रीवा में आदिवासी महिला की मौत: एम्बुलेंस न पहुंची, खाट पर 2 किमी कीचड़ में उठाकर ले गए परिजन
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहाँ एक आदिवासी महिला रामकली रावत की मौत हो गई — गाँव तक पक्की सड़क न होने के कारण एम्बुलेंस नहीं पहुँच सकी और परिजनों को उन्हें खाट पर लिटाकर लगभग 2 किलोमीटर कीचड़ भरे रास्ते से अस्पताल तक पैदल ले जाना पड़ा। 6 जुलाई की शाम हुई इस घटना ने मंगवां विधानसभा क्षेत्र की नादना (डिहिया) ग्राम पंचायत में बुनियादी ढाँचे की खस्ता हालत को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
घटनाक्रम: बिजली गिरी, सड़क नहीं थी, एम्बुलेंस नहीं पहुँची
ग्रामीणों के अनुसार, स्वर्गीय राम स्वयंवर रावत की पत्नी रामकली रावत पर रविवार की शाम बिजली गिर गई। परिजनों ने तत्काल मदद के लिए एम्बुलेंस बुलाने की कोशिश की, लेकिन गाँव तक कोई पक्की सड़क न होने के कारण वाहन मौके तक नहीं पहुँच सका। मजबूरन परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों ने रामकली को खाट पर उठाकर कीचड़ और दलदल भरे रास्ते से अस्पताल तक पहुँचाया। इलाज मिलने से पहले ही उनकी मौत हो गई। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सामने आया है।
अधूरी सड़क और चार साल की अनदेखी
डिहिया गाँव के निवासी पुष्पेंद्र तिवारी ने बताया, 'पक्की सड़क न होने की वजह से गाँव तक कोई एम्बुलेंस नहीं पहुँच सकी। हमें महिला को खाट पर लगभग 1 से 2 किलोमीटर तक ले जाना पड़ा। सड़क पर मिट्टी तो डाली गई थी, लेकिन कंकड़-पत्थर वाली मिट्टी बहुत कम थी। सड़क की हालत इतनी खराब थी कि पैदल चलना भी मुश्किल था।'
तिवारी ने बताया कि डिहिया और नादना गाँवों को जोड़ने वाली यह सड़क पिछले चार वर्षों से अधूरी पड़ी है। निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से संपर्क कर सड़क पूरी करने और कथित गड़बड़ियों पर कार्रवाई की माँग की, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। उनके अनुसार, इन दोनों गाँवों के लगभग 200 परिवार इस अधूरी सड़क से प्रभावित हैं, जिनमें से करीब 40 से 45 परिवार सीधे तौर पर इस पर निर्भर हैं।
विधायक फंड से पैसे मंजूर, फिर भी काम अधूरा
मंगवां के विधायक नरेंद्र प्रजापति ने स्वीकार किया कि उन्होंने इस सड़क परियोजना के लिए अपने विधायक फंड से धनराशि मंजूर की थी — एक गाँव के लिए ₹4 लाख और डिहिया ग्राम पंचायत के लिए ₹2 लाख। उन्होंने बताया कि मंजूर राशि का लगभग 70 प्रतिशत जारी कर दिया गया था, परंतु फंड की कमी के कारण शेष काम पूरा नहीं हो सका।
12 अगस्त 2025 को ग्रामीणों ने रीवा जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा था, जिसमें आरोप लगाया गया कि सड़क पर केवल छह ट्रक मिट्टी-कंकड़ का मिश्रण डाला गया, जबकि शेष धनराशि का कथित तौर पर गबन किया गया। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पाँच साल में दूसरी ऐसी मौत
तिवारी ने बताया कि पिछले पाँच वर्षों में यह इस तरह की दूसरी घटना है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी एक महिला को खाट पर ले जाना पड़ा था, क्योंकि गाँव तक कोई वाहन नहीं पहुँच सका था — और उनकी भी मौत हो गई थी। यह तथ्य दर्शाता है कि यह कोई अकेली दुर्घटना नहीं, बल्कि एक दोहराई जाने वाली प्रशासनिक विफलता है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण यादव ने आरोप लगाया कि इस घटना ने सरकार के 'डबल-इंजन विकास' के दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि एक आदिवासी महिला को खाट पर लिटाकर अस्पताल ले जाना पड़ा, क्योंकि वहाँ न तो ठीक-ठाक सड़क थी और न ही एम्बुलेंस पहुँच सकती थी। यादव ने सवाल उठाया कि बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण जब किसी की जान जाती है, तो इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह देखना होगा कि सड़क निर्माण के कथित अनियमितताओं की जाँच होती है या नहीं — और क्या डिहिया व नादना के 200 परिवारों को अगली बारिश से पहले पक्की सड़क मिल पाएगी।