7 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रीवा में आदिवासी महिला की मौत: एम्बुलेंस न पहुंची, खाट पर 2 किमी कीचड़ में उठाकर ले गए परिजन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रीवा में आदिवासी महिला की मौत: एम्बुलेंस न पहुंची, खाट पर 2 किमी कीचड़ में उठाकर ले गए परिजन

सारांश

रीवा के डिहिया गाँव में पक्की सड़क न होने से एम्बुलेंस नहीं पहुँची और बिजली की चपेट में आई आदिवासी महिला रामकली रावत को परिजन खाट पर 2 किमी कीचड़ में उठाकर ले गए — इलाज मिलने से पहले ही उनकी मौत हो गई। पाँच साल में यह दूसरी ऐसी मौत है, और सड़क चार साल से अधूरी है।

मुख्य बातें

रामकली रावत की मौत 6 जुलाई को रीवा के डिहिया गाँव में हुई — बिजली गिरने के बाद एम्बुलेंस नहीं पहुँच सकी।
परिजनों को उन्हें खाट पर लगभग 2 किलोमीटर कीचड़ भरे रास्ते से अस्पताल ले जाना पड़ा; इलाज से पहले मौत हो गई।
डिहिया–नादना को जोड़ने वाली सड़क चार साल से अधूरी; 200 परिवार प्रभावित, 40–45 परिवार सीधे निर्भर।
विधायक नरेंद्र प्रजापति ने ₹4 लाख व ₹2 लाख विधायक फंड से मंजूर किए थे; 70% राशि जारी हुई, काम अधूरा।
12 अगस्त 2025 के ज्ञापन में ग्रामीणों ने केवल 6 ट्रक मिट्टी डालकर शेष धन के कथित गबन का आरोप लगाया — आधिकारिक पुष्टि नहीं।
पिछले पाँच वर्षों में यह दूसरी ऐसी मौत है; कोविड काल में भी एक महिला को इसी तरह खाट पर ले जाया गया था।

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहाँ एक आदिवासी महिला रामकली रावत की मौत हो गई — गाँव तक पक्की सड़क न होने के कारण एम्बुलेंस नहीं पहुँच सकी और परिजनों को उन्हें खाट पर लिटाकर लगभग 2 किलोमीटर कीचड़ भरे रास्ते से अस्पताल तक पैदल ले जाना पड़ा। 6 जुलाई की शाम हुई इस घटना ने मंगवां विधानसभा क्षेत्र की नादना (डिहिया) ग्राम पंचायत में बुनियादी ढाँचे की खस्ता हालत को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

घटनाक्रम: बिजली गिरी, सड़क नहीं थी, एम्बुलेंस नहीं पहुँची

ग्रामीणों के अनुसार, स्वर्गीय राम स्वयंवर रावत की पत्नी रामकली रावत पर रविवार की शाम बिजली गिर गई। परिजनों ने तत्काल मदद के लिए एम्बुलेंस बुलाने की कोशिश की, लेकिन गाँव तक कोई पक्की सड़क न होने के कारण वाहन मौके तक नहीं पहुँच सका। मजबूरन परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों ने रामकली को खाट पर उठाकर कीचड़ और दलदल भरे रास्ते से अस्पताल तक पहुँचाया। इलाज मिलने से पहले ही उनकी मौत हो गई। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सामने आया है।

अधूरी सड़क और चार साल की अनदेखी

डिहिया गाँव के निवासी पुष्पेंद्र तिवारी ने बताया, 'पक्की सड़क न होने की वजह से गाँव तक कोई एम्बुलेंस नहीं पहुँच सकी। हमें महिला को खाट पर लगभग 1 से 2 किलोमीटर तक ले जाना पड़ा। सड़क पर मिट्टी तो डाली गई थी, लेकिन कंकड़-पत्थर वाली मिट्टी बहुत कम थी। सड़क की हालत इतनी खराब थी कि पैदल चलना भी मुश्किल था।'

तिवारी ने बताया कि डिहिया और नादना गाँवों को जोड़ने वाली यह सड़क पिछले चार वर्षों से अधूरी पड़ी है। निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से संपर्क कर सड़क पूरी करने और कथित गड़बड़ियों पर कार्रवाई की माँग की, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। उनके अनुसार, इन दोनों गाँवों के लगभग 200 परिवार इस अधूरी सड़क से प्रभावित हैं, जिनमें से करीब 40 से 45 परिवार सीधे तौर पर इस पर निर्भर हैं।

