जयशंकर का दोहा में प्रवासी भारतीयों से संवाद, कतर यात्रा में द्विपक्षीय साझेदारी पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपनी खाड़ी देशों की चार-देशीय यात्रा के पहले पड़ाव पर दोहा में भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और कतर के समाज में उनके समर्पण एवं योगदान की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में भारत के संबंधों को आगे बढ़ाने में प्रवासी भारतीयों का कल्याण सदैव एक प्रमुख प्राथमिकता रही है।
प्रवासी भारतीयों से मुलाकात
जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'रविवार शाम कतर में भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से अच्छी मुलाकात हुई। हमने इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्र के साथ हमारे रिश्तों में भारतीय समुदाय का कल्याण हमेशा एक अहम प्राथमिकता है। इन मुश्किल समय में कतर के समाज के लिए उनका समर्पण और योगदान सचमुच सराहनीय है।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत-कतर साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रवासी भारतीयों के अनुभव और सुझाव बेहद महत्वपूर्ण हैं।
कतर के प्रधानमंत्री से द्विपक्षीय वार्ता
विदेश मंत्री जयशंकर ने रविवार को दोहा में कतर के प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से भी मुलाकात की। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'आज दोहा में कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से मिलकर खुशी हुई। मैंने भारत के लोगों की सुरक्षा और उनके अच्छे हाल-चाल का ध्यान रखने के लिए उनका धन्यवाद किया।' दोनों नेताओं ने ऊर्जा, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और लोगों के आपसी संबंधों समेत द्विपक्षीय सहयोग के कई पहलुओं की समीक्षा की।
जयशंकर के अनुसार, कतर के प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और उसके व्यापक प्रभाव पर भी अपने विचार साझा किए। रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के नए अवसरों पर भी चर्चा हुई।
चार देशों की यात्रा का उद्देश्य
विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर 5 जुलाई से 10 जुलाई तक कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य इन चारों खाड़ी देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करना, क्षेत्रीय परिस्थितियों पर विचार-विमर्श करना और आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर सार्थक संवाद स्थापित करना है। गौरतलब है कि खाड़ी क्षेत्र में लाखों प्रवासी भारतीय कार्यरत हैं, जो भारत को भेजे जाने वाले विप्रेषण (रेमिटेंस) में अहम योगदान देते हैं।
भारत-कतर संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और कतर के बीच राजनयिक संबंध 1973 में स्थापित हुए थे और 2023 में इन संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया। दोनों देशों के बीच संबंधों की नींव पुराने व्यापारिक रिश्तों और मजबूत लोक-से-लोक संपर्क पर टिकी है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है, जिससे क्षेत्र में मौजूद प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और हितों को लेकर भारत की सक्रियता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
आगे की राह
दोहा के बाद जयशंकर बहरीन, कुवैत और ओमान का दौरा करेंगे। यह यात्रा भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट वेस्ट' नीति के तहत खाड़ी देशों के साथ संबंधों को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।