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जयशंकर की मनामा में बहरीन के विदेश मंत्री से मुलाकात, द्विपक्षीय सहयोग और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा

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जयशंकर की मनामा में बहरीन के विदेश मंत्री से मुलाकात, द्विपक्षीय सहयोग और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर का मनामा दौरा महज़ शिष्टाचार भेंट नहीं — यह पश्चिम एशिया में उबलते संकट के बीच भारत की सक्रिय खाड़ी कूटनीति का हिस्सा है। 3,15,000 भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों दाँव पर हैं।

मुख्य बातें

जयशंकर ने मनामा में बहरीन के विदेश मंत्री डॉ.
अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जयानी से मुलाकात की।
बैठक में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने और पश्चिम एशिया के क्षेत्रीय हालात पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
जयशंकर ने बहरीन में रह रहे लगभग 3,15,000 भारतीय नागरिकों की भलाई के लिए बहरीन नेतृत्व का आभार जताया।
यह छह देशों के दौरे का दूसरा पड़ाव है; इससे पहले कतर की यात्रा हुई, आगे कुवैत, ओमान, अमेरिका और ब्रुसेल्स जाएंगे।
2 मार्च 2025 को PM मोदी ने बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा से फोन पर बात कर बहरीन पर हुए हमलों की निंदा की थी।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 7 जुलाई 2025 को मनामा में बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जयानी से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की। यह बैठक पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच हुई, जो भारत की खाड़ी नीति के लिहाज़ से विशेष महत्व रखती है।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक के दौरान जयशंकर ने बहरीन नेतृत्व का बहरीन में रह रहे लगभग 3,15,000 भारतीय नागरिकों की भलाई सुनिश्चित करने के लिए आभार जताया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'आज मनामा में बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जयानी से मिलकर खुशी हुई। भारतीय समुदाय की भलाई सुनिश्चित करने के लिए गहरा आभार व्यक्त किया। हमने अपने द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की और क्षेत्र में चल रहे हालात पर विचारों का आदान-प्रदान किया।'

जयशंकर कतर की यात्रा पूरी करने के बाद बहरीन पहुँचे। दोहा में उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से मुलाकात की और वहाँ बसे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी संवाद किया।

छह देशों के दौरे का अहम पड़ाव

बहरीन इस यात्रा का दूसरा पड़ाव है। बहरीन के बाद जयशंकर कुवैत, ओमान, अमेरिका और ब्रुसेल्स की यात्रा करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक उथल-पुथल चरम पर है और भारत अपने प्रवासी समुदाय की सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।

पश्चिम एशिया संघर्ष और भारत का रुख

गौरतलब है कि फरवरी 2025 में अमेरिका और इजरायल ने ईरान की मिसाइल क्षमता और सैन्य ढाँचे को कमज़ोर करने के लिए संयुक्त हमले किए थे। शुरुआती हमलों में ईरान के कुछ वरिष्ठ अधिकारी मारे गए, जिसके बाद ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमलों से जवाबी कार्रवाई की और खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को निशाना बनाया। इसी संदर्भ में 2 मार्च 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा से फोन पर बातचीत की थी और बहरीन पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा था, 'बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा से एक उपयोगी टेलीफोन बातचीत हुई। भारत बहरीन पर हुए हमलों की निंदा करता है और इस कठिन समय में उसके लोगों के साथ खड़ा है। मैं वहाँ रह रहे भारतीय समुदाय को दिए जा रहे मजबूत समर्थन के लिए आभार व्यक्त करता हूँ।'

भारत-बहरीन संबंधों की पृष्ठभूमि

भारत और बहरीन के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और लोगों के आपसी संपर्कों पर आधारित दीर्घकालिक संबंध रहे हैं। बहरीन में लगभग 3,15,000 भारतीय नागरिक रहते हैं, जो वहाँ की कुल आबादी (लगभग 15 लाख) का एक बड़ा हिस्सा हैं। यह प्रवासी समुदाय दोनों देशों के संबंधों की नींव का अहम हिस्सा है।

आगे की राह

जयशंकर की यह यात्रा संकेत देती है कि भारत खाड़ी देशों के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक जुड़ाव को नई ऊँचाई देने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले हफ्तों में कुवैत और ओमान दौरे से यह स्पष्ट होगा कि भारत पश्चिम एशिया में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को किस दिशा में ले जाना चाहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सक्रिय कूटनीतिक भागीदार बनना चाहता है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि भारत अभी भी संघर्ष में किसी एक पक्ष के साथ खड़ा होने से बचता है, जिससे उसकी मध्यस्थ भूमिका सीमित रहती है। असली कसौटी यह होगी कि क्या ये बैठकें ठोस रक्षा, ऊर्जा या व्यापार समझौतों में तब्दील होती हैं, या केवल राजनयिक शिष्टाचार तक सिमटी रहती हैं।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर ने बहरीन में किससे मुलाकात की और क्या चर्चा हुई?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मनामा में बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जयानी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत करने और पश्चिम एशिया में जारी क्षेत्रीय हालात पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
जयशंकर का यह दौरा कितने देशों का है और कहाँ-कहाँ जाएंगे?
यह छह देशों का दौरा है। कतर के बाद बहरीन दूसरा पड़ाव है। इसके बाद वे कुवैत, ओमान, अमेरिका और ब्रुसेल्स जाएंगे।
बहरीन में कितने भारतीय नागरिक रहते हैं?
बहरीन में लगभग 3,15,000 भारतीय नागरिक रहते हैं, जो वहाँ की कुल आबादी (लगभग 15 लाख) का एक बड़ा हिस्सा हैं। यह प्रवासी समुदाय भारत-बहरीन संबंधों का अहम आधार है।
PM मोदी ने बहरीन के राजा से कब और क्यों बात की थी?
2 मार्च 2025 को PM मोदी ने बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा से फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने बहरीन पर हुए हमलों की निंदा की, देश के लोगों के साथ एकजुटता जताई और भारतीय समुदाय को मिल रहे समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।
पश्चिम एशिया में मौजूदा संघर्ष की शुरुआत कैसे हुई?
फरवरी 2025 में अमेरिका और इजरायल ने ईरान की मिसाइल क्षमता और सैन्य ढाँचे को कमज़ोर करने के लिए संयुक्त हमले किए, जिसमें ईरान के कुछ वरिष्ठ अधिकारी मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमलों से खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को निशाना बनाया, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया।
राष्ट्र प्रेस
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