कतर के पीएम से एस जयशंकर की बातचीत: संघर्ष खत्म कर शांति पर जोर
सारांश
Key Takeaways
- डॉ. एस. जयशंकर की कतर के पीएम से फोन पर बातचीत।
- मिडिल ईस्ट की स्थिति पर चर्चा।
- सैन्य कार्रवाई की बढ़ोतरी के प्रभाव।
- शांति से विवाद सुलझाने के उपाय।
- वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का महत्व।
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी से फोन पर चर्चा की। इस बातचीत में मिडिल ईस्ट में वर्तमान हालात पर विचार-विमर्श किया गया। कतर के विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की।
कतर के विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत के विदेश मंत्री द्वारा प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री को फोन किया गया। दोनों नेताओं ने बातचीत में देश में सैन्य कार्रवाई की वृद्धि के प्रभाव और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके गंभीर परिणामों को लेकर चर्चा की। साथ ही, सभी विवादों को शांति से सुलझाने के उपायों का भी जायजा लिया गया। उन्होंने नेविगेशन की आजादी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कतर के विदेश मंत्रालय ने बयान दिया, "प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने कतर तथा अन्य देशों पर ईरान के गलत हमलों को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया।" उन्होंने आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, विशेषकर पानी, भोजन और ऊर्जा सुविधाओं को गलत तरीके से निशाना बनाने के खिलाफ चेतावनी दी। प्रधानमंत्री ने एकजुटता को बढ़ाने, मिलकर प्रयास तेज करने, बातचीत की मेज पर लौटने और संकट को रोकने के लिए समझदारी और तर्क को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, यात्रा की आजादी, पर्यावरण की सुरक्षा और क्षेत्र की स्थिरता बनी रहे।
इससे पहले, डॉ. एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से भी फोन पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष पर विचार किया।
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का फोन आया। वर्तमान स्थिति पर चर्चा की।" हालांकि, उन्होंने बातचीत के विशेष बिंदुओं के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी।
यह बातचीत पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के backdrop में हुई है। होर्मुज स्ट्रेट तेल परिवहन का एक महत्वपूर्ण वैश्विक मार्ग है। इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ गई हैं और विभिन्न पक्षों से तीखी बयानबाजी हो रही है, जिससे बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
भारत इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र में उसके महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हैं। भारत के कच्चे तेल के आयात का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है, इसलिए वहां की स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।