मुंगेर सदर अस्पताल के SNCU में नवजात की मौत, परिवार ने लगाया चिकित्सा लापरवाही का आरोप

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मुंगेर सदर अस्पताल के SNCU में नवजात की मौत, परिवार ने लगाया चिकित्सा लापरवाही का आरोप

सारांश

मुंगेर सदर अस्पताल के SNCU में 30 अप्रैल को भर्ती एक नवजात शिशु की मौत ने परिवार को सड़क पर उतार दिया। चिकित्सा लापरवाही, रात में निगरानी का अभाव और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोपों के बीच अस्पताल प्रशासन की चुप्पी सवाल खड़े करती है — और बिहार की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही फिर कटघरे में है।

Key Takeaways

मुंगेर सदर अस्पताल के SNCU में 30 अप्रैल को भर्ती नवजात शिशु की 2 मई को मौत हो गई। नवजात को हवेली खड़गपुर से रेफर किया गया था; माँ मनीषा कुमारी ने खड़गपुर उपमंडल अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। परिजनों ने रात में निगरानी का अभाव, हीटर के अत्यधिक उपयोग, समय पर सूचना न देने और नर्सिंग स्टाफ द्वारा दुर्व्यवहार के आरोप लगाए। डॉक्टरों ने कथित तौर पर बिगड़ती हालत का कारण 'चमकी' रोग (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) बताया, परंतु उच्च केंद्र रेफर नहीं किया। कोतवाली पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभाली; परिवार ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। अस्पताल प्रशासन ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

बिहार के मुंगेर स्थित सदर अस्पताल की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में एक नवजात शिशु की मौत के बाद 2 मई को तनाव का माहौल छा गया। शोकाकुल परिवार के सदस्यों ने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए चिकित्सा लापरवाही और नर्सिंग स्टाफ द्वारा दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद कोतवाली पुलिस को मौके पर पहुँचकर स्थिति संभालनी पड़ी।

घटनाक्रम: कैसे हुई नवजात की मौत

हवेली खड़गपुर निवासी मनीषा कुमारी ने गुरुवार को खड़गपुर उपमंडल अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। नवजात की हालत गंभीर होने के कारण उसे बेहतर उपचार के लिए मुंगेर सदर अस्पताल रेफर किया गया और 30 अप्रैल को SNCU में भर्ती कराया गया।

परिवार के सदस्यों के अनुसार, डॉक्टरों ने शुरुआत में नवजात की हालत स्थिर बताई, लेकिन धीरे-धीरे उसकी स्थिति बिगड़ती चली गई। रिश्तेदारों का दावा है कि डॉक्टरों ने बिगड़ती हालत का कारण 'चमकी' रोग (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) बताया, परंतु बच्चे को किसी उच्च चिकित्सा सुविधा केंद्र में समय पर रेफर नहीं किया गया।

परिजनों का आरोप: अचानक मृत्यु की घोषणा से भड़का आक्रोश

शनिवार सुबह जब परिवार के सदस्य अस्पताल पहुँचे, तो उन्हें पहले बताया गया कि नवजात की हालत स्थिर है। कुछ ही देर बाद डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। इस अचानक घोषणा से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया और कर्मचारियों पर लापरवाही के आरोप लगाए।

गौरतलब है कि परिवार ने नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ कई विशिष्ट आरोप लगाए हैं — रात के समय उचित निगरानी का अभाव, हीटर के अत्यधिक उपयोग से बच्चे की हालत बिगड़ना, बिगड़ती स्थिति की समय पर सूचना न देना, और नर्सिंग स्टाफ द्वारा दुर्व्यवहार व धमकियाँ देना।

पुलिस का हस्तक्षेप और शिकायत दर्ज

हंगामे की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस स्टेशन की टीम अस्पताल पहुँची और स्थिति को नियंत्रण में किया। पुलिस ने परिवार को लिखित शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी, जिसके बाद परिजनों ने औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराई और जिम्मेदार नर्सिंग स्टाफ के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग की।

अस्पताल प्रशासन की चुप्पी

आरोपों की गंभीरता के बावजूद, मुंगेर सदर अस्पताल प्रशासन ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता पर पहले से सवाल उठते रहे हैं।

आगे क्या होगा

परिवार की शिकायत के आधार पर निष्पक्ष जाँच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि क्या चिकित्सा लापरवाही ने नवजात की मौत में कोई भूमिका निभाई। मामले की जाँच के नतीजे न केवल इस परिवार के लिए, बल्कि राज्य में SNCU सेवाओं की जवाबदेही के लिए भी महत्वपूर्ण होंगे।

Point of View

जवाबदेही का सवाल अनुत्तरित रहेगा। परिवार के आरोप गंभीर हैं और निष्पक्ष जाँच ज़रूरी है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस जाँच के नतीजे वास्तव में व्यवस्था में बदलाव लाएँगे या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

मुंगेर सदर अस्पताल SNCU में नवजात की मौत कैसे हुई?
हवेली खड़गपुर निवासी मनीषा कुमारी के नवजात को 30 अप्रैल को मुंगेर सदर अस्पताल के SNCU में भर्ती कराया गया था। 2 मई को डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया; परिवार का आरोप है कि उचित निगरानी और समय पर उपचार नहीं हुआ।
परिवार ने अस्पताल पर क्या-क्या आरोप लगाए हैं?
परिजनों ने रात में उचित निगरानी का अभाव, हीटर के अत्यधिक उपयोग से बच्चे की हालत बिगड़ना, बिगड़ती स्थिति की समय पर सूचना न देना और नर्सिंग स्टाफ द्वारा दुर्व्यवहार व धमकियाँ देने के आरोप लगाए हैं।
'चमकी' रोग या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम क्या है?
एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES), जिसे बिहार में 'चमकी' बुखार कहते हैं, मस्तिष्क की एक गंभीर सूजन संबंधी बीमारी है जो मुख्यतः बच्चों को प्रभावित करती है। इसमें तत्काल और विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है।
मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
कोतवाली पुलिस स्टेशन की टीम ने अस्पताल परिसर में पहुँचकर स्थिति नियंत्रण में की और परिवार को लिखित शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। परिजनों ने औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है।
अस्पताल प्रशासन ने इस मामले पर क्या कहा?
मुंगेर सदर अस्पताल प्रशासन ने अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। परिवार की शिकायत के आधार पर जाँच से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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