विधायक फंड से पैसे मंजूर, फिर भी काम अधूरा

मंगवां के विधायक नरेंद्र प्रजापति ने स्वीकार किया कि उन्होंने इस सड़क परियोजना के लिए अपने विधायक फंड से धनराशि मंजूर की थी — एक गाँव के लिए ₹4 लाख और डिहिया ग्राम पंचायत के लिए ₹2 लाख। उन्होंने बताया कि मंजूर राशि का लगभग 70 प्रतिशत जारी कर दिया गया था, परंतु फंड की कमी के कारण शेष काम पूरा नहीं हो सका।

12 अगस्त 2025 को ग्रामीणों ने रीवा जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा था, जिसमें आरोप लगाया गया कि सड़क पर केवल छह ट्रक मिट्टी-कंकड़ का मिश्रण डाला गया, जबकि शेष धनराशि का कथित तौर पर गबन किया गया। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पाँच साल में दूसरी ऐसी मौत

तिवारी ने बताया कि पिछले पाँच वर्षों में यह इस तरह की दूसरी घटना है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी एक महिला को खाट पर ले जाना पड़ा था, क्योंकि गाँव तक कोई वाहन नहीं पहुँच सका था — और उनकी भी मौत हो गई थी। यह तथ्य दर्शाता है कि यह कोई अकेली दुर्घटना नहीं, बल्कि एक दोहराई जाने वाली प्रशासनिक विफलता है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण यादव ने आरोप लगाया कि इस घटना ने सरकार के 'डबल-इंजन विकास' के दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि एक आदिवासी महिला को खाट पर लिटाकर अस्पताल ले जाना पड़ा, क्योंकि वहाँ न तो ठीक-ठाक सड़क थी और न ही एम्बुलेंस पहुँच सकती थी। यादव ने सवाल उठाया कि बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण जब किसी की जान जाती है, तो इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह देखना होगा कि सड़क निर्माण के कथित अनियमितताओं की जाँच होती है या नहीं — और क्या डिहिया व नादना के 200 परिवारों को अगली बारिश से पहले पक्की सड़क मिल पाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक साल पुराना ज्ञापन, और पाँच साल में दूसरी ऐसी मौत — यह प्रशासनिक उदासीनता का दस्तावेज़ है, दुर्भाग्य का नहीं। विधायक फंड से पैसे मंजूर हुए, 70% जारी हुए, फिर भी सड़क नहीं बनी — यह जवाबदेही की नहीं, जवाबदेही के अभाव की कहानी है। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 'अंतिम मील संपर्क' की खाई तब तक नहीं पटेगी जब तक निधि-उपयोग की जाँच और सड़क-पूर्णता की समयसीमा सार्वजनिक न हो।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रीवा में आदिवासी महिला की मौत कैसे हुई?
डिहिया गाँव की निवासी रामकली रावत पर 6 जुलाई की शाम बिजली गिर गई। गाँव तक पक्की सड़क न होने से एम्बुलेंस नहीं पहुँच सकी और परिजनों को उन्हें खाट पर लगभग 2 किलोमीटर कीचड़ भरे रास्ते से अस्पताल ले जाना पड़ा, जहाँ इलाज मिलने से पहले ही उनकी मौत हो गई।
डिहिया गाँव की सड़क क्यों नहीं बनी?
मंगवां विधायक नरेंद्र प्रजापति के अनुसार, विधायक फंड से ₹6 लाख मंजूर हुए थे और 70% राशि जारी भी की गई, लेकिन फंड की कमी के कारण काम पूरा नहीं हो सका। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शेष धन का कथित तौर पर गबन किया गया — जिसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस घटना से कितने परिवार प्रभावित हैं?
डिहिया और नादना गाँवों के लगभग 200 परिवार इस अधूरी सड़क से प्रभावित हैं, जिनमें से करीब 40 से 45 परिवार सीधे तौर पर इस पर निर्भर हैं। चार साल से सड़क अधूरी होने के कारण इन परिवारों को आपात स्थिति में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
क्या इससे पहले भी ऐसी घटना हुई थी?
हाँ, पुष्पेंद्र तिवारी के अनुसार पिछले पाँच वर्षों में यह दूसरी ऐसी मौत है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी एक महिला को खाट पर ले जाना पड़ा था क्योंकि गाँव तक कोई वाहन नहीं पहुँच सका था, और उनकी भी मौत हो गई थी।
कांग्रेस और राजनीतिक दलों की क्या प्रतिक्रिया रही?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण यादव ने आरोप लगाया कि इस घटना ने सरकार के 'डबल-इंजन विकास' के दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि बुनियादी सुविधाओं की कमी से जब किसी की जान जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है। जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले