसला चुनाव आयोग को करना है।"

अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के आरोपों को खारिज करते हुए शिवकुमार ने BJP पर पलटवार किया। उन्होंने पूछा, "वे अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बारे में बात करते रहते हैं। अगर वे सत्ता में थे तो उन्होंने उन्हें तब वापस क्यों नहीं भेजा? उन्हें किसने रोका था?"

सरकार की प्रतिक्रिया और सहयोग

शिवकुमार ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कर्नाटक ने चुनाव आयोग को जितना सहयोग दिया है, उतना किसी अन्य राज्य सरकार ने नहीं दिया। उन्होंने बताया कि कर्नाटक में लगभग 4.5 करोड़ लोगों के पास जाति प्रमाण पत्र हैं, जिन्हें अब ऑनलाइन डाउनलोड किया जा सकता है।

सरकार ने डिप्टी तहसीलदार को निवास प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार दिया है और नागरिकों को पुराने चुनावी रिकॉर्ड डाउनलोड करने की सुविधा भी दी है, क्योंकि बहुत कम लोगों के पास 2002 के दस्तावेज उपलब्ध होंगे।

आम जनता पर असर

शिवकुमार ने बताया कि पहली बार हर पोलिंग बूथ पर मदद केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि मतदाताओं को एसआईआर प्रक्रिया में आवश्यक सहायता मिल सके। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार लोगों से सिर्फ अपने वोटिंग अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह कर रही है। हम दस्तावेज पाने में मदद कर रहे हैं, ताकि कोई भी असली वोटर छूट न जाए।"

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब एसआईआर प्रक्रिया को लेकर देशभर में राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कर्नाटक सरकार ने संकेत दिया है कि वह समय-सीमा के मुद्दे पर कानूनी लड़ाई जारी रखेगी, जबकि साथ ही मतदाताओं को दस्तावेज जुटाने में मदद करने की प्रक्रिया भी चलती रहेगी। गौरतलब है कि यह मामला आगामी चुनावों की दृष्टि से राज्य की राजनीति में एक निर्णायक मुद्दा बनता दिख रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ एक विरोधाभास भी है — सरकार उसी प्रक्रिया में सहयोग कर रही है जिसे वह अदालत में चुनौती दे रही है। यह दोहरी रणनीति — कानूनी विरोध और ज़मीनी सहयोग — दर्शाती है कि कांग्रेस एसआईआर को एक चुनावी मुद्दे के रूप में भुनाना चाहती है, न कि केवल प्रशासनिक चिंता के रूप में। असली सवाल यह है कि क्या मदद केंद्र और ऑनलाइन दस्तावेज़ीकरण की सुविधा उन वंचित मतदाताओं तक वास्तव में पहुँच पाएगी जिनके पास डिजिटल पहुँच सीमित है। बांग्लादेशी प्रवासी वाला पलटवार BJP की आख्यान को कमज़ोर करने की कोशिश है, लेकिन यह मूल एसआईआर विवाद से ध्यान भटकाने का जोखिम भी उठाता है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और यह विवादास्पद क्यों है?
एसआईआर यानी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है जिसमें मतदाताओं को अपनी पात्रता के दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होते हैं। कर्नाटक में इस प्रक्रिया की समय-सीमा और कार्यप्रणाली को लेकर राज्य सरकार और विपक्षी दलों के बीच तीखा विवाद खड़ा हो गया है।
सीएम शिवकुमार ने BJP पर क्या आरोप लगाए हैं?
सीएम डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया है कि BJP एसआईआर प्रक्रिया का इस्तेमाल गरीब और अल्पसंख्यक समुदायों को उनके मताधिकार से वंचित करने के लिए कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष खुद चुनाव आयोग पर अविश्वास जता रहा है और प्रक्रिया रद्द करने की मांग कर रहा है।
कर्नाटक सरकार एसआईआर में मतदाताओं की मदद कैसे कर रही है?
सरकार ने पहली बार हर पोलिंग बूथ पर मदद केंद्र स्थापित किए हैं। इसके अलावा, लगभग 4.5 करोड़ जाति प्रमाण पत्र ऑनलाइन डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराए गए हैं और डिप्टी तहसीलदार को निवास प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार दिया गया है।
केंद्रीय मंत्रियों ने एसआईआर पर क्या शिकायत की है?
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी और प्रह्लाद जोशी ने एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी को शिकायत सौंपी है। हालांकि, सीएम शिवकुमार ने इन शिकायतों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।
कर्नाटक सरकार एसआईआर को अदालत में किस आधार पर चुनौती दे रही है?
कर्नाटक सरकार ने एसआईआर की समय-सीमा और प्रक्रिया के कुछ पहलुओं को अदालत में चुनौती दी है। सीएम शिवकुमार के अनुसार, सरकार इस समय-सीमा से संतुष्ट नहीं है और कानूनी उपाय जारी रखेगी, साथ ही चुनाव आयोग के साथ सहयोग भी बनाए रखेगी।
राष्ट्र प्रेस
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