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भद्राचलम में मानवीय त्रासदी: शव वाहन न मिलने पर परिजन कंधों पर उठाकर ले गए शव, जाँच के आदेश

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भद्राचलम में मानवीय त्रासदी: शव वाहन न मिलने पर परिजन कंधों पर उठाकर ले गए शव, जाँच के आदेश

सारांश

भद्राचलम में हीटस्ट्रोक से मृत कांडी वेंकन्ना (45) का शव अस्पताल द्वारा वाहन न देने पर परिजन कंधों पर उठाकर ले गए। वायरल वीडियो के बाद जाँच के आदेश, बीआरएस और टीआरएस ने रेवंत रेड्डी सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

कांडी वेंकन्ना (45) की रविवार रात भद्राचलम सरकारी अस्पताल में हीटस्ट्रोक के इलाज के दौरान मृत्यु हो गई।
अस्पताल प्रशासन द्वारा शव वाहन न दिए जाने के आरोप के बाद परिजन शव को 1 किलोमीटर से अधिक कंधों पर उठाकर ले गए।
घटना के वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने सोमवार को जाँच के आदेश दिए।
हरीश राव और कार्यकारी अध्यक्ष के.
रामाराव ने कांग्रेस सरकार की तीखी आलोचना की।
कविता ने दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की।

तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले के भद्राचलम स्थित सरकारी अस्पताल में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहाँ शव वाहन उपलब्ध न कराए जाने के कारण एक गरीब परिवार को अपने रिश्तेदार का शव कंधों पर उठाकर ले जाने पर मजबूर होना पड़ा। यह घटना रविवार रात की है और सोमवार को इसके वीडियो व तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जाँच के आदेश दिए।

मुख्य घटनाक्रम

कांडी वेंकन्ना (45) हीटस्ट्रोक की चपेट में आने के बाद भद्राचलम सरकारी अस्पताल में भर्ती थे। रविवार रात इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। परिजनों के अनुसार, अस्पताल प्रशासन ने शव को घर तक पहुँचाने के लिए कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के पास कोई विकल्प न होने के कारण उन्हें शव को कंधों पर उठाकर एक किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करनी पड़ी।

घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने के बाद व्यापक आक्रोश उत्पन्न हुआ। जिला प्रशासन ने सोमवार को मामले की जाँच के आदेश जारी किए, हालाँकि अभी तक किसी अधिकारी के विरुद्ध ठोस कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेता टी. हरीश राव ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, 'क्या यही वह 'प्रजा पालना' (जनता का शासन) है, जिसका लोगों से वादा किया गया था?' उन्होंने तेलंगाना की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति को 'बेहद चिंताजनक और दुखद' बताया।

हरीश राव ने एक अन्य घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर तंदूर में एक गरीब गर्भवती महिला को रेलवे प्लेटफॉर्म पर प्रसव करना पड़ा, क्योंकि 108 एंबुलेंस सेवा ने बार-बार कॉल करने के बावजूद कथित तौर पर सहायता नहीं पहुँचाई।

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव ने एक्स पर लिखा, 'जीते जी कोई सहारा नहीं और मौत के बाद भी सम्मान नहीं। कांग्रेस सरकार ने तेलंगाना को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया है।' उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के कार्यकाल में गरीबों के अंतिम संस्कार के लिए विशेष वाहन उपलब्ध कराए जाते थे।

तेलंगाना रक्षा सेना (टीआरएस) की नेता के. कविता ने भी घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे रेवंत रेड्डी सरकार की गरीबों के प्रति संवेदनहीनता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा, 'यह पढ़कर दिल दहल जाता है कि आर्थिक तंगी से जूझ रहा परिवार एक किलोमीटर से अधिक दूरी तक शव को कंधों पर उठाकर ले गया।' कविता ने दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग की है।

सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब तेलंगाना में भीषण गर्मी के कारण हीटस्ट्रोक के मामलों में तेज़ी आई है। आलोचकों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में शव वाहन की अनुपलब्धता कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में स्वास्थ्य ढाँचे की पुरानी खामियों को उजागर करती है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब देश में किसी परिवार को शव वाहन के अभाव में इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा हो।

आगे क्या होगा

जिला प्रशासन द्वारा जाँच के आदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन विपक्षी दलों ने माँग की है कि दोषी अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी सरकारी अस्पतालों में शव वाहन की अनिवार्य व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस मामले पर तेलंगाना विधानसभा में भी सवाल उठने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जाँच के आदेश से आगे जवाबदेही कब तय होगी। तेलंगाना में सत्ता परिवर्तन के बाद भी अगर बुनियादी स्वास्थ्य ढाँचे में कोई बदलाव नहीं आया, तो यह केवल एक सरकार की नहीं, बल्कि व्यवस्थागत उदासीनता की विफलता है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भद्राचलम में शव कंधों पर ले जाने की घटना क्या है?
तेलंगाना के भद्राचलम सरकारी अस्पताल में हीटस्ट्रोक से इलाज के दौरान कांडी वेंकन्ना (45) की रविवार रात मृत्यु हो गई। आरोप है कि अस्पताल ने शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया, जिसके कारण आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवार को शव कंधों पर उठाकर एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी पड़ी।
इस घटना पर प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने सोमवार को मामले की जाँच के आदेश दिए। हालाँकि अभी तक किसी अधिकारी के विरुद्ध ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
बीआरएस और टीआरएस ने इस पर क्या कहा?
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव ने एक्स पर लिखा कि कांग्रेस सरकार में जीते जी और मरने के बाद भी गरीबों को सम्मान नहीं मिलता। टीआरएस नेता के. कविता ने रेवंत रेड्डी सरकार को नैतिक रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की।
पहले की सरकार में इस तरह की सुविधा थी?
बीआरएस नेताओं के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के कार्यकाल में गरीबों के अंतिम संस्कार के लिए विशेष वाहन उपलब्ध कराए जाते थे। हालाँकि यह दावा विपक्षी दल की ओर से है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
इस घटना से तेलंगाना की स्वास्थ्य व्यवस्था पर क्या सवाल उठते हैं?
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में हीटस्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि ग्रामीण और कस्बाई सरकारी अस्पतालों में शव वाहन, एंबुलेंस और बुनियादी सुविधाओं की कमी एक व्यापक और पुरानी समस्या है जिसे तत्काल संबोधित किए जाने की ज़रूरत है।
राष्ट्र प्रेस
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