चक्रधरपुर अस्पताल की लापरवाही से नवजात की मौत, गत्ते में शव ले जाने पर मजबूर पिता

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चक्रधरपुर अस्पताल की लापरवाही से नवजात की मौत, गत्ते में शव ले जाने पर मजबूर पिता

सारांश

झारखंड के चाईबासा जिले में चक्रधरपुर अस्पताल में लापरवाही का एक मामला सामने आया है, जहां एक गरीब पिता को अपने नवजात शिशु के शव को गत्ते के डिब्बे में रखकर घर ले जाना पड़ा। इस घटना ने क्षेत्र में गहरा आक्रोश उत्पन्न किया है।

Key Takeaways

  • लापरवाही से नवजात की मौत
  • गत्ते में शव ले जाने की मजबूरी
  • सरकारी अस्पतालों में उपेक्षा का व्यवहार
  • दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
  • महत्वपूर्ण मानवता का सवाल

चाईबासा, 8 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के पश्चिमी चाईबासा जिले के चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां एक गरीब पिता को अपने नवजात शिशु के शव को गत्ते के डिब्बे में रखकर घर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस घटना की तस्वीरें सामने आने के बाद क्षेत्र में गहरा आक्रोश और दुख का माहौल बन गया है।

कराईकेला थाना क्षेत्र के बंगरासाई गांव के निवासी रामकृष्ण हेम्ब्रम ने तीन दिन पहले अपनी पत्नी रीता तिरिया को प्रसव के लिए चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया था। शनिवार को रीता तिरिया ने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन जन्म के कुछ समय बाद ही नवजात की मृत्यु हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी।

परिजनों के अनुसार, नवजात की मृत्यु के बाद अस्पताल प्रशासन ने परिवार को किसी प्रकार की मदद देने के बजाय शव को जल्द से जल्द अस्पताल से हटाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। जब पिता रामकृष्ण हेम्ब्रम ने बच्चे के शव को घर तक ले जाने के लिए एम्बुलेंस की मांग की, तो उन्हें कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। आर्थिक तंगी और मजबूरी के कारण अंततः पिता को गत्ते के डिब्बे में नवजात के शव को रखना पड़ा और उसी हालत में वह उसे लेकर अपने गांव के लिए निकल पड़े।

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों के साथ अक्सर उपेक्षा का व्यवहार किया जाता है। उनका कहना है कि यदि अस्पताल प्रशासन चाहता तो मानवता के नाते एम्बुलेंस से शव को घर तक पहुंचाया जा सकता था।

ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही, दोषी स्वास्थ्य कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की भी मांग उठाई है।

इस मामले में चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. अंशुमन शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि पीड़ित परिवार की ओर से शव को घर ले जाने के लिए किसी प्रकार की सहायता की मांग नहीं की गई थी। यदि परिवार अस्पताल प्रशासन से संपर्क करता तो ममता वाहन के जरिए शव को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा सकती थी।

उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में यह स्थिति उत्पन्न हुई और इस घटना से वे भी दुखी हैं। साथ ही, उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से अस्पताल में इलाज के दौरान अपनी समस्याएं डॉक्टरों को बताने की अपील की है ताकि समय पर सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

Point of View

बल्कि यह झारखंड के सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर भी गंभीर प्रश्न उठाती है। गरीब मरीजों के प्रति उपेक्षा की यह मानसिकता समाज में एक गंभीर समस्या बन चुकी है।
NationPress
08/03/2026

Frequently Asked Questions

इस घटना के पीछे क्या कारण है?
अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण नवजात की मृत्यु हुई, जिसके बाद परिवार को शव ले जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ा।
क्या अस्पताल ने परिवार को कोई सहायता प्रदान की?
अस्पताल प्रशासन ने परिवार को किसी भी प्रकार की सहायता नहीं दी और शव को जल्द हटाने का दबाव बनाया।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया क्या थी?
ग्रामीणों ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ गुस्से का इजहार किया और उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
क्या अस्पताल में प्रबंधन ने कुछ कहा?
चिकित्सा प्रभारी ने कहा कि परिवार की ओर से कोई सहायता मांग नहीं की गई थी और जानकारी के अभाव में यह स्थिति बनी।
क्या सरकार इस मामले में कुछ करेगी?
ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